बड़े काम के हैं ये 10 मंत्र, नियम पूर्वक करें इनका जाप

Samachar Jagat | Saturday, 26 Nov 2016 10:23:59 AM
बड़े काम के हैं ये 10 मंत्र, नियम पूर्वक करें इनका जाप

हिंदू धर्म में जब भी कोई धार्मिक कार्य किया जाता है तो उसमें मंत्रों का विशेष महत्व होता है। धार्मिक कार्यों में तो मंत्र बोले ही जाते हैं, इसके साथ ही सुबह उठने से लेकर रात को सोते समय तक किन मंत्रों को कार्यानुसार बोला जाता है। इसके बारे में भी बताया गया है। सुबह से रात तक बोले जाने वाले इन मंत्रों में से 10 प्रमुख मंत्र इस प्रकार हैं....

जानें किस तिथि को क्या नहीं खाना चाहिए

1. सुबह उठते ही अपनी दोनों हथेलियां देखकर ये मंत्र बोलें  :-

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वति।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ।।

2. धरती पर पैर रखने से पहले ये मंत्र बोलें :-

समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले ।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्वमे ॥

3. मंजन करने से पहले ये मंत्र बोलें :-

आयुर्बलं यशो वर्चः प्रजाः पशुवसूनि च।
ब्रह्म प्रज्ञां च मेधां च त्वं नो देहि वनस्पते।।

4. नहाने से पहले ये मंत्र बोलें :-

स्नान मन्त्र गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥

5. सूर्य को अर्ध्य देते समय ये मंत्र बोलें :-

ॐ भास्कराय विद्महे, महातेजाय धीमहि
तन्नो सूर्यःप्रचोदयात

6. भोजन करने से पहले ये मंत्र बोलें :-

ॐ सह नाववतु, सह नौ भुनक्तु, सह वीर्यं करवावहै ।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकर प्राण वल्लभे।
ज्ञान वैराग्य सिद्धयर्थ भिखां देहि च पार्वति।।
ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्म समाधिना ।।

7. भोजन करने के बाद ये मंत्र बोलें :-

अगस्त्यम कुम्भकर्णम च शनिं च बडवानलनम।
भोजनं परिपाकारथ स्मरेत भीमं च पंचमं ।।
अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभवः।
यज्ञाद भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्म समुद् भवः।।

हिंदू धर्म में नमस्कार करनें का ये है सही तरीका

8. पढाई करने से पहले ये मंत्र बोलें  :-

ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।
कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।

9. शाम को पूजा करते वक़्त ये मंत्र बोलें :-

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य
धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

10. रात को सोने से पहले ये मंत्र बोलें :-

अच्युतं केशवं विष्णुं हरिं सोमं जनार्दनम्।
हसं नारायणं कृष्णं जपते दुःस्वप्रशान्तये।।

इन ख़बरों पर भी डालें एक नजर :-

जानिए! एक गर्भ से कैसे उत्पन्न हुए 100 कौरव

इस मंदिर में प्रसाद के रूप में मिलते हैं गीले कपड़े

ब्रह्मचारी हनुमान कैसे बने एक पुत्र के पिता

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर
ज्योतिष

Copyright @ 2016 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.