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जयपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन में कही बातों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। डोटासरा ने इस संबंध में एक्स के माध्यम से कहा कि बेशर्मी की पराकाष्ठा है कि देश के प्रधानमंत्री चलते चुनाव को प्रभावित करने के लिए इस तरह की बातें करे, और उसके बाद में राष्ट्र के नाम संबोधन और वो भी इतनी निम्न स्तर की भाषा का प्रयोग करते हुए।
मोदी सरकार ने महिला आरक्षण बिल में साफ लिखा गया है कि 33% आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा। अब सरकार खुद कह रही है कि अगली जनगणना के अधिकृत आंकड़े मार्च 2027 तक आएंगे। यानी 2029 तक महिलाओं को आरक्षण मिलने की संभावना टाल दी गई। जबकि सरकार 2014 से सत्ता में है।
उन्होंने मोदी सरकार से चार सवाल किए हैं। पहला सवाल- जनगणना समय पर क्यों नहीं करवाई गई? जानबूझकर देरी क्यों की? दूसरा सवाल- बिल पास होने के बाद गजट नोटिफिकेशन में भी देरी क्यों की? प्रक्रिया को लेकर कई संवैधानिक विशेषज्ञों ने सवाल उठाए। अगर सरकार गंभीर थी, तो तुरंत क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? तीसरा सवाल- महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन शर्त क्यों जोड़ी? असम और जम्मू-कश्मीर में परिसीमन पर पहले ही पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में पूरे देश में परिसीमन को लेकर आशंकाएं स्वाभाविक हैं। अगर परिसीमन निष्पक्ष नहीं होगा, तो महिला आरक्षण भी भाजपा के सियासी षड्यंत्र का हिस्सा बनकर रह जाएगा। चौथा और सबसे महत्वपूर्ण सवाल - जब मौजूदा लोकसभा की 543 सीटें हैं, तो इन्हीं सीटों पर 33% आरक्षण लागू करने में क्या दिक्कत है? इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़कर टालना क्या सिर्फ एक राजनीतिक षड्यंत्र नहीं है? डोटासरा ने कहा कि मोदी जी.. आज देश की महिलाएं भावनात्मक भाषण नहीं, ठोस अधिकार और समयबद्ध लागू होने वाला आरक्षण चाहती हैं।
मोदी ने सिर्फ राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश की
डोटासरा ने आगे कहा कि राजस्थान में जब मुख्यमंत्री चुनने का मौका आया, तो भाजपा ने क्या महिला को आगे बढ़ाया? मोदी ने सिर्फ राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश की। अगर BJP में नारी सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता होती, तो कम से कम एक बड़े राज्य में महिला नेतृत्व जरूर दिखता।
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