ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की, भारत ने किया खारिज

Samachar Jagat | Tuesday, 23 Jul 2019 07:47:07 AM
Trump offered mediation between India and Pakistan on Kashmir issue, India rejected

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच ‘‘मध्यस्थता’’ की सोमवार को पेशकश की। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने व्हाइट हाउस में ट्रंप से पहली बार मुलाकात की जहाँ दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की।

भारत सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उस चौंकाने वाले दावे से इनकार किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें कश्मीर पर मध्यस्थता करने के लिए कहा था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया, ‘‘हमने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा प्रेस को दिये उस बयान को देखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि भारत और पाकिस्तान अनुरोध करते हैं तो वह कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से इस तरह का कोई अनुरोध नहीं किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत का लगातार यही रुख रहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मुद्दों पर केवल द्विपक्षीय चर्चा होगी। पाकिस्तान के साथ किसी भी बातचीत के लिए सीमापार आतंकवाद पर रोक जरूरी होगी। भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों के समाधान के लिए शिमला समझौता और लाहौर घोषणापत्र का अनुपालन आधार होगा।’’

ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने को कहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि मोदी और उन्होंने पिछले महीने जापान के ओसाका में जी-20 शिखर सम्मेलन के इतर कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की थी जहाँ भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की पेशकश की थी।

ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं दो सप्ताह पहले प्रधानमंत्री मोदी के साथ था और हमने इस विषय (कश्मीर) पर बात की थी। और उन्होंने वास्तव में कहा, ‘क्या आप मध्यस्थता या मध्यस्थ बनना चाहेंगे?’ मैंने कहा, ‘कहाँ?’ (मोदी ने कहा) ‘‘कश्मीर।’’ उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि यह कई वर्षों से चल रहा है। मुझे आश्चर्य है कि यह कितने लंबे समय से चल रहा है।’’

ट्रंप ने कहा कि यदि दोनों देश कहेंगे तो वह मदद के लिए तैयार हैं।  ट्रंप ने ओवल ऑफिस में प्रधानमंत्री खान के साथ अपनी बैठक के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘यदि मैं मदद कर सकता हूं, तो मैं एक मध्यस्थ होना पसंद करूंगा। अगर मैं मदद करने के लिए कुछ भी कर सकता हूं, तो मुझे बताएं।’’

ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि वे (भारतीय) इसे हल होते हुए देखना चाहेंगे। मुझे लगता है कि आप (खान) इसे हल होते हुए देखना चाहेंगे। और अगर मैं मदद कर सकता हूं, तो मैं एक मध्यस्थ बनना पसंद करूंगा। यह होना चाहिए.... हमारे पास दो अविश्वसनीय देश हैं जो होशियार नेतृत्व के साथ बहुत होशियार हैं, (और वे) इस तरह की समस्या का समाधान नहीं कर सकते हैं। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि मैं मध्यस्थता करूं, तो मैं ऐसा करने को तैयार हूं।’’

अमेरिकी राष्ट्रपति ने खान से कहा, ‘‘भारत के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं। मैं जानता हूं कि आपका रिश्ता (भारत के साथ) थोड़ा तनावपूर्ण है, शायद बहुत कुछ। लेकिन हम भारत के बारे में बात करेंगे... (यह) आज हमारी बातचीत का एक बड़ा हिस्सा है और मुझे लगता है कि शायद हम मध्यस्थता करने में मदद कर सकते हैं और हमें जो करना है वह कर सकते हैं। हम भारत और अफगानिस्तान दोनों के बारे में बात करेंगे।’’

व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में ट्रंप के साथ बैठे खान ने कहा कि वह तैयार हैं और उन्होंने अमेरिका के इस तरह के कदम का स्वागत किया। उन्होंने ट्रंप से कहा, ‘‘यदि आप (कश्मीर पर) मध्यस्थता कर सकते हैं तो एक अरब से अधिक लोगों की प्रार्थना आपके साथ है।’’

भारत का कहना है कि कश्मीर मुद्दा एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। बलूचिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप संबंधी पाकिस्तानी आरोपों को लेकर पूछे गये एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, ‘‘मेरे प्रधानमंत्री मोदी के साथ अच्छे संबंध हैं। मुझे लगता है कि हम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ अभूतपूर्व संबंध बनाने जा रहे हैं।’’

भारत जनवरी 2016 में पठानकोट में भारतीय वायुसेना के अड्डे पर पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा हमले के बाद से पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत नहीं कर रहा है। भारत का कहना है कि आतंकवाद और वार्ता साथ साथ नहीं चल सकते।

खान के साथ पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद और विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी सहित अन्य व्यक्ति थे।

इस वर्ष के शुरू में कश्मीर के पुलवामा में पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक आत्मघाती हमलावर द्वारा किये गए विस्फोट में सीआरपीएफ के 40 जवानों के शहीद होने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया।

बढ़ते आक्रोश के बीच भारतीय वायुसेना ने एक आतंकवाद निरोधक अभियान चलाते हुए 26 फरवरी को पाकिस्तान के भीतर बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया था। -(एजेंसी)



 

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