ई-वाहनों को लेकर की गई घोषणाओं का उद्योग ने किया स्वागत

Samachar Jagat | Saturday, 06 Jul 2019 11:05:48 AM
Industry welcomes announcements regarding e-vehicles

नई दिल्ली। भारत को ई-वाहनों के विनिर्माण का हब बनाने एवं बैट्री चालित वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए बजट में किए गए प्रस्तावों का उद्योग ने स्वागत किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश वित्त वर्ष 2019-20 के केंद्रीय बजट में ई-वाहन उद्योग से जुड़े प्रस्तावों पर सोसायटी ऑफ मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हिक्ल्स (एसएमईवी) के महानिदेशक सोहिदर गिल ने कहा कि बैट्री चालत वाहनों के लिए प्रस्तावित कदम उपभोक्ताओं एवं विनिर्माताओं दोनों के लिए लाभदायक हैं।

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उन्होंने बयान जारी कर कहा कि भारत को ई-वाहन विनिर्माण हब बनाना, धारा 35 ए डी (1) (पूंजीगत निवेश से जुड़ी कर छूट) के लाभ का विस्तार करते हुए ई-वाहन निर्माण को प्रोत्साहित करना सही दिशा में उठाये गए कदम हैं। इससे स्थानीय विनिर्माण आधार तैयार करने में मदद मिलेगी और कल-पुर्जा बनाने वाली कंपनियों को इस क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि ई-वाहन की खरीद पर आयकर में डेढ़ लाख रुपये तक की छूट से भी ग्राहकों की खरीद धारणा को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।बैट्री से चलने वाली बस बनाने वाली ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक के कार्यकारी निदेशक नागा सत्यम ने कहा कि बजट में किए गए प्रस्ताव उद्योग की उम्मीदों से भी आगे बढक़र है। ई-वाहन उद्योग के बारे में सरकार के इरादों को लेकर निवेशकों के दिमाग में कुछ संशय थे लेकिन चालू वित्त वर्ष के बजट में की गई घोषणाओं से वे सारे संदेह जरूर समाप्त हो गए होंगे।

उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री ने कहा कि फ़ेम योजना के दूसरे चरण में आधुनिक बैट्री और पंजीकृत ई-वाहन की खरीद के लिए छूट दी जाएगी। फेम योजना का दूसरा चरण 1 अप्रैल, 2019 से प्रारंभ हो गया है। इस योजना के तहत तीन वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने को प्रोत्साहन देना है।

इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद और  इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की अवसंरचना स्थापित करने के लिए रियायत दी जाएगी। इस योजना के तहत केवल आधुनिक बैट्रियों और पंजीकृत ई-वाहनों को ही रियायत दी जाएगी। इस योजना का लक्ष्य लोगों को किफायती और पर्यावरण अनुकूल सार्वजानिक परिवहन का विकल्प प्रदान करना है।

फेम योजना में सोलर स्टोरेज बैट्री और चार्जिंग अवसंरचना को शामिल करने से विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इन वाहनों के विनिर्माण से भारत इलेक्ट्रिक वाहनों के हब के रूप में विकसित होगा।वित्त मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगने वाले जीएसटी की दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया दिया है।

इन वाहनों को किफायती बनाने के लिए सरकार, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए कर्ज पर 1.5 लाख रुपये तक के ब्याज के लिए कर में कटौती का लाभ देगी। करदाताओं को इलेक्ट्रिक वाहन की खरीद पर लगभग 2.5 लाख रुपए तक का फायदा हो सकता है। 



 

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