सुब्रमणियम के आर्थिक वृद्धि के अनुमान में उत्पादकता, गुणवत्ता को छोड़ दिया गया: सीआईआई

Samachar Jagat | Thursday, 13 Jun 2019 08:40:10 AM
Subramanium's Economic Growth Estimates Productivity, Quality Excluded: CII

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नई दिल्ली। आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर ताजा बहस के बीच उद्योग मंडल सीआईआई ने बुधवार को कहा कि पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविन्द सुब्रमणियम ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के बारे में जो अनुमान लगाए हैं उनमें उत्पादकता और गुणवत्ता को छोड़ दिया और वे केवल मात्रा पर आधारित है।

पिछले साल पद से हटे सुब्रमणियम ने एक शोध पत्र में कहा कि जीडीपी आकलन के तौर-तरीकों में बदलाव के कारण 2011-12 और 2016-17 के बीच देश की आर्थिक वृद्धि दर के वार्षिक अनुमानों को औसतन करीब 2.5 प्रतिशत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। 

इस बारे में अपनी टिप्पणी में सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था जटिल है और केवल कुछ गिनती के संकेतकों के आधार पर उसका आकलन नहीं किया जा सकता।

बनर्जी ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि आर्थिक वृद्धि अनुमान में पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने उत्पादकता और गुणवत्ता को भुला दिया और केवल मात्रा पर गौर किया है। जीडीपी आंकड़े को अधिक मजबूत और व्यापक रुख के साथ लेना होता है जिसमें वृद्धि को गति देने वाले सभी तत्व शामिल हों।’’

उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में 16-17 प्रतिशत का योगदान है लेकिन इसे अध्ययन में शामिल नहीं किया गया है। वहीं जीडीपी में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान देने वाला सेवा क्षेत्र को पर्याप्त रूप से नहीं दर्शाया गया है।

बनर्जी के अनुसार हाल के वर्षों में आईटी तथा दूरसंचार क्षेत्रों अर्थव्यवस्था का सर्वाधिक गतिशील हिस्सा है। यह भी नदारद है। वहीं ग्रामीण सडक़ जैसे कई ढांचागत क्षेत्रों ने कई साल तक दहाई अंक में वृद्धि हुई है लेकिन रिपोर्ट में यह गायब है। -(एजेंसी)`



 

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