राज्यसभा में नहीं दबायी जा रही विपक्ष की आवाज: नायडू

Samachar Jagat | Friday, 02 Aug 2019 08:39:41 AM
Opposition voice is not being pressed in Rajya Sabha: Naidu

नई दिल्ली। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि कुछ सदस्यों का यह आरोप सही नहीं है कि सदन में विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। 


सोमवार को विधायी कामकाज निपटाने के बाद नायडू ने सदस्यों से कहा कि उन्हें 14 दलों के 15 राज्यसभा सदस्यों का एक पत्र मिला है जिसमें सदन में विपक्ष की आवाज दबाये जाने के साथ साथ विधेयकों को बिना संसदीय समितियों की समीक्षा के पारित कराये जाने का मुद्दा उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इस पत्र पर तीन अन्य दलों के सदस्यों का भी नाम लिखा गया है लेकिन उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। 

नायडू ने कहा कि पत्र में उठाये गये कुछ मुद्दे उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं लेकिन वह रिकार्डों की जांच के आधार पर कह सकते हैं कि सदन में विपक्ष की आवाज दबाये जाने की बात सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सदस्यों ने चिंता  और क्षोभ जताते हुए पत्र में कहा है कि सदन में बहुत कम मुद्दों पर अल्पकालिक चर्चा होती है जबकि पहले से सदन में हर सप्ताह एक विषय पर अल्पकालिक चर्चा कराने की पंरपरा रही है।

उन्होंने कहा कि सदस्यों की विपक्षी नेताओं की आवाज दबाने की शिकायत गंभीर है और इसे देखते हुए उन्होंने राज्यसभा सचिवालय से इस बात की जांच करने को कहा था कि क्या सदन में हर सप्ताह एक विषय पर अल्पकालिक चर्चा की परंपरा रही है। 

उन्होंने कहा कि सचिवालय के रिकार्ड में 1978 से 2013 तक के 36 वर्षों की जानकारी है जिससे पता चलता है कि इस दौरान 16 वर्षों में राज्यसभा में हर साल केवल एक से लेकर पांच मुद्दों पर अल्पकालिक चर्चा हुई। वर्ष 1984 में तो केवल एक ही विषय पर चर्चा हो सकी। इन 36 में से 14 वर्षों में हर साल 6 से 8 मुद्दों पर अल्पकालिक चर्चा हुई । 

इन आंकडों से पता चलता है कि सदन में 30 साल के दौरान हर सत्र में 3 से भी कम मुद्दों पर अल्पकालिक चर्चा हुई। इससे सदस्यों की शिकायत में कही गयी यह बात सही साबित नहीं होती कि सदन में हर सप्ताह एक विषय पर अल्पकालिक चर्चा होती रही है। 

नायडू ने कहा कि इस सत्र में दो विषयों पर अल्पकालिक चर्चा पहले ही हो चुकी है। सदन में लगभग ढाई दिन तक कामकाज नहीं हो सका और इस दौरान एक और विषय पर चर्चा हो सकती थी। अभी भी एक और विषय पर चर्चा हो सकती है इसलिए इस बारे में सदन में किसी नियम या परंपरा का उल्लंघन नहीं हो रहा है। इससे यह भी साबित होता है कि सदन में विपक्ष की आवाज दबाये जाने की शिकायत सही नहीं है। -(एजेंसी)



 

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