गुस्सा आता नहीं है, किया जाता है

Samachar Jagat | Friday, 14 Jun 2019 03:24:42 PM
Anger does not come, it is done

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सुख-शांति, संबंधों और स्वास्थ्य को खाने वाले, बर्बाद करने वाले कारकों में सबसे बड़ा और खतरनाक कारक है-गुस्सा। इस गुस्से ने जितने व्यक्तियों की बली ली है, जितने संबंधों को तोड़ा है, जितने घर बर्बाद किए हैं और जितनी दुश्मनी बढ़ाई है उतनी दुनिया में किसी और ने नहीं। यदि इस पर गंभीरता से सोचा जाए, मंथन-चिंतन किया जाए तो एक ही सार निकल कर आता है कि गुस्सा आता नहीं बल्कि किया जाता है। गुस्सा करने के पीछे बहुत सारे कारण हैं जिसमें गुस्सा करने वाला जिस पर गुस्सा किया जाता है, उसकी बहुत सारी कमजोरियां ढूंढ़ लेता है, और कमजोरियां ढूंढ़ने का कारण यह होता है कि वह उसे अपने से पद में, उम्र में, ताकत में, संबंधों में कर्म के हिसाब से कहीं न कहीं कमतर आंकता है। 

इन्हीं सब कारणों से जब पहली बार किसी पर गुस्सा किया जाता है तो वह स्वयं को ऐसा मान लेता है। एक बार मान लेना, मतलब हमेशा के लिए मान लेना है। छोटी से छोटी सिचवेशन पर एक सैकिण्ड में गुस्से वाली स्थिति उत्पन्न हो जाएगी, जब वे आपस में आमने-सामने होंगे।

मान लीजिए किसी को बार-बार कहा जाने लगे कि तुझे बहुत गुस्सा आता है, तू बहुत गुस्सा करता है, तू तो पूरे गुस्से से भरा हुआ है और जब इसे बार-बार कहा जाता है तो फिर उसे वह सही मान बैठता है, उसका अवचेतन मन यह स्वीकार कर चुका होता है कि हां मैं गुस्सा करता हूं। बच्चे में कहां से गुस्सा आएगा, उसे गुस्सा दिलाया जाता है। गुस्सा आता नहीं है किया जाता है इसके एक-दो उदाहरण देखिए। 

एक कोई बदमाश व्यक्ति है, भारी भरकम शरीर वाला है, गंदे कारनामे हैं यदि उसके सामने कोई साधारण व्यक्ति आ भी जाए तो वह उस पर जबरदस्त गुस्सा उतारेगा, लेकिन साधारण दुबला-पतला व्यक्ति एक भी शब्द नहीं बोलेगा, यहां तक कि वह उससे मार भी खा लेगा। 

अब दूसरी सिचवेशन देखिए कि वही साधारण व्यक्ति जब घर जाएगा तो ना कुछ बात पर अपने बच्चों पर अपने घर वालों पर खूब गुस्सा करेगा, उसे गुस्सा आएगा नहीं बल्कि वह अपनी मर्जी से गुस्सा करेगा। गुस्सा करने वाले को यह अच्छे से पता होता है कि यहां गुस्सा करना है, यहां गुस्सा नहीं करना है, यहां गुस्सा करने से नुकसान होगा और यहां गुस्सा करने से कुछ भी नुकसान नहीं होगा। 

फिर ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि उसको गुस्सा आता है, वह गुस्सैल है, ऐसा बिल्कुल नहीं होता है, गुस्सा तो किया जाता है। गुस्सा तो जलता हुआ अंगारा है अगर किसी की तरफ अंगारा फेंका जाएगा तो पहले फेंकने वाले का ही हाथ जलेगा।

प्रेरणा बिन्दु:- 
लोग बहुत हैं दुनिया में
जो हंसते-हंसते जी रहे हैं
खौफनाक चेहरों वाले तो
खून अमन का पी रहे हैं।



 

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