कोरोना वायरस की दहशत और कोलकाता के सोनागाछी में पसरा सन्नाटा

Samachar Jagat | Wednesday, 20 May 2020 12:30:01 PM
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बीके पाल एवेन्यू अपने दफ्तर जाते हुए रोज ही सोनागाछी के इलाके से गुजरना होता था. ट्राम लाइनों का जाल बिछा था और उसा ट्राम लाइनों के साथ खड़ी रहतीं थी जिस्मफरोशी (जिन्हें बाद में जिस्म की मजदूर कहा जाने लगा) का कारोबार करने वाली महिलाएं. दिन में इलाका सोया रहता था लेकिन शाम होते ही इलाका गुलजार होने लगता था. हमारे अखबार का दफ्तर इसी इलाके में था इसलिए उनसे रोज ही सामना होता था. एक बार किसी स्वंयसेवी संस्था ने उसी गली के अंदर जहां वे रहतीं थीं और कारोबार भी करतीं थीं, कोई कार्यक्रम रखा था, मेरे संपादक ने रिपोर्टिंग के लिए मुझे भेजा था. एक डर जो पैदा किया गया था उसके साथ वहां गया था, लौटा और रिपोर्टिंग की भी.

यह सही है कि एशिया में यौनकर्मियों के सबसे बड़े बाज़ार कोलकाता का सोनागाछी हमेशा गुलजार रहता था. लेकिन कोरोना की दहशत की वजह से यहां भी सन्नाटा पसरा है. इससे यहां रहने वाली यौनकर्मियों के सामने भूखों मरने की नौबत आई है. कई यौनकर्मियां घरों के किराए तक नहीं दे पा रही हैं. कोलकाता में इन यौनकर्मियों के संगठन दुर्बार महिला समन्व्य समिति (डीएमएसएस) का कहना है कि पहले यहां रोज करीब चालीस हजार ग्राहक आते थे वहीं अब यह तादाद घट कर पांच सौ से भी कम गई है. इससे देह व्यापार के जरिए रोजी-रोटी चलाने वाली महिलाओं को भारी दिक्कत हो रही है. इसके अलावा यहां इस पेशे की वजह से हजारों एजंटों, रिक्शावालों और दुकानदारों की रोजी-रोटी भी चलती थी. लेकिन उनका धंधा भी बंद है.

इलाके में मकानों के किराया पांच से पचहत्तर हजार तक हैं. लेकिन जब रोटी के ही लाले पड़े हों तो किराया का इंतजाम तो चांद पर कमंद डालने जैसा है. कोरोना वायरस ने पहली बार हमेश गुलजार रहने वाले लालबत्ती इलाके को बेरंग कर डाला है. बंगाल की लगभग पांच लाख यौनकर्मियों के सामने परेशान करने वाले हालात हैं. सोनागाछी इलाके में ग्यारह हजार यौनकर्मी स्थायी तौर पर रहती हैं. इसके अलावा कोलकाता से सटे उपनगरों से भी औसतन तीन हजार महिलाएं यहां आती हैं. लेकिन वे यहां रहती नहीं हैं. दुर्बार महिला समन्व्य समिति इनके अधिकारों के लिए लंबे समय से लड़ाई लड़ रही है.

समिति की अध्यक्ष विशाखा लस्कर के मुताबिक लोगों में कोरोना का आतंक है और लॉकडाउन भी है इसलिए वे नहीं आ रहे हैं. अब मुश्किल से रोजा किसी तरह छुपते-छुपाते पांच सौ लोग पहुंचते हैं. संक्रमण के अंदेशे से कई यौनकर्मियों ने भी सर्दी-खांसी के लक्षण वाले ग्राहकों को मना कर दिया है. विशाखा कहती हैं कि ग्राहकों की तादाद काफी कम हो गई है. न तो मास्क मिल रहे हैं और न ही संक्रमण से सुरक्षा का दूसरा कोई उपाय है. इलाके में सन्नाटा है. इस सन्नाटे में भूख की आहट को साफ सुना जा सकता है.

समिति ने इलाके के यौनकर्मियों में कोरोना से बचाव के बारे में एक जागरूकता अभियान भी चला रखा है. सोनागाछी की ज्यादातर यौनकर्मियों के पास वोटर कार्ड है और हर बार चुनावों के मौके पर सभी सियासी पार्टियां उन्हें लुभाने में किसी तरह का कसर नहीं छोड़तीं हैं. उनके वोट निर्णायक होते हैं. सोनागाछी की एक यौनकर्मी बताती हैं कि हमारे लिए फिलहाल पेट की आग को शांत करना बड़ा मसला बन गया है. हालात अगर नहीं सुधरे तो नौबत फाकाकशी तक आ जाएगी.

कोलकाता के वाटगंज इलाके में चलने वाले यौन कर्मियों के बाज़ार में भी हालात अलग नहीं हैं. वहां की एक यौनकर्मी बताती है कि हमारे दिन मुश्किल भरे हैं. पहली बार ऐसे दिन देख रहीं हूं. होली के बाद से ही बाजार में सन्नाटा है. डीएमएसएस के संस्थापक और मुख्य सलाहकार डॉक्टर समरजीत जाना बताते हैं कि हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं. यौनकर्मियां भी डर है. वे अपने ग्राहकों को मना कर दे रही हैं. इससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. डॉक्टर समरजीत जाना कहते हैं कि हालात ऐसे ही रहे तो हम कुछ नहीं कर सकते. इन यौनकर्मियो को जीने के लिए खाना और पैसा चाहिए. अपने लंबे जीवन में कभी इस धंधे में इतने बुरे दिन नहीं देखे हैं. इलाके में देह व्यापार करने वाली कई महिलाएं तो अपने दूर-दराज के रिश्तेदारों के पास चली गई हैं. अगर सरकार ने इन लोगों की मदद नहीं की तो ज्यादातर महिलाएं भूखों मर जाएंगी.

जाना ने इन महिलाओं और उन के बच्चों के लिए भोजन का इंतजाम करने का अनुरोध करते हुए राज्य के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री को पत्र भेजा है. हालांकि सरकार के जवाब का उन्हें इंतजार है. वैसे खाद्य विभाग के अधिकारी ने कहा कि सरकार मौजूदा नियमों के तहत विशेष परिस्थितयों में खाने का इंतजाम तो कर सकती है. लेकिन इसका फैसला सरकार को करना है. राज्य की महिला और शिशु कल्याण मंत्री शशि पांजा कहती हैं कि सरकार सोनागाछी में रहने वाली महिलाओं को भोजन मुहैया कराने पर विचार कर रही है.

दुर्वार समिति का कहना है कि एक तो कोरोना के संक्रमण का खतरा और दूसरे लॉकडाउन की वजह से यहां धंधा पूरी रह पट हो गया है. यौनकर्मियों से लेकर दलालों तक, सबसे सामने भूखों मरने की नौबत पैदा हो गई है. लॉकडाउन की वजह से ग्राहक नहीं आ रहे हैं. मोटरसाइकिलों से आने वाले ग्राहकों को भी पुलिस डंडों से पीट कर भगा दे रही है. कमाई ठप होने की वजह कई यौनकर्मियां अपने घरों के किराए तक नहीं दे पा रही हैं. संगठन ने ऐसे मकान मालिकों से कुछ दिनों तक किराया माफ करने का अनुरोध किया है. अगर जल्दी ही हालत नहीं सुधरे तो सोनागाछी भी इतिहास के पन्नों तक सिमट जाएगा. आखिर कोई कब तक भूखा रह सकता है. यहां धंधा करने वाली कई महिलाओं पर अपना परिवार चलाने और बच्चों को यहां से दूर स्कूलों में पढ़ाने की भी जिम्मेदारी है. कमाई बंद हो गई तो इनका खर्च कैसे चलेगा. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विशलेषण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).




 
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