जाने क्या है छाउपडी कुुप्रथा, इस प्रथा ने नेपाल में महिला की ली जान

Samachar Jagat | Friday, 12 Jan 2018 12:56:29 PM
Death of woman in Nepal due to malpractice

कठमांडु। नेपाल की राजधानी काठमांडु में गैरकानूनी छाउपडी कुप्रथा से एक महिला की मौत हो गयी।पुलिस ने बताया कि महिला की मृत्यु सोमवार को हो गई थी। वह अपने माहवारी के दिनों में थी। वह घर के बाहर बनी छोपड़ी में रह रही थी, भीषण ठंड से बचने के लिए महिला ने कोयला जला रखा था छोपड़ी में वायु-संचालन की व्यवस्था नहीं होने से उसकी मृत्यु हो गयी। 

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न्यूयार्क टाइम के अनुसार इस मुद्दे पर उसके पति का कहना है कि उसने अपनी पत्नी को कभी भी इस कुप्रथा को मानने के लिए मजबूर नहीं किया था। क्षेत्र में अधिकांश महिलाएं इस प्रथा को मानती हैं इसलिए वह भी मानती थीं। 

पड़ोसी देश नेपाल के पश्चिमी क्षेत्रों में आज भी लोग छाउपडी कुप्रथा को मानते हैं। इस प्रथा के अनुसार महावारी के दौरान महिलाएं घर के बाहर पशुओं के रहने की जगह या घास-फूस से बनी छोटी छोपड़ी में रहना पड़ता है। इस दौरान उन्हें अशुद्ध और अछूत माना जाता है। 

महिलाओं को घर के किसी कार्य में शामिल होनी की अनुमति नहीं होती है। उन्हें ठंड में रजाई या कंबल इस्तमाल करने की भी इजाजत नहीं होती इसलिए अक्सर महिलाएं ठंड से बचने के लिए अलाव का इस्तेमाल करती है हालांकि इस वजह से कई बार दम घुंटने से महिलाओं की मृत्यु भी हो जाती है। घर के बाहर खुले में रहने से कई बार ऐसे में महिलाएं दुष्कर्म की शिकार भी हो जाती है। कई बार जानवरों के काटने या कोई अन्य प्राकृतिक दिक्कतों से उनकी मृत्यु होती है।

पिछले साल ही गर्मी के मौसम में इस कुप्रथा के दौरान एक महिला की मृत्यु सांप काटने से हो गयी थी।पिछले साल सरकार ने इस कुप्रथा को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। अगर कोई व्यक्ति किसी महिला को ऐसा करने पर मजबूर करता है, तो वह दंड का भागी होगा। इस कानून के अनुपालन में कुछ नरमी बरती गई है और अगस्त तक किसी को भी सजा नहीं सुनाई जाएगी।

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नेपाल में महिलाओं के लिए काम कर रही सामाजिक कार्यकर्ता राधा पाडवल ने बताया कि महिला का परिवार पढ़ा लिखा था फिर भी वह इस कुप्रथा की शिकार हो गयी। पाडवल ने बताया अंधविश्वास के कारण लोग छाउपडी कुप्रथा को मानते हैं। इस दौरान महिलाओं का मन्दिरों में जाना वर्जित होता है और अशुद्ध मानी जाती हैं।
 



 

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