Health News: मुंह के भीतर की खाल का उत्तक निकाल कर पेशाब की नली का निर्माण

Samachar Jagat | Wednesday, 14 Sep 2022 11:58:43 AM
ureterization

जयपुर। सर्जरी का कायदा है कि मरीज को ओटी में ले जाने से पहले उसकी पूरी जांच की जाए। ताकि उसकी पूरी हिस्ट्री की जानकारी मिल सके। मगर हाल में इस सिलसिले में एसएमएस के एक युवा सर्जंस से बड़ी चूक हो गई। सीरियस किस्म का यह वाकिया ईदगाह जयपुर निवासी तीस वर्षीय युवक राजू खां को पेशाब बंद होने की सीरियस समस्या हो गई थी। आरंभ में वह असमंजस में रहा कि इस बीमारी का उपचार किससे करवाएं। आरंभ में उसने ईदगाह इलाके की प्राईवेट क्लिनिक में अपने आप को दिखाया, मगर केस की गंभीरता को देख कर उसे वहां से सवाई मानसिंह अस्पताल की धनवंतरी इकाई में सिफ्ट कर दिया। वहां उसका इमरजैंसी ऑपरेशन तो हो गया ,मगर इससे पहले बिना कोई जांच के ही पेसेंेट के यूरिनरी सिस्टम को ऑपन कर दिया और जल्दबाजी में कोई महत्वपूर्ण नस को काट कर घाव को बंद कर दिया। राजू बताता है कि ऑपरेशन के दो दिन बाद उसे छुटटी देदी गई थी। मगर घर जाते ही उसे फिर से पेशाब बंद होने की समस्या हो गई। एकाएक तबियत बिगड़ने पर उसे फिर से धनवंतरी ले जाया गया तो वहां के सर्जन्स ने उसक े पेट में छेद करके कैथ्ोडर याने रबड़ की नली लगाली। दो- तीन माह तक सब ठीक चलता रहा, लेकिन तभी उसके शरीर क ा भाग, जिसका कि ऑपरेशन किया गया था, वह नीला पड़ गया और तेज दर्द भी होने लगा। बात बिगड़ने पर धनवंतरी के सर्जन्स ने यह केस एसएमएस के विभाग के ट्रांसप्लांट विभाग को रेफर कर दिया। वहां जब इस पेसंेट की सोनोग्राफी और एमआरआई करवाई गई तो सारा मामला खुला। विभाग के सीनियर्स बहुत अधिक नाराज हो गए और पूर्व में ऑपरेशन करने वाले सर्जन की खोज करने का प्रयास किया, मगर धनवंतरी में इसकी कोई जानकारी नहीं मिली। यही नहीं कि ऑपरेशन के बाद बने पेसेंट के टिकिट तब गायब मिला। 
ख्ोर, विभाग के सीानियर सर्जन्स ने पहली प्राथमिकता यह तय की कि उसकी जान को बचाया जाए, क्योंे कि उसके यूरिन से इस बात का संकेत मिला कि अनावश्यक रूप से लंबे समय तक कैथ्ोडर लगाने पर राजू के पेशाब के ब्लेडर और किडनी में इनफेक्सन हो गया था। घाव सड़ने के साथ उसमें मवाद भर गई। 
सर्जन्स न इसके बाद दूसरा स्टेप यह उठाया कि पेसेंट को इनडोर वार्ड में भर्ती करके एंटीबायटिक दवाएं दी, ताकि घाव की रिपेयरिंग की जा सके। कोई डेढ माह का समय इसमें लग गया। संयोग की बात यह रही कि हाल ही में देश- विदेश के सीनियर यूरोलोजिस्टांे की जयपुर में सेमानार का आयोजन फिक्स हो गया था। राजू के ऑपरेशन का डेमों सेमिनार में शामिल हुए सो से अधिक यूरोलोजिस्ट को ऑपरेशन लाइव करके जटिल से जटिल की बारीकियां बताई। राजू के केस में एक नया प्रयोग यह किया गया कि उसके मुंह के भीतरी हिस्से के उत्तकों को लेकर पेशाब की नली बनाई गई। इससे पूर्व यूरिन की सड़ी हुई नली को काट कर अलग कर दिया गया था। उत्तकों से बनाई गई नली के बाद पेसेंट राजू खां की तबियत अब ठीक है। मंुह से उत्तक निकालने पर वहां जबाड़े के आसपास वाले भाग में घाव बन गया था। ऐसे में उसे सात दिनों तक लिक्वीड तरल ही दिया गया था। एक सप्ताह बाद जब पेसंेट से बात करने का मौका मिला तो उसे बोलने में परेशानी हो रही थी और अपने मन की बात परिजनों को बताने क ी कोशिश करने लगा था। 
यूरोलॉजी सोसायटी ऑफ इंडिया उत्तरी क्ष्ोत्र चैप्टर के विश्ोषज्ञों की इस टीम में एसएमएस के यूरोलोजी विभाग के हैड डॉ शिवम प्रियदर्शी, डॉ.एंथनी मुडी, डॉ गुइडो बार बागली ईटली,डॉ जॉन मलहाले यूएसए, डॉ पवन राज चॉलिस नेपाल, डॉ तारिकअब्बास दोहा। भारत से डॉ. संजय पुण्ो, डॉ संजय पांडे मुंबई, डॉ रूपिन शाह मुंबई, डॉ विनय तोमर प्रोफेसर एसएमएस, डॉ श्ोरसिंह यादव प्रोफेसर एसएमएस जयपुर। इसके अलावा डॉ निचिकेत व्यास प्रोफेसर, प्रोफेसर नीरज अग्रवाल, डॉ प्रशांत गुप्ता एसोसिएट प्रोफेसर, डॉ संजीव जैसवाल एसो. प्रोफेसर, डॉ गोविंद शर्मा, मनोजकुमार, सोमेन्द्र बंसल उपरोक्त एसोसिएट प्रोफेसर। डा. रामदयाल शाह एमओ, डॉ. घर्मेन्द्र जांगीड़ और डॉ अजय सिंह हाड़ा एमओ आदि।




 

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