आखिर क्यों अपने पुत्र दुर्योधन को निर्वस्त्र देखना चाहती थी गांधारी, जानें कारण

Samachar Jagat | Thursday, 30 Jul 2020 01:45:47 PM
why did Gandhari want to see her son Duryodhana naked

महाभारत की पौराणिक कथा में आप सभी दुर्योधन की माता गांधारी के बारे में तो जानते ही हैं। गांधारी भगवान शिव की परम भक्त थी और उन्हें भगवान शिव से एक वरदान भी मिला हुआ था जिसके चलते वे अपने पुत्र दुर्योधन को नग्न देखना चाहती थी। गांधारी को ये वरदान था कि वह जिस किसी को भी अपने आँख की पट्टी खोल कर देखेगी उसका शरीर वज्र के समान कठोर हो जाएगा लेकिन कृष्ण के बहकावे के कारण यह मुमकिन नहीं हो पाया था। 

 गांधारी दुर्योधन से कहती है कि- हे पुत्र गंगा जाकर स्नान कर आओ और वहां से सीधे मेरे पास आओ किंतु ऐसे ही जैसे तुम जन्म के समय थे। तब दुर्योधन कहता है नग्न माताश्री? गांधारी कहती है मां के समक्ष कैसी लज्जा? जाओ स्नान कर के मेरे सामने आओ। 

दुर्योधन स्नान कर के अपनी माँ के कक्ष में जा रहे होते हैं। श्रीकृष्ण हंसते हुए कहते हैं युवराज दुर्योधन आप और इस अवस्था में? तुम्हारे वस्त्र कहा हैं और तुम्हारा मुख अपनी माता गांधारी के कक्ष की ओर है। कहीं तुम वहीं तो नहीं जा रहे। 

तब दुर्योधन कहता है कि माताश्री का यही आदेश था। तब श्रीकृष्ण कहते हैं किंतु वो तुम्हारी माता है। ये मत भूलों कि अब एक वयस्क पुत्र हो और कोई वयस्क अपनी माता के सामने पूर्ण नग्न नहीं जाता युवराज। भरतवंश की तो ये परंपरा नहीं है। फिर श्रीकृष्ण कहते हैं कि जाओ जाओ माता को प्रतीक्षा नहीं करवाओ यह कहते हुए श्री हंसते हुए वहां से चले जाते हैं।

तब दुर्योधन सोच में पड़ जाता है और फिर वह अपने गुप्तांगों पर केल के पत्ते लपेटकर माता गांधारी के समक्ष उपस्थित हो जाता है। । तब गांधारी कहती है मैं क्षणभर के लिए अपनी आंखों पर बंधी ये पट्टी खोलने जा रही हूं। ऐसा कहकर गांधारी अपनी आंखों की पट्टी खोलकर दुर्योधन को देखती है तो उसकी आंखों से प्रकाश निकलकर दुर्योधन के शरीर पर गिरता है। लेकिन दुर्योधन गुप्तांग पर केले के पत्ते बांध कर आता है तो गांधारी कहती है कि ये तुमने क्या किया? तब दुर्योधन कहता है कि मैं आपके सामने नग्न कैसे आता माताश्री? तब गांधारी कहती है किंतु मैंने तो तुम्हें यही आदेश दिया था।

वह कहती हैं, तुम्हारे शरीर का वह भाग जिस पर मेरी दृष्टि पड़ी ही नहीं दुर्बल रह गया पुत्र। शरीर का शेष भाग वज्र का हो गया। दुखी होकर वह अपनी पट्टी पुन पहन लेती है। तब दुर्योधन कहता है कि मैं दोबारा इस तरह बिना वस्त्रों के आता हूँ।  तब गांधारी कहती है कि मैं कोई मायावी नहीं हूं। मैंने उस एक दृष्टि में अपनी भक्ति, अपना सतित्व और अपनी ममता की सारी शक्ति मिला दी थी पुत्र।

तब दुर्योधन कहता है कि आप चिंता न करें माताश्री। मैं कल भीम से गया युद्ध करूंगा और गदा युद्ध के नियम के अनुसार कमर के नीचे प्रहार करना वर्जित है। अंत में भीम दुर्योधन की जंघा उखाड़कर उसका वध कर देता है।



 
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