कोरोना वायरस का संकटः टोक्यो ओलंपिक एक साल के लिए टला

Samachar Jagat | Wednesday, 25 Mar 2020 08:34:25 AM
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कोरोना वायरस के खतरों का असर खेलो पर भी पड़ा है. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन या तो रद्द कर दिए गए हैं या उनकी तारीखों को आगे बढ़ा दिया गया. अब कोरोना वायरस ने खेलों के महाकुंभ ओलंपिक पर भी असर डाला है. कोरोना वायरस की वजह से फिलहाल टोक्यो ओलिंपिक को एक साल के लिए टाल दिया गया. जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक संघ के अध्यक्ष थॉमस बाक के साथ मंगलवार को हुई बातचीत के बाद यह जानकारी दी. अब यह खेल 2021 की गर्मियों में होंगे.



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तारीखें बाद में तय की जाएंगी. यह पहला मौका नहीं है, जब टोक्यो में होने वाले ओलिंपिक को टाला गया. 1940 में इस शहर को पहली बार इन खेलों की मेजबानी मिली थी. लेकिन, चीन से युद्ध की वजह से ओलंपिक खेल रद्द हो गए. ओलिंपिक के 124 साल के इतिहास में ओलिंपिक तीन बार रद्द हुए हैं और पहली बार टले हैं. पहले विश्व युद्ध के चलते बर्लिन (1916), टोक्यो (1940) और लंदन (1944) खेलों को रद्द करना पड़ा था. टोक्यो ओलिंपिक 24 जुलाई से नौ अगस्त के बीच होने थे. 

इससे पहले तीन बार विश्व युद्ध के कारण ओलिंपिक रद्द हो चुके हैं. पहली बार बर्लिन ओलंपिक रद्द हा था, 1916 में ओलिंपिक बर्लिन में होने थे. 27 और 28 जून 1914 को बर्लिन स्टेडियम में टेस्ट इवेंट भी हो गए थे. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के आर्कड्यूक फ्रेंक फर्डिनेंड और उनकी पत्नी की साराजेवो में हत्या कर दी गई थी. इसके बाद प्रथम विश्व युद्ध छिड़ गया और इन खेलों को रद्द कर दिया गया. फिर 2020 से 80 साल पहले भी टोक्यो को इन खेलों की मेजबानी मिली थी. उसने बार्सिलोना, रोम और हेलसिंकी को पीछे छोड़ते हुए पहली बार यह मौका हासिल किया था. लेकिन चीन के साथ युद्ध के कारण उसे मेजबानी से पीछे हटना पड़ा. इसके बाद हेलसिंकी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई.

हालांकि 1939 में दूसरा विश्व युद्ध शुरू होने के कारण खेलों को रद्द करने पड़ा था. आखिरी बार लंदन ओलिंपिक को रद्द करना पड़ा था, 1940 का टोक्यो ओलिंपिक रद्द होने के बाद आईओसी की बैठक में 1944 के ओलिंपिक की मेजबानी लंदन को सौंपी गई थी. अगर सब ठीक रहता है तो लंदन 36 साल बाद दूसरी बार इन खेलों को आयोजित करता. लेकिन मेजबानी मिलने के तीन महीने बाद ही ब्रिटेन ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध का एलान कर दिया. इस वजह से खेल हुए ही नहीं. इसके बाद इटली में यह खेल होने थे. लेकिन इन्हें भी बाद में रद्द कर दिया गया. 

आबे और आईओसी पिछले कुछ महीने से लगातार कह रहे थे कि ओलंपिक खेल तय कार्यक्रम के मुताबिक 24 जुलाई से शुरू होंगे. लेकिन कोविड-19 के बढ़ते खतरे के साथ आईओसी पर इन खेलों को स्थगित करने का दबाव बढ़ने लगा था. कनाडा और ऑस्ट्रेलिया पहले ही ओलिंपिक में हिस्सेदारी से इनकार कर चुके थे. कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने इन खेलों से हटते हुए कहा था कि अगर टोक्यो ओलिंपिक कार्यक्रम के मुताबिक 24 जुलाई से नौ अगस्त के बीच होते हैं तो वे अपने खिलाड़ी जापान नहीं भेजेंगे. कनाडा ने कहा था कि हम ओलंपिक खेलों को एक साल के लिए टालने की मांग करते हैं. अगर ओलंपिक को स्थगित किया जाता है तो हम उनका पूरा समर्थन करेंगे. हमारे लिए खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के अलावा कुछ महत्त्वपूर्ण नहीं है.

अमेरिका के सत्तर फीसदी से ज्यादा खिलाड़ी ओलिंपिक टालने के पक्ष में थे. अमेरिकी खिलाड़ियों में ज्यादातर ओलिंपिक के स्थगित होने के पक्ष में थे. खबरों के मुताबिक 2016 से अब तक आईओसी ने टोक्यो ओलिंपिक 2020 के लिए 5.7 अरब डॉलर (40 हजार 470 करोड़ रुपए) रेवेन्यू जुटाया था. इसका 73 फीसद हिस्सा मीडिया राइट्स से आया. बाकी 27 फीसद प्रायोजकों यानी प्रायोजकों से मिला. अगर खेल रद्द होते हैं तो आईओसी को यह रकम लौटानी होगी. इतना ही नहीं आईओसी दुनिया भर में खिलाड़ियों के लिए स्कॉलरशिप, एजुकेशन प्रोग्राम के साथ ही फेडरेशनों से जो फंड जुटाता है, वह भी उसे लौटानी होगी. लिहाजा, खेल टाले गए हैं. इन्हें रद्द नहीं किया गया. टोक्यो ओलिंपिक 2020 की मेजबानी जापान के पास है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वह तैयारियों पर अब तक 12.6 अरब डॉलर खर्च कर चुका है. कुल अनुमानित खर्च इसका दो गुना यानी करीब 25 अरब डॉलर है. (खेलों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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