इन टुकड़ों को जोडक़र भारत का नक्शा बनाना है

Samachar Jagat | Monday, 29 Apr 2019 01:34:49 PM
Adding these pieces to map India

बात थोड़ी पुरानी है लेकिन है बहुत ही ग्रहणीय। एक बार विनोबाजी किसी कॉलेज में गए क्योकि वे मानते थे कि युवा पीढ़ी में भारतीय संस्कृति से ओत-प्रोत आचरण होना बहुत जरूरी है और इसी उद्देश्य से वे छात्रों को एक अच्छा पाठ पढ़ाना चाहते थे। वे छात्रों के बीच में गए और उनको कागज के कुछ टुकड़े देते हुए कहा कि इन टुकड़ों में भारत का नक्शा खण्ड-खण्ड है, इनको जोडक़र इन्हें अखण्ड बनाना है। छात्रों ने काफी देर तक प्रयास किया लेकिन वे भारत का नक्शा बनाने में असमर्थ रहे। वे इस बात से बहुत निराश हो गए। 

उन छात्रों के पास ही एक नौजवान बैठा हुआ था और छात्रों को नाकाम होते हुए देख रहा था। उसने बड़े ही साहस के साथ विनोबाजी से कहा- यदि आप मुझे आज्ञा दें तो मैं इन सब टुकड़ों को जोड़ सकता हूं। इस पर विनोबाजी ने सहर्ष वे सारे टुकड़े उस नौजवान को दे दिए और कहा कि तुम भी प्रयास कर लो।

वह युवक विनोबाजी की आज्ञा पाकर बहुत प्रसन्न हुआ और बहुत ही रुचि के साथ टुकड़ों को जोडक़र भारत का नक्शा बनाने लगा और देखते-देखते ही उसने भारत का नक्शा बना दिया। उसके इस कारनामे से विनोबाजी सहित सभी आश्चर्यचकित थे। विनोबाजी ने बड़े ही आश्चर्यभाव से पूछा कि तुमने इतनी जल्दी ये सब टुकड़े जोडक़र भारत का नक्शा कैसे बना दिया? उस नौजवान ने बड़ी ही सहाजता से जवाब दिया कि महाराज जी इन टुकड़ों के एक तरफ भारत का नक्शा है तथा दूसरी तरफ एक आदमी का चित्र है। मैंने भारत का नक्शा बनाने से पहले अर्थात् भारत को जोड़ने से पहले आदमी को जोड़ा और आदमी के जुड़ते ही भारत का नक्शा अपने आप बन गया।

 उस युवक ने ऐसा सुनकर विनोबाजी बहुत खुश हुए और उस नौजवान को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह बिल्कुल सही है कि देश को जोड़ने से पहले हमें देश के प्रत्येक नागरिक को जोड़ना होगा क्योंकि जब देशवासी आपस में एक-दूसरे से जुड़ेंगे तो देश अपने आप जुड़ता चला जाएगा। आदमियों को जोड़ने के लिए किसी भी प्रकार का धन खर्च नहीं पड़ता है, परिश्रम करना नहीं पड़ता है या फिर अन्य कोई लोभ-प्रलोभन का रास्ता अपनाना नहीं पड़ता है, इसके लिए तो केवल स्वयं को प्रेम से भरना पड़ता है, समभाव से भरना पड़ता है, भावनाओं-संवेदनाओं से भरना पड़ता है और अच्छाई-सच्चाई-ईमानदारी से भरना पड़ता है। आइए, हम जुड़ें, जोड़ें, आगे बढ़ें, खूब पढ़ें।

प्रेरणा बिन्दु:- 
फूल खुशबू से भरा रहता है
फल रस से भरा रहता है
ऐ मेरे मीत, तू प्रेम से भर जा
मानव जीवन तो यही कहता है।



 

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