उपेंद्र कुशवाहा ने कामगारों व किसानों से जुड़े मुद्दों को उठा कर नीतीश को दिया सुझाव

Samachar Jagat | Wednesday, 20 May 2020 12:30:00 PM
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कोरोना की दहशत दुनिया भर में महामारी का रूप ले चुकी है. देश में लॉकडाउन की मीयाद तीन मई तक बढ़ा दी गई है ताकि महामारी के चेन को तोड़ा जा सके. हालांकि 21 दिनों के लॉकडाउन में इस पर उस हद तक काबू नहीं पाया जा सका, जैसी की उम्मीद थी. जाहिर है कि सरकार लोगों के निशाने पर भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने मंगलवार को लॉकडाउन बढ़ाने का एलान किया और लोगों को सात सुझाव दिए लेकिन यह नहीं बताया कि सरकार उनके लिए क्या-क्या कदम उठा रही है. वैसे यह तय है कि इस संकट की घड़ी में सब साथ हैं और लोग महामारी से मिल लड़ रहे हैं. लॉकडाउन बढ़ाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक भी की थी. बैठक से पहले ही कई राज्यों ने 30 अप्रील तक लॉकडाउन बढ़ाने का एलान कर डाला था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश से पहले राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ट्वीट के जरिए कुछ सुझाव दिए. उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी करदाता या जिनके अकाउंट में पैसा है, को छोड़ कर शेष सभों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से एक न्यूनतम निर्धारित राशि जमा की जाए. कुशवाहा ने कहा कि सभी वार्ड (ग्रामपंचायत) में वार्ड सदस्य की देख-रेख में जनवितरण प्रणाली का अस्थायी केंद्र बनाया जाए. शहरों के लिए भी कुछ ऐसी व्यवस्था की जाए. ऐसे सभी केंद्रों पर बिना मांग देखे पर्याप्त राशन उपलब्ध करवाया जाए. हर परिवार को उनके आधार कार्ड या वोटर आईडी कार्ड के आधार पर मुफ्त राशन दिया जाए.

कुशवाहा ने बाहर में फंसे बिहारवासियों को फूल प्रूफ व्यवस्था के साथ यानी सोशल डिस्टेनसिंग का पूरा ध्यान रखते हुए स्पेशल ट्रेन या बसों से वापस लाने की व्यवस्था करने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि घर लाने के बाद उन्हें हर जिला में बनाए गए स्कूल या कालेज के भवन में, जहां जांच और वायरस के फैलाव से सुरक्षा की पूरी व्यवस्था हो, रखा जाए. फिर पूर्ण रूप से आश्वस्त होने के बाद ही उन्हें उनके घरों में जाने दिया जाए. कुशवाहा ने मुख्यमंत्री से कहा कि फ़िलहाल उपर्युक्त व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए ही लॉकडाउन की अवधि बढ़ाई जाए. हालांकि जदयू नेताओं को पता नहीं कहां से इसमें सियासत नजर आ गई. दरअसल सत्ता के हनक मे जदयू नेताओं को कुछ सूझ नहीं रहा है. सरकार स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी नाकाम है और लोगों को जरूरी सुविधाएं पहुंचाने में भी नाकाम है इसलिए अपनी नाकामी को छुपाने के लिए कुशवाहा के सुझाव को सियासत बता डाला. जबकि उन्होंने राज्य के कामगारों और गरीबों के लिए आवाज उठाई थी.

यूं भी कुशवाहा लगातार कोरोना संकट में ट्वीट के माध्यम से लोंगो की मदद कर रहे है. उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री से कहा था कि सरकार गरीबों की परेशानी कम करने को लेकर पांच काम करने की बात कही थी. अब कुशवाहा ने ट्वीट करके बिहार के मुख्यमंत्री को किसानों की समस्या से रूबरू कराया और कहा कि गेंहूं की कटाई के लिए हार्वेस्टिंग मशीन को ऑपरेटर के साथ पंजाब व दूसरे राज्यों से आने की अनुमति तो आपने दे दी लेकिन अब उन्हें काम से मना करना किसानों के साथ अन्याय है. उन्होंने नीतीश कुमार से आग्रह किया कि ड्राइवर व मशीन से जुड़े दूसरे लोगों की समुचित जांच करवा कर अविलंब उन्हें काम करने की इजाजत दी जाए ताकि किसान खेतों में तैयार गेंहूं की फसल की कटाई कर अन्न घर ला सकें. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विशलेषण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).




 
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