कोरोना का बदलता स्वरूप-चकमा देकर मौत आई

Samachar Jagat | Wednesday, 14 Jul 2021 09:43:35 PM
Changing nature of corona - death came by dodging

परिवार सदमें में बच्चों की षिक्षा के लिए चितिंत विधवा मां
दिव्यांग बच्चों को पालनहार योजना से जोडने की कवायद

14 जूलाई, जयपुर। कोविड-19 की दुसरी लहर में कोरोना के कई रूप डेल्टा, डेल्टा प्लस, अल्फा, कुपा देखने को मिल रहा है। 90 प्रतिषत लोग खांसी-जुखाम, बुखार जैसी सामान्य बिमारी समझ कर होम क्वारटाईन रह कर इलाज कर रहे है और ठीक भी हो गये। 10 प्रतिषत लोगों के साथ कोरोना अलग-अलग रंग में दिखाई दे रहा है। कभी लगता है मरीज बिल्कुल ठीक हो गया, कुछ ही घण्टों बाद अचानक ऑक्सीजन लेवल कम होने लगती है और आदमी दम तोड देता है। कोरोना के बदलते स्वरूप का एक विचित्र केस रामको की ढाणी, सांगानेर में श्रम विभाग, यूनिसेफ एवं पीसीसीआरसीएस के संयुक्त तत्वावधान में चलाये जा रहे नन्हे हाथ कलम के साथ अभियान के घर-घर भ्रमण के दौरान अभियान के बाल मित्रो ंको देखने को मिला। 36 साल की संतोष देवी बताती है कि दो बच्चों के साथ पति धन्नालाल खेती-बाडी का कम करते थे। गृहस्ती ठीक-ठाक चल रही थी। 25 अप्रैल को पति को अचानक बुखार आया तो नीजी अस्पताल में दिखाया। दो दिन बाद ठीक हो गये। फिर दो दिन खांसी और सांस की तकलीफ बढी कोरोना टेस्ट कराने पर पॉजिटिव आये। होम क्वारटाईन के 14 दिन बाद तबीयत ठीक होने लगी। अचानक ऑक्सीजन लेवल कम होने लगा और सांस उखडने लगी। अस्पताल में मारा-मारी हो रही थी। ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था हुई फिर नीजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां दो दिन बाद 15 मई को मृत्यु हो गई। घर में 18 साल का शुभम और 16 साल तरूण सैनी जो बी.ए प्रथम वर्ष और 12वीं में अध्ययनरत है। घर में कमाने वाले मुखिया की मौत से परिवार सदमें है। अभियान के बाल मित्रों द्वारा मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना की जानकारी देते हुए आवेदन तैयार कराने में मदद की। 
    अभियान दल कारवां ग्राम पंचायत मूण्डिया रामसर के राजस्व गांव जयसिंहपुरा में कैलाष जाजोरिया और पत्नी कंचन देवी दोनो ही दिव्यांग है। कैलाष के पिता रामजीलाल की हाल ही में 5 मई को कोरोना से मौत हुई है। उनकी पत्नी श्योपुरी देवी अपने दो बच्चों के साथ वृद्वा एवं दिव्यांग पेंषन से घर की गृहस्ती चल रही है। दिव्यांग दम्पती अपने दो बच्चें कार्तिक 6 वर्ष और लक्ष 4 वर्ष को अच्छी षिक्षा दिलाने के सपने पाल रखे। दिव्यांगता के बावजूद बच्चों को पालने के लिए घर पर ही सिलाई का काम कर पढा रही है। अभियान के बाल मित्रों द्वारा पालनहार योजना की जानकारी दी गई। अषिक्षा के चलते पात्र होते हुए भी योजना का लाभ नही मिल पा रहा था। जब बाल मित्रों ने बताया कि प्रति माह दोनो बच्चों को एक-एक हजार रूपये योजना अन्तर्गत 18 वर्ष होने तक मिलेगा साथ ही गणवेष इत्यादि प्रति वर्ष 2000 रूपये अलग से। दिव्यांग दंम्पती ने बाल मित्रों के सहयोग से ई-मित्र पर ऑनलाईन आवेदन भरने की प्रक्रिया शुरू की।  

अभियान दल को ग्राम पंचायत मूण्डिया रामसर में भ्रमण के दौरान 18 षिक्षा से वंचित/ड्रॉप आउट बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः स्कूलों से जोडने की प्रक्रिया के साथ ही पालनहार योजना के 4, विधवा पेंषन 3, वृद्वा पेंषन 1, मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना 2, विकलांग पेंषन 1, चिरंजीवी योजना 2, एवं निर्माण श्रमिक योजना के 3 आवेदन तैयार कराने में मदद की गई।



 
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