करेंसी नोटों से अठहतर प्रकार की बीमारियां

Samachar Jagat | Saturday, 08 Sep 2018 03:43:22 PM
Eight types of diseases from currency notes

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व्यापारियों के संगठन कैट यानी कनफंडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टे्रडर्स ने मुद्रा नोटों से स्वास्थ्य संबंधी खतरा पैदा होने वाली खबरों का हवाला देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली को चिट्ठी लिखकर उनसे इस बारे में जांच कराने का आग्रह किया है। संगठन ने लोगों को करेंसी नोट के जरिए होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए कारगर उपाय करने की भी अपील की है। कैट ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से भी मामले पर तुरंत संज्ञान लेने का आग्रह किया है। संगठन ने विभिन्न अध्ययनों के निष्कर्ष का हवाला देते हुए दावा किया है कि नोटों में बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो बीमारियां फैलाते हैं। इनसे पेट खराब होना टीबी और अल्सर जैसी अन्य बीमारियों का खतरा होता है। 

कैट के महासचिव ने कहा है कि हर साल इस तरह की रिपोर्ट विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित होती है। लेकिन दु:ख की बात है कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि देश में व्यापारी वर्ग मुद्रा नोट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता है, क्योंकि अंतिम उपभोक्ता से उसका सीधा संपर्क होता है। 
यदि यह शोध रिपोर्ट सत्य है तो व्यापारियों के स्वास्थ्य के लिए घातक है। यही नहीं यह उपभोक्ताओं को भी प्रभावित करेगा। कैट के महासचिव का यह कथन सही है कि व्यापारी समुदाय मुद्रा नोटों का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है।

 लेकिन अगर नोटों में जीवाणु संबंधी रिपोर्ट सही है तो यह सामान्य उपभोक्ताओं की सेहत के लिए भी बराबर का जोखिम पैदा करेगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले आई काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) की एक रिपोर्ट के मुताबिक लोगों की जेब में रखे मुद्रा नोटों की वजह से 78 प्रकार की बीमारियां होने का खतरा है। आमतौर पर हर साल विज्ञान पत्रिकाओं में संक्रमणशील लागों, उनके कारणों और बचाव के इंतजामों पर केंद्रित अध्ययन या रिपोर्ट प्रकाशित होती रहती है। 

लेकिन शायद ही इन रिपोर्टों और उनमें दर्ज चेतावनियों की गंभीरता से लिया जाता है। देशभर में रोजाना किसी न किसी रूप में मुद्रा नोटों के संपर्क में आने वाले लोग शायद ही कभी सोचते हैं कि उनके हाथ में जो नोट है, उनमें किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ से आए बैक्टीरिया हो सकते हैं। जागरूकता के अभाव की इसी स्थिति की वजह से बहुत सारे लोग किसी संक्रमणशील बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। नोटों की गिनती करते समय कुछ लोग जीभी से थूक लेकर अंगुलियों से गिनती करते हैं। बीमारी से पीडि़त व्यक्ति डॉक्टरों को फीस देते हैं, जिससे डॉक्टरों को भी संक्रमित कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए व्यापक पैमाने पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है। नोटों को गिनने या रखने के बारे में सावचेत करना जरूरी है।
 

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