Travel Guide : इतिहास के साथ-साथ प्रकृति के भी करीब आना चाहते हैं तो जल्द बनाएं राजस्थान के इस शहर का ट्रेवल प्लान? इस तरह पहुंचे केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी अभ्यारण्य?

Samachar Jagat | Wednesday, 31 Mar 2021 04:25:12 PM
Travel Guide: If you want to get closer to nature as well as history, then make a travel plan for bharatpur city of Rajasthan soon? This is how the Keoladeo National Bird Sanctuary arrived?

लाइफस्टाइल डेस्क। घुमक्कड़ी के शौकीनों के लिए आज हम भरतपुर की सैर पर निकल रहे हैं। भरतपुर को राजस्थान का प्रवेश द्वार कहा जाता है। भरतपुर घूमने के लिहाज से बेहतर जगह है। यहां आप इतिहास से तो रूबरू होंगे ही साथ ही प्रकृति के भी करीब आने का मौका मिलेगा। मार्च के महीने में घूमने का प्लान कर रहे हैं तो आप राजस्थान के भरतपुर को लिस्ट में शामिल कर सकते हैं। यहां आप अपने दोस्तों के साथ जाकर प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं।

तो आइए जानते हैं राजस्थान के भरतपुर में आप किन जगहों को देख सकते हैं और यहां कैसे पहुंचे..

ऐसे पहुंचे भरतपुर

भरतपुर एनसीआर से सटा हुआ है। दिल्ली नजदीक ही है। आप दूसरे राज्य से भरतपुर आ रहे हैं तो दिल्ली होते हुए भी पहुंच सकते हैं। यदि आपके यहां से जयपुर नजदीक है तो पहले जयपुर पहुंचे। हवाई मार्ग से आ रहे हैं तो जयपुर एयरपोर्ट पर उतरे और यहां से सिंधी कैंप बस स्टैंड पहुंचे।  यहां आपको भरतपुर के लिए सीधी बस मिल जाएगा। दिल्ली से भी सीधी बसें उपलब्ध हैं।

केवलादेव पक्षी अभ्यारण्य - दिल्ली से भरतपुर जाने के लिए 4-5 घंटे लगते हैं। दिल्ली से भरतपुर की दूरी 220 किमी है। यहां आप बर्ड सैंक्चुरी घूमने जा सकते हैं। अक्टूबर से मार्च महीने तक यहां लगभग 500 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी देखे जा सकते हैं। यहां आपके एक से बढ़िया एक फोटो क्लिक कर सकते हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए ये जगह स्वर्ग से कम नहीं है।

लोहागढ़ किला - यह घूमने के लिए काफी अच्छी जगह है। यह लोहागढ़ किला भरतपुर में स्थित है। इस किले को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कितना मजबूत बना है। कहा जाता है कि मुगलों और अंग्रेजों ने इसे तोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन इसकी मजबूती के कारण वे अपनी कोशिश में कामयाब न हो सके। आज ये टूरिस्ट के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

जल महल - यह डीग भरतपुर में स्थित है। भरतपुर से इसकी दूरी 32 किमी है। कहा जाता है कि इसका निर्माण 1772 में हुआ था। यहां आपको सालों पुरानी चीजें देखने को मिल सकती है। जिसे देख आप यहां के इतिहास के बारे में जान सकते हैं।




 
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