न्यायालय ने अपने फैसले में किया सुधार, दहेज मामलों में तुरंत गिरफ्तारी से संरक्षण खत्म किया

Samachar Jagat | Saturday, 15 Sep 2018 10:36:11 AM
Court setback for husbands in bogus dowry cases

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने एक पुराने आदेश में संशोधन करते हुए दहेज उत्पीड़न के मामलों में तुरंत गिरफ्तारी से संरक्षण खत्म कर दिया। शीर्ष अदालत ने अपने उस पुराने आदेश में पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले विवाहित महिलाओं की शिकायत की जांच के लिए एक समिति का गठन करने को कहा था।

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि हर जिले में परिवार कल्याण समितियां गठित करने और उन्हें शक्ति प्रदान करने का निर्देश कानूनी ढांचे के अनुरूप नहीं था। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि अदालतों के पास अग्रिम जमानत नाम से प्रसिद्ध गिरफ्तारी पूर्व जमानत देने और यहां तक कि कानूनी संतुलन बनाने के लिए आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह से निरस्त करने की पर्याप्त शक्ति है क्योंकि कोई भी अदालत दोनों लिगों के बीच टकराव के बारे में नहीं सोच सकती।

पीठ ने अपने उस पिछले फैसले के निर्देश में भी संशोधन किया जिसमें यह निर्देश दिया गया कि अगर किसी वैवाहिक विवाद के पक्षों के बीच समझौता होता है तो निचली अदालत के न्यायाधीश आपराधिक मामले को बंद कर सकते हैं।

अदालत ने गत वर्ष जुलाई में हर जिले में उस परिवार कल्याण समितियों के गठन का निर्देश दिया था जो पुलिस या मजिस्ट्रेट द्बारा प्राप्त दहेज उत्पीड़न के आरोपेां का सत्यापन करेगी। अदालत ने तब कहा था कि समिति की रिपोर्ट आने पर ही किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी होगी।

पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर वैधानिक प्रावधान और फैसले पहले मौजूद हैं और इसलिए परिवार कल्याण समितियों के गठन और उन्हें शक्ति देने के निर्देश ''गलत’’ हैं और यह ''वैधानिक ढांचे के अनुरूप नहीं’’ है। गत वर्ष जुलाई में 2 न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि भादंसं की धारा 498 ए और इससे जुड़े अन्य अपराधों के तहत शिकायतों की जांच क्षेत्र के एक विशेष जांच अधिकारी द्बारा हो सकती है। 



 

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