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Osteoporosis in Men: ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर महिलाओं, खासकर मेनोपॉज के बाद होने वाली बीमारी माना जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या पुरुषों में भी तेजी से बढ़ रही है। बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, विशेष रूप से टेस्टोस्टेरोन का कम होना, हड्डियों को कमजोर बना सकता है। कई मामलों में लोगों को इस बीमारी का पता तब चलता है, जब मामूली चोट लगने पर भी हड्डी टूट जाती है या गंभीर फ्रैक्चर हो जाता है।
पुरुषों में क्यों बढ़ रहा है ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर लगातार पुरानी हड्डियों को हटाकर नई हड्डियां बनाता रहता है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ यह प्रक्रिया धीमी पड़ने लगती है। जब नई हड्डियां बनने की गति कम हो जाती है और पुरानी हड्डियों का क्षरण तेज हो जाता है, तब हड्डियों का घनत्व (Bone Density) घटने लगता है। इसी स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है।
पुरुष अक्सर इस बीमारी को गंभीरता से नहीं लेते, क्योंकि लंबे समय तक इसे महिलाओं से जुड़ी समस्या माना जाता रहा है। यही कारण है कि समय पर जांच और इलाज नहीं हो पाता।
हड्डियों के लिए क्यों जरूरी है टेस्टोस्टेरोन?
टेस्टोस्टेरोन केवल पुरुषों की यौन स्वास्थ्य या मांसपेशियों के विकास के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।
यह हार्मोन नई हड्डियों के निर्माण में मदद करता है और बोन मिनरल डेंसिटी को बनाए रखता है। लेकिन 40 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसका सीधा असर हड्डियों पर पड़ता है और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ने लगता है।
कम टेस्टोस्टेरोन के क्या हो सकते हैं नुकसान?
यदि शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर सामान्य से कम हो जाए तो इसके कई दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं, जैसे—
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हड्डियों का तेजी से कमजोर होना
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बोन डेंसिटी में कमी
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मांसपेशियों की ताकत कम होना
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बार-बार गिरने की संभावना बढ़ना
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कूल्हे, रीढ़ और कलाई की हड्डियों में फ्रैक्चर का अधिक खतरा
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शारीरिक कमजोरी और सहनशक्ति में कमी
कमजोर मांसपेशियां और कमजोर हड्डियां मिलकर छोटी-सी चोट को भी गंभीर बना सकती हैं।
इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें
ऑस्टियोपोरोसिस को "साइलेंट डिजीज" कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि कुछ संकेत समय रहते पहचान लिए जाएं तो इलाज आसान हो सकता है।
इन लक्षणों पर ध्यान दें—
यदि ये लक्षण लगातार दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेकर बोन डेंसिटी टेस्ट और आवश्यक जांच करानी चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत?
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50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष
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कम टेस्टोस्टेरोन से पीड़ित लोग
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धूम्रपान या अत्यधिक शराब का सेवन करने वाले
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लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाएं लेने वाले मरीज
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शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहने वाले लोग
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जिनके परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास रहा हो
हड्डियों को मजबूत रखने के आसान उपाय
ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव काफी हद तक जीवनशैली पर निर्भर करता है। कुछ आसान आदतें अपनाकर हड्डियों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
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कैल्शियम और विटामिन-डी से भरपूर भोजन करें।
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रोजाना धूप में कुछ समय बिताएं।
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नियमित वॉक, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और वजन उठाने वाले व्यायाम करें।
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धूम्रपान और अत्यधिक शराब से दूरी बनाएं।
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संतुलित वजन बनाए रखें।
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बढ़ती उम्र में समय-समय पर बोन डेंसिटी और हार्मोन की जांच कराएं।
समय पर पहचान है सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऑस्टियोपोरोसिस की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो दवाओं, सही खानपान, व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली की मदद से हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत रखा जा सकता है। इसलिए बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों को भी अपनी हड्डियों की सेहत को लेकर उतना ही सजग रहना चाहिए, जितना महिलाएं रहती हैं।
Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। यदि आपको हड्डियों में दर्द, कमजोरी या अन्य संबंधित लक्षण महसूस हों, तो किसी योग्य डॉक्टर या ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।