अखिलेश यादव का अमित शाह पर तंज, दिल्ली दंगों के लिए ठहराया भाजपा को जिम्मेदार

Samachar Jagat | Sunday, 15 Mar 2020 09:14:09 PM
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दिल्ली दंगे की आग तो ठंडी हो गई है, लेकिन लोग अभी भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. दंगों पर सियासत जारी है. चेहरे से वैज्ञानिक तरीके से मुजरिमों को पहचानने का दावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तो करते हैं. लेकिन कई सवाल भी छोड़ जाते हैं. पुलिस की पीठ थपथपाते हैं लेकिन यह नहीं बताते के तेरह हजार से ज्यादा फोन दंगों के दौरान पुलिस को किए गए लेकिन पुलिस ने समय रहते कार्रवाई नहीं की. पुलिस की शिकायत तो अकाली दल सांसद नरेश गुजराल ने भी की. उन्होंने भी पुलिस को दंगों में फंसे लोगों को बचाने के लिए फोन किया था लेकिन पुलिस ने उनके फोन पर भी तवज्जो नहीं दी. लेकिन अमित शाह दावा कर रहे हैं कि 36 घंटे में दंगों पर काबू पा लिया गया. देश की राजधानी में 36 घंटों तक दंगे होते रहे और गृह मंत्री इसका श्रेय ले रहे हैं यह तो हैरत में डालने वाली बात है. हालांकि सच यह भी है कि दंगे 72 घंटे तक जारी रहे. अमित शाह के इस बयान पर उनकी नीयत पर सवाल खड़े हो रहे हैं. दिल्ली के दंगों में पचास से ज्यादा लोग मारे गए हैं.



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दिल्ली दंगो को लेकर संसद में बहस के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने दंगाइयों के यूपी कनेक्शन का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में दंगाई यूपी से आए थे जिस कारण दिल्ली में बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ था. हालांकि जिन तीन सौ लोगों के आने की बात अमित शाह ने बताई, उसका आधार क्या है और पुलिस ने उन्हें क्यों नहीं रोका, इसे लेकर सवाल हैं. अमित शाह के दावे पर विपक्ष हमलावर है. यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गृहमंत्री पर उत्तर प्रदेश को बदनाम करने का आरोप लगाया है. अखिलेश यादव ने दिल्लीं दंगो के लिए सीधे-सीधे भाजपा को दोषी ठहराया और कहा कि भाजपा दंगों को रोकने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है.

अखिलेश कहते हैं कि गृहमंत्री के पास पूरा ख़ुफ़िया तंत्र है उसके बाद भी अगर दंगे होते हैं तो यह सरकार और ख़ुफ़िया तंत्र पर सवाल खड़े करता है अगर सवाल उत्तर प्रदेश से लोगो के आने का है तो गृहमंत्री को पता होना चाहिए. यहां पर भाजपा की ही सरकार है. क्यों भाजपा की सरकार यहां से जाने वाले लोगों को नहीं रोक पाई. कहां गया योगी का ख़ुफ़िया तंत्र. दिल्ली दंगों को लेकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप के इस दौर में कोई भी अभी तक दंगाइयों के सरदार को नहीं पकड़ पाया है. आज भी दिल्ली दंगो के मास्टरमाइंड पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी अभी तक कपिल मिश्रा व अन्य भाजपा नेताओ पर एफआईआर नहीं हुई है.

इससे पहले अखिलेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया छोड़ने के विचार पर भी तंज कसा था. राहुल गांधी ने तंज कसते हुए प्रधानमंत्री को सोशल मीडिया की जगह नफरत छोड़ने की सलाह दी थी तो यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी ट्वीट कर तंज कसते हुए सोशल मीडिया के साथ-साथ मोदी को कुछ और चीजें भी छोड़ने की सलाह दी थी. सपा अध्यक्ष ने ट्वीट किया था कि सामाजिक संवाद के रास्ते बंद करने की सोचना अच्छी नहीं है बात. छोड़ने के लिए और भी बहुत कुछ सार्थक है साहब. जैसे सत्ता का मोह-लगाव, विद्वेष की राजनीति का ख़्याल, मन-मर्ज़ी की बात, चुनिंदा मीडिया से करवाना मनचाहे सवाल और विश्व विहार. कृपया इन विचारणीय बिंदुओं पर भी करें विचार! (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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