अब इस नई तकनीक से लगेगा कैंसर के प्रसार का पता

Samachar Jagat | Sunday, 08 Jul 2018 12:59:26 PM
Now this new technology will detect the spread of cancer

वॉशिंगटन। कैंसर जैसी घातक बीमारी की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं। हालहि में वैज्ञानिकों ने एक नई विधि विकसित की है जो शरीर के एक अंग से दूसरे अंग में कैंसर कोशिकाओं के प्रसार का पता लगाने की क्षमता को बढ़ा सकती है। कैंसर कोशिकाओं के दूसरे अंगों तक पहुंचने से रोग शरीर में फैल जाता है और 90 फीसदी मामलों में कैंसर के कारण मौत हो जाती है। यह ट्यूमर स्तन , प्रोस्टेट तथा मलाशय जैसे अंगों में बन जाते हैं। कैंसर के प्रसार के वाहक का पता लगाने से नए उपचार विकसित किए जा सकते हैं जिससे शरीर में कैंसर फैलने की प्रक्रिया को रोका जा सके। यह शोध नेचर जेनेटिक्स में प्राकशित हुआ है।

वैज्ञानिकों ने इस विधि को माकिना  (एमएसीएचआईएनए ) नाम दिया है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले शोधकर्ताओं ने एक नई श्रेणी की दवा की खोज की जो उन कैंसर मरीजों के इलाज में कारगर साबित हो सकती है जिनमें वर्तमान उपचारों को लेकर प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न हो गई है। यह दवा अभी कुछ वर्षों तक मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं हो सकेगी लेकिन ब्रिटेन में इम्पीरियल कॉलेज, लंदन के शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि इसके क्लीनिकल ट्रायल सफल रहते हैं तो इसका इस्तेमाल विभिन्न उपचार - रोधी कैंसरों से निबटने में किया जा सकता है। 

जर्नल मॉलीक्यूलर कैंसर थैराप्यूटिक्स में प्रकाशित शोध के परिणामों के मुताबिक प्रतिरोध स्तन कैंसर के उपचार में आईसीईसी 0942 के प्रयोगशाला के शुरूआती परीक्षण सफल रहे हैं और इसके दुष्प्रभाव भी न्यूनतम होंगे। केरिक थेराप्यूटिक्स ने आईसीईसी 0942 को सीटी 7001 नाम से विकसित किया और दो वर्ष से भी कम समय में शुरुआती स्तर का क्लीनिकल ट्रायल किया। यह दवा सीडीके 7 नाम के एन्जाइम पर हमला करती है। आईसीईसी 0942 कैंसर के फैलने की क्षमता को रोक देती है।

( इस खबर में कुछ अंश एजेंसी से लिया गया है। )



 

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