शिवसेना ने की सरकार से अपील, कहा-जेट एयरवेज का संचालन अपने हाथ में लें

Samachar Jagat | Monday, 22 Apr 2019 12:23:50 PM
Shiv Sena appeals to the government

मुंबई। शिवसेना ने सोमवार को राजग सरकार से अस्थायी तौर पर अपनी विमान सेवाएं बंद करने वाली जेट एयरवेज का संचालन अपने हाथ में लेने और उसके कर्मचारियों की नौकरियां जाने से बचाने की अपील की।
उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बीमा और एयरलाइन कंपनियों के राष्ट्रीयकरण में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी की दूरदर्शिता से सीखने के लिए कहा।

25 साल पुरानी एयरलाइन के अस्थायी रूप से बंद होने के असर के बारे में शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र सामना में एक संपादकीय में कहा कि बेरोजगारों का दिया शाप किसी साध्वी के शाप से ज्यादा शक्तिशाली होगा। शिवसेना ने कहा कि ऐसी घटनाओं से देश में बीमा और एयरलाइन कंपनियों के राष्ट्रीयकरण पर पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी की दूरदृष्टि अब समझ में आती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जेट एयरवेज के मामले में ऐसी ही दूरदृष्टि दिखाने की जरुरत है। केंद्र और महाराष्ट्र में भाजपा के सहयोगी दल उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने कहा कि सरकार से हमारी मांग है कि वह जेट एयरवेज का संचालन अपने हाथ में ले और उसके कर्मचारियों को बेरोजगार होने से बचाए। शिवसेना ने कहा कि उसने एयरलाइन के कर्मचारियों के मुद्दे सरकार के समक्ष उठाए हैं।

उसने कहा कि बेरोजगार हो गए कर्मचारियों का शाप किसी साध्वी के शाप से अधिक शक्तिशाली है। सरकार ऐसी स्थिति से बच सकती है। संपादकीय में कहा गया है कि निवेशकों ने जेट एयरवेज के चेयरमैन और संस्थापक नरेश गोयल को हटाने की मांग की थी और भारतीय स्टेट बैंक को एयरलाइन को 400 करोड़ रुपये की मदद देनी थी।

लेकिन एयरलाइन से गोयल के हटने के बावजूद उसने कर्मचारियों को 500 रुपए तक भी नहीं दिए। शिवसेना ने हैरानी जताई कि क्या एयरलाइन की बदहाली के लिए पर्दे के पीछे कोरपोरेट ताकत काम कर रही है। उसने कहा कि भारतीय कारोबार को तोड़ना और विदेशी निवेशकों के लिए रेड कार्पेट बिछाना देश की नीति नहीं हो सकती।

एयर इंडिया के सरकारी कंपनी बनने के बाद सरकार द्बारा उसे 29,000 करोड़ रुपए की वित्तीय मदद मुहैया कराने का उदाहरण देते हुए शिवसेना ने कहा कि जेट एयरवेज और किगफिशर भी विदेशी कंपनियां नहीं हैं। उसने जेट एयरवेज के संकट में बंबई उच्च न्यायालय द्बारा हस्तक्षेप से इनकार करने पर भी हैरानी जताई। उच्च न्यायालय ने गत बृहस्पतिवार को कहा था कि वह सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को बीमार कंपनी को बचाने का निर्देश नहीं दे सकता।



 

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