आधुनिक भारत के शिल्पकार राजीव गांधी

Samachar Jagat | Monday, 20 Aug 2018 10:56:43 AM
Rajiv Gandhi, the architect of modern India

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न राजीव गांधी की  देश बीस अगस्त को उनकी 74 वीं जयंती मना रहा है। 20 अगस्त,1944 को आज से 74 साल पहले भारत भूमि पर   जन्म लेने वाले राजीव गांधी जी को  क्या पता होगा कि एक दिन उनके पास देश की बागडोर संभालने की जिम्मेदारी आएगी और वह भी इस तरह कि उनकी माँ की हत्या होने के बाद कांटों भरा ताज हासिल होगा। 31 अक्टूबर 1984 का वह काला दिन जिस दिन इंदिरा गांधी जी की हत्या अपने ही अंगरक्षकों द्वारा कर दी गई, किसी ने ऐसी अनहोनी की कल्पना भी न  की होगी।

सारा राष्ट्र अलगाववादी मंसूबों  से परेशानी में था। साम्प्रदायिक भहसा भडक़ जाना और माँ की हत्या के बाद देश की बागडोर संभालना राजीव गांधी जी के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। मगर होनी को कौन टाल सकता है। उन्हें सत्ता की बागड़ोर संभालनी पड़ी।
राजीव गांधी  को क्या पता था कि उन्हें राजनीति में ये दिन देखने पड़ेंगे?

पायलट की नौकरी से राजनीति में प्रवेश होगा। मगर उन्होंने संजय गांधी की मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी की बात को माना और वे राजनीति  में आये। मगर जिस हाल में उन्हें बागडोर संभालनी पड़ी, कभी सोचा न होगा। खैर, विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने प्रधानमंत्री का  पद संभाला और देश को अच्छा शासन देने की सोच रखी।

राजीव गांधी ने देश के कई क्षेत्रों में पहल की और शुरुआत की जिनमें संचार क्रांति, और कम्प्यूटर क्रांति, शिक्षा का प्रसार, अठारह साल के युवाओं को मताधिकार, पंचायती राज आदि शामिल है। राजीव गांधी ने कई साहसिक कदम उठाये, जिनमें श्रीलंका में शांति सेना का भेजा जाना, असम समझौता, पंजाब समझौता, मिजोरम समझौता आदि  शामिल हैं।

अलगाववादी आंदोलन दिसंबर 1984 के आम चुनाव में उन्होंने पार्टी की जबरदस्त जीत का नेतृत्व किया और उनके प्रशासन ने सरकारी नौकरशाही में सुधार लाने तथा देश की अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के लिए जोरदार कदम उठाए। इंदिराजी की मृत्यु के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी बहुमत मिला।

राजीव गांधी के नेतृत्व में भारत के लोकतंत्र में इतिहास बना। लोकतंत्र  में इतिहास में कांग्रेस  ने 542 लोकसभा सीटों में से 411 सीटों (चार सौ ग्यारह सीट जीत) पर विजय हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाया। वह शायद ही कभी टूट पाएगा संभावना कम नजर आती है।

राजीव गांधी ने गद्दी संभालने के समय उन्हें आतंकवाद से जलता-झुलसता भारत मिला था। मगर उन्होंने देश को अच्छा शासन देने का ध्येय रख प्रगति के पथ पर बढ़ाया। उनकी साफ छबि, मिलनसार व्यवहार, विपक्ष व उनके नेताओं से मधुर संबंध देश को आगे बढ़ाने में मददगार बनते रहे। इक्कीसवीं सदी  में नये भारत की परिकल्पना राजीव गांधी के जेहन में थी।

कंप्यूटर क्रांति के जनक राजीव गांधी  ही थे, जिसकी वजह से आज  करोड़ों देशवासियों व युवापीढ़ी को रोजगार के अवसर मुहैया हो रहे हैं। देश के हर  नागरिक के हाथ में मोबाइल है। कंप्यूटर, मोबाइल व  संचार  क्रांति  के जनक राजीव गांधी जी का यह सपना था कि इक्कीसवीं सदी में हर हाथ को काम मिले, युवापीढ़ी को रोजगार और किसानों के जीवन स्तर  में सुधार  हो। इन सब मुद्दों पर उन्होंने अपने शासन काल में पहली प्राथमिकता में रखा।
 राजीव गांधी ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिनका मन, दिल साफ था। विपक्ष का आदर करते थे। उनके प्रधानमंत्री रहते अटल बिहारी वाजपेयी किडनी की बीमारी से ग्रसित  थे, मगर इलाज के  लिए अमेरिका जाना अटल जी को संभव नहीं लग रहा। राजीव गांधी जी ने अटल जी को कार्यलय बुलाया और उन्हें संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ न्यूयार्क भेजने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने माना और अपना इलाज कराया। इस बात को राजीव जी की मृत्यु पर अटल जी ने एक पत्रकार से साझा कर  कहा  कि  मैं आज जिन्दा हूँ, तो राजीव गांधी जी  की वजह से  जिन्होंने मुझे इलाज के लिए विपक्ष में होते हुए प्रतिनिधि मंडल में भेजा और मेरा इलाज वहाँ हो सका।

खैर, इस बात का उल्लेख इसलिए किया कि राजीव गांधी का विपक्ष के   नेताओं से अच्छे संबंध रहे। आज  के राजनीतिक दौर में ऐसा कम देखने को मिलता है। निश्चित रूप से राजीव  गांधी  का व्यक्तित्व  काबिले तारीफ था। देशप्रेम व देशहितों को वे हमेशा वरीयता देते  रहे। उनका हँसमुख स्वभाव व सबको साथ लेकर चलने का उनका संकल्प देश को आगे बढ़ाने में मददगार बना।

उन्हें आधुनिक भारत का शिल्पकार  माना जाता है। आज उनकी जयंती पर सारा देश उन्हें याद कर रहा है। उनके प्रधानमंत्रित्व काल को याद कर रहा है। उनकी कार्यप्रणाली की सराहना कर रहा है। उन्हें नमन कर रहा है। उनकी जयंती पर मेरी ओर से श्रद्धांजलि।

आज के दिन कांग्रेस व देश के शासकों को यह संकल्प लेना होगा कि राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए आतंकवाद, नक्सलवाद, भ्रष्टाचार, कालाबाजारी, बढ़ते अपराध, बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं से निपटने, मॉब लीनचिंग की घटनाओं की रोकथाम के कड़े कदम उठाने, किसानों की आत्महत्या रोकने, नारियों की सुरक्षा, घुसपैठ रोकने व विदेश नीति मजबूत व सक्षम बनाने, देश के लोगों को समय पर न्याय दिलाने की जैसी चुनौतियों से  निपटने का संकल्प लें व राष्ट्रीय हितों पर  सभी को सर्वानुमति बना कर देश के विकास को गति देने की सोच विकसित करें। यही राजीव  गांधी के लिए सच्ची श्रद्धांजलि  होगी और  तभी देश 21 वीं सदी में राजीव गांधी के सपनों का भारत बन पाएगा।
(ये लेखक के निजी विचार है)



 

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