सस्ते कर्ज से मिलेगी अर्थव्यवस्था को रफ्तार

Samachar Jagat | Monday, 10 Jun 2019 03:04:20 PM
The economy will get cheap loans

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने पहला बड़ा तोहफा दिया है। आरबीआई की ओर से एक बार फिर रेपो रेट में कटौती की गई है। आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा बैठक में 0.25 फीसदी की कटौती हुई है। इसी के साथ अब नई रेपो रेट 5.75 फीसदी हो गई है। नीतिगत दरों में कटौती किए जाने के कारण सस्ते कर्ज से अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में यह पहली मौद्रिक समीक्षा है। इससे पहले पिछली दो बैठकों में भी नीतिगत दरों में चौथाई फीसदी की कटौती की जा चुकी है। आरबीआई की ओर से पिछली दो कटौती का लाभ बैंकों ने पूरी तरह से उपभोक्ताओं को नहीं दिया था। रेपो रेट घटाने के बाद कुछ ही बैंकों ने इसका लाभ लोगों को दिया था। इसके बाद आरबीआई ने बैंकों से कटौती का फायदा पहुंचाने के लिए कहा था। माना जा रहा है कि इस बार आरबीआई बैंकों से पूरी कटौती देने को कह सकता है।


बैंकों पर भी अपना कारोबार बढ़ाने का दबाव है क्योंकि पिछले दिनों में कर्ज लेने की रफ्तार घटी है। इस बार कटौती का होम-कार या दूसरे तरह के कर्ज लेने वालों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। आरबीआई के इतिहास में पहली बार है, जब आरबीआई गवर्नर की नियुक्ति के बाद लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कमी आई है। यहां यह उल्लेखनीय है कि बीते दिसंबर महीने में उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद शक्तिकांत दास बतौर गवर्नर नियुक्त हुए थे। आरबीआई रेपो रेट में कमी का फायदा लोगों को मिलेगा। दरअसल, आरबीआई के इस फैसले के बाद बैंकों पर ब्याज दर कम करने का दबाव बनेगा। जिनकी होम या ऑटो लोन की ईएमआई चल रही है, उन्हें घटी किश्त देनी होगी। 

रिजर्व बैंक के मुताबिक जीडीपी ग्रोथ रेट 7 फीसदी रहने का अनुमान है। इससे पहले आरबीआई ने जीडीपी ग्रोथ को 7.2 फीसदी का अनुमान लगाया था। वहीं केंद्रीय बैंक ने 2019-20 की पहली छमाही में महंगाई दर 3 से 3.1 फीसदी तक रहने का अनुमान जताया है। वही साल की दूसरी छमाही में यह आंकड़ा 3.4 प्रतिशत से 3.7 प्रतिशत तक रह सकता है। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने वालों को भी आरबीआई की बैठक से खुशखबरी मिली है। दरअसल रिजर्व बैंक ने आरटीजीएस और नेशनल इलेक्ट्रिानिक फंड ट्रांसफर लेन देन पर लगाए गए शुल्क को हटा दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि अब आरटीजीएस और नेशनल इलेक्ट्रानिक फंड ट्रांसफर के जरिए ट्रांजेक्शन करने वाले लोगों को किसी भी तरह का एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना होगा।



 

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