मॉब लिंचिंग के मामलों में गंभीर नहीं हैं केंद्र और राज्य सरकारें : मायावती

Samachar Jagat | Saturday, 13 Jul 2019 01:34:25 PM
Center and state governments are not serious in mobs lingering: Mayawati

लखनऊ। भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) की घटनाओं पर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने शनिवार को कहा कि इसकी जद में अब केवल दलित, आदिवासी और धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के लोग ही नहीं बल्कि सर्वसमाज के लोग भी आ रहे हैं और पुलिस भी इसका शिकार बन रही है। 

उन्होंने शनिवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि अब ये घटनायें काफी आम हो गई हैं और देश में लोकतन्त्र के हिंसक भीड़ तन्त्र में बदल जाने से सभ्य समाज में चिन्ता की लहर है। उच्चतम न्यायालय ने भी इसका संज्ञान लेकर केन्द्र व राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए हैं, लेकिन इस मामले में भी केन्द्र व राज्य सरकारें कतई गम्भीर नहीं हैं जो दु:ख की बात है।

मायावती ने कहा कि ऐसे में उत्तरप्रदेश राज्य विधि आयोग की यह पहल स्वागत योग्य है कि भीड़ हिंसा की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अलग से नया सख्त कानून बनाया जाय। इसके मसौदे के रूप में आयोग ने उत्तरप्रदेश काम्बैटिंग ऑफ मॉब लिंचिंग विधेयक, 2019 राज्य सरकार को सौंप कर दोषियों को उम्र कैद की सजा तय किये जाने की सिफारिश की है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वर्तमान कानून के प्रभावी इस्तेमाल से ही हिंसक भीड़तंत्र एवं भीड़ हत्या को रोकने के हर उपाय किये जा सकते हैं।

परन्तु जिस प्रकार से यह रोग लगातार फैल रहा है, उस सन्दर्भ में अलग से भीड़तन्त्र-विरोधी कानून बनाने की जरूरत हर तरफ महसूस हो रही है और सरकार को सक्रिय हो जाना चाहिए। बसपा अध्यक्ष ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद केन्द्र सरकार को इस सम्बन्ध में अलग से देशव्यापी कानून बना लेना चाहिये था।

लेकिन लोकपाल की तरह मॉब लिंचिंग जैसे जघन्य अपराध के मामले में भी केन्द्र सरकार उदासीन है तथा इसकी रोकथाम के मामले में कमजोर इच्छाशक्ति वाली सरकार साबित हो रही है। मायावती ने कहा कि उन्मादी एवं भीड़ हिसा की बढ़ती घटनाओं से सामाजिक तनाव काफी बढ़ गया है।



 

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