नानक नाम जहाज है, चढ़े सो उतरे पार कोविंद

Samachar Jagat | Tuesday, 12 Nov 2019 02:48:04 PM
There is a ship named Nanak, climbed across Kovind

सुल्तानपुर लोधी। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने गुरुद्वारा बेर साहब में शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक समिति की ओर से गुरूनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर आयोजित समारोह में शामिल हुए तथा गुरुद्वारा में माथा टेका।

पंजाबी में बोलते हुए कोविंद ने कहा कि नानक नाम जहाज है, चढ़े सो उतरे पार। उन्होंने कहा कि ‘मंच पर विराजमान पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, एसजीपीसी के प्रधान भाई गोविंदर सिंह लोंगोवाल तथा सभी जत्थेदारों नू मेरा सतश्री अकाल।

 देश ते विदेशां च रहंदे लोका नूं मेरे वलों 550वें प्रकाश पर्व दियां लख लख वधाईयां’। उन्होंने कहा, ‘‘सुल्तानपुर लोधी दी धरती ते होना मेरे लई बड़े मान दी गल है’’। उन्होंने कहा कि यह वह धरती है जहां गुरु नानक देव जी ने ज्ञान प्राप्त किया था तथा उनसे संबंधित अन्य स्थान भी मौजूद हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि बाबा नानक साल 1496 में 27 वर्ष की आयु में जन कल्याण के लिए यहां से गए तथा सरबत का भला का संदेश दिया। भाईचारा तथा सछ्वावना की शिक्षा देकर लोगों का भला करने के लिए संगीत की भाषा में उपदेश दिए।

हम सब की जिम्मेदारी है कि हम बाबा नानक की शिक्षाओं पर चलते हुए लोगों के कल्याण के लिए कार्य करें। उन्होने कहा कि गुरु नानक देव जी हम सबके दिलों में रहते हैं। गुरु नानक की ओर से दी गई आध्यात्मिक शिक्षाओं के कारण ही उनके अनुयायी आज सारी दुनिया में पहचाने जाते हैं। कोविंद ने कहा कि बाबा नानक कण-कण में मौजूद हैं।

 जन्म साखियों में उनकी फेरियों का वर्णन मिलता है। अन्याय के खिलाफ लडऩा उनकी शिक्षा थी। उन्होंने कहा कि बाबा नानक की शिक्षाओं के अनुरूप अपने जीवन को ढाल कर ही हम सारी दुनिया के लिए अपना योगदान दे सकते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि ‘नानक नाम जहाज है, चढ़े सो उतरे पार। सभी को मेरा सत श्री अकाल। -(एजेंसी)



 

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