भूख और गुरबत ने बिहार में एक और मास्टरजी की जान ली, आंकड़ा 43 तक पहुंचा

Samachar Jagat | Wednesday, 20 May 2020 12:29:57 PM
2201935016693457

बिहार में दो महीने में भूख और गुरबत ने 43 शिक्षकों की जान ले ली है. कोरोना जैसी महामारी ने भी बिहार में इतने लोगों की जान नहीं ली लेकिन संवेदनहीन नीतीश कुमार की सरकार की वजह से लगातार शिक्षकों की मौतें हो रहीं हैं. बिहार में लाखों शिक्षक दो महीने से हड़ताल पर हैं. सरकार ने उनका वेतन रोक रखा है. फरवरी महीने में जितने दिनों शिक्षकों ने काम किया था उनका भी वेतन सरकार ने रोक रखा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी निरंकुश तानाशाह की तरह काम कर रहे हैं. वे शिक्षकों से नाराज हैं क्योंकि न सिर्फ यह कि सरकार के फैसले के खिलाफ अदालत तक गए बल्कि उनकी सभाओं में उनका विरोध भी करते रहे हैं. नीतीश कुमार इससे नाराज हैं और वे शिक्षकों का वेतन रोक कर अहसास दिलाने में लगे हैं वे जो चाहें कर सकते हैं. उनके तानाशाही रवैये ने बुधवार को एक और शिक्षक की जान ले ली.

बिहार सरकार के सामने नियोजित शिक्षकों की मांगों को पूरा करना चुनौती है. लॉकडाउन से पहले से ही बिहार के शिक्षक हड़ताल पर हैं. सरकार की ओर से बार-बार उन्हें ड्यूटी पर आने की अपील की जा रही है. लेकिन शिक्षक भी अपनी मांगों पर अड़े हैं. भूख से कई शिक्षकों की मौत हो गई है. अब एक और नियोजित क्षक की मौत से शिक्षकों में मायूसी भी है और गुस्सा भी . मुजफ्फरपुर के डुमरी मुशहरी प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने वाले एक नियोजित शिक्षक की मौत से कोहराम मच गया है. मरने वाले शिक्षक का नाम विनोद कुमार जो मुजफ्फरपुर के मुशहरी प्राइमरी स्कूल में पढ़ाते थे. हड़ताली शिक्षकों की मौतों की वजह से शिक्षकों में भी गुस्सा बढ़ रहा है. कुछ ही दिन पहले हड़ताली शिक्षकों को यह फरमान सुनाया गया था कि कोई भी शिक्षक अपना योगदान देना चाहते हैं तो वे अपना अभ्यावेदन पत्र व्हाट्सएप या ईमेल से अपने जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी या कार्यक्रम पदाधिकारी को दे सकते हैं. लेकिन नियोजित शिक्षकों ने इस प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया. 

फिर हड़ताली शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री को खुला पत्रा लिखा. उन्होंने लिखा कि सरकार के "संवेदनशील" शब्द को ही संवेदनहीन बताया और कहा कि जिस सेवा शर्त पर सरकार खुद को संवेदनशील होने और उसे तीन महीने के अंदर लागू करने का संकल्प लेने की बात कह रही है, वह सरकार के पांच साल के बाद भी पूरा नहीं कर पाने से ही सरकार की संवेदनशीलता का पता चलता है.

बिहार में फरवरी के मध्य से हड़ताल पर गए 43 शिक्षकों की मौत हो चुकी है. हड़ताल के दौरान जान गंवाने वाले पंद्रह शिक्षकों को सरकार ने सस्पेंड कर दिया था. वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने सातवें वेतन आयोग के तहत तनख्वाह बढ़ाए जाने और बेहतर सेवा शर्तों की शुरुआत की मांग की थी. अब टीचर्स एसोसिएशन ने मांग की है कि बिहार सरकार हड़ताल के दौरान जान गंवाने वाले शिक्षकों के प्रति संवेदना दिखाए और हड़ताल खत्म करने के लिए कदम उठाए.

बिहार में साढ़े चार लाख शिक्षक हड़ताल पर हैं. इनमें से करीब बीस हजार शिक्षकों को सरकार ने बर्खास्त कर दिया है. हड़ताल के दौरान जिन शिक्षकों की मौत हुई है उसे लेकर बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के मीडिया इनचार्ज मनोज कुमार का कहना है कि हम यह नहीं कह रहे कि 42 टीचर भूख से मर गए. लेकिन इनमें से कई लोगों को बर्खास्त किया गया था. जाहिर है उन पर काफी दबाव था. इस तरह अचानक शिक्षकों का मरना परेशान करने वाला है. इनकी मौत की वजह हार्ट अटैक से लेकर ब्रेन हेमरेज तक रही है. कुमार ने कहा कि सरकार ने जनवरी तक की तनख्वाह तो रिलीज कर दी, लेकिन इसके बाद लोगों को नो वर्क, नो पे नोटिस थमा दिया. जिससे हड़ताली शिक्षकों को दो महीने तक वेतन नहीं मिला है.

उन्होंने बताया कि लॉकडाउन ने स्थितियों को और गंभीर बना दिया है. सरकार लगातार दबाने का काम कर रही है. उन्होंने पहले बीस हजार शिक्षकों पर मुकदमा किया. फिर उन्हें बर्खास्त कर दिया. लॉकडाउन की वजह से हम सबसे कठिन समय से गुजर रहे हैं. हमारी मौजूदा नौकरी पर संशय है और कोई वैकल्पिक नौकरी भी नहीं है. कोरोना संकट और देश में लॉक डाउन के बीच बिहार में नियोजित शिक्षकों की हड़ताल बदस्तूर जारी है. सरकार कोरोना से निपटने के लिए फैसले ले रही है. लेकिन हड़ताली शिक्षकों पर किसी का ध्यान नहीं है. सरकार की इस बेरुखी के बाद अब शिक्षक संघ ने त्राहिमाम संदेश जारी किया है. बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव और पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा है कि बिहार में अब तक हड़ताल के दौरान चालीस से ज्यादा शिक्षकों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार की नींद कब टूटेगी यह सवाल अभी भी बना हुआ है. 

हालांकि शिक्षकों के दो प्रमुख नेतृत्वकर्ता संगठनों ने बातचीत के लिए शिक्षा मंत्री को पत्र भेजा है. बिहार के नियोजित शिक्षक समान वेतन सहित कई मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, तो माध्यमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर वेतन विसंगति दूर करने के लिए नियोजित शिक्षकों के समर्थन में माध्यमिक-उच्च माध्यमिक शिक्षक 25 फरवरी से हड़ताल पर हैं. हड़ताल का नेतृत्व कर रहे दो संगठनों ने सरकार को वार्ता की पेशकश की है. बिहार शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक ब्रजनंदन शर्मा और बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव शत्रुध्न प्रसाद सिंह ने वार्ता के लिए समय निर्धारित करने को शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है. लेकिन सरकार दो महीने पहले भी शिक्षकों की मांग पर सोई हुई थी, अब भी सोई हुई है. शिक्षकों का हड़ताल जारी है और मौतों का सिलसिला भी.  (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विशलेषण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).




 
loading...

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...


Copyright @ 2020 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.