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Samachar Jagat | Saturday, 08 Sep 2018 04:47:27 PM
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मोदी दूसरे देश में होते तो इस्तीफा देना पड़ता: सिब्बल

Modi had to resign if he was in another country: Sibal

नयी दिल्ली। कांग्रेस  के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने नोटबंदी को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि अगर वह दूसरे देश में होते उनको इस्तीफा देना पड़ता।

सिब्बल ने अपनी पुस्तक ‘शेड्स ऑफ ट्रुथ’ के विमोचन के मौके पर कहा, ‘‘महान नेता (मोदी) ने हमें नोटबंदी दी जिससे हमने जीडीपी का 1.5 हिस्सा गंवा दिया। अगर वह किसी दूसरे देश में होते जो उनको इस्तीफा देना पड़ता। उन्होंने कहा जिस तरह से जीएसटी को लागू किया गया उससे बहुत नुकसान हुआ।

सिब्बल ने कहा वह (मोदी) हम पर नीतिगत पंगुता का आरोप लगाते थे लेकिन यही नीतिगत पंगुता 8.2 फीसदी की औसत जीडीपी लेकर आई जो भारत के इतिहास में कभी नहीं हुआ। आप सोचिए कि आज कोई नीतिगत पंगुता नहीं है लेकिन अर्थव्यवस्था की क्या स्थिति है?

समलैंगिकों को अधिकार दिलाने के लिए इस वकील ने गुजार दिए अपनी जिदंगी के बीस वर्ष, आखिरकार मिली जीत  

anand grover fought a long fight for lgbt community

भले ही सम​लैंगिक अधिकार कानून पारित हो गया, लेकिन इस कानून को पास करवाने ​के लिए जिस वकील ने जी-तोड मेहनत की है। वो ही जानता हैं उन्हे किन-किन दलीलों से गुजरना पडा होगा। उन्होंने लगातार बीस वर्ष तक समलैंगिकों के अधिकार के खिलाफ कोर्ट में लडाई जारी रखी।

आखिरकार समलैंगिकों का न्याय मिल ही गया। कोर्ट ने 7 सितंबर को अपना फैसला सुनाते हुए इस मामले का सही ठहराया। साथ ही कहा कि ये कोई अपराध की श्रेणी में नहीं है। आपको बता दें कि धारा 377 को खत्म करने के उच्चतम न्यायालय के ऐतेहासिक फैसले से LGBT समुदाय में ख़ुशी की लहर छाई है। देशभर में LGBT समुदाय ने इस फैसले के बाद जश्न मनाया।

अब उन्हें कोई भी अपराधी नहीं कहेगा। लेकिन इस बड़ी जीत के पीछे उस व्यक्ति का सबसे अधिक योगदान है जिसने अपने जीवन के 20 वर्ष इस इंसाफ की लड़ाई के लिए कुर्बान कर दिए। धारा 377 को लेकर एक NGO यानी गैर सरकारी संगठन नाज़ फाउंडेशन ने समलैंगिकों के अधिकारों के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी तथा नाज़ फाउंडेशन का केस लड़ने वाले वकील का नाम आनंद ग्रोवर है।

नाज़ फाउंडेशन ही वो संगठन है जिसने साल 2013 में समलैंगिकता को अपराध घोषित करने के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। इस लड़ाई की शुरुआत 1998 में हुई। उन दिनों के अपने अनुभवों को साझा करते हुए ग्रोवर ने कहा कि उन दिनों हम लोग एचआईवी पर बहुत सारा काम कर रहे थे।

हम इस बात के लिए लड़ रहे थे कि किसी भी एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति से नौकरी के दौरान कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। एचआईवी 'समलैंगिक यौन संबंध' से जुड़ा हुआ था ऐसे में हमारे पास 'गे सेक्स' के कई लोगों ने संपर्क करना शुरू कर दिया। इस लड़ाई में आने वाली परेशानियों को साझा करते हुए ग्रोवर ने कहा कि कई तरह के मामले सामने आए।

पुलिस इस तरह के लोगों से ब्लैकमेल करती थी। समलैंगिक पुरुषों को ठीक करने के लिए इलेक्ट्रिक थेरेपी का सहारा लिया जाता था। हम ये जानना चाहते थे कि ये सब क्यों हो रहा था और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि धारा 377 ही इसकी जड़ है। हमें पता चला कि दिल्ली में नाज़ फाउंडेशन भी इस पर काम कर रहा था। इसलिए हमने 2001 में नाज़ फाउंडेशन की तरफ से याचिका दायर की थी।

रूस से संबंध की जांच में ट्रंप के पूर्व सलाहकार को सजा

Russia former adviser to trumpet in connection with investigations

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सलाहकार को एफबीआई से झूठ बोलने के मामले में शुक्रवार को जेल की सजा दी गई है। उनके रूस से संपर्क की वजह से ही मास्को के साथ संभावित सांठगांठ की जांच शुरू की गई थी।

अमेरिकी जिला न्यायाधीश रैंडोल्फ मॉस ने विदेशी नीति सहायक जॉर्ज पापाडोपौलोस को उनके इकबालिया जुर्म और पछतावे को मानते हुए उन्हें 14 दिन की जेल की सजा सुनाई लेकिन कहा उन्होंने एक ऐसी जांच में झूठ बोला जो देश की सुरक्षा के लिए अहम है।

रूस से मिलीभगत को लेकर विशेष अधिवक्ता की जांच में जेल की सजा पाने वाले पापाडोपौलोस दूसरे व्यक्ति हैं। इससे पहले, ट्रंप के पूर्व शीर्ष सहायक को दोषी ठहराया गया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ये दोषसिद्धियां उस जांच के लिए कुछ भी नहीं है जिसपर लाख डॉलर का खर्च आया है।

उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया है 35 लोगों को आरोपित किया गया है जबकि 5 ने इकबाल-ए-जुर्म किया है और एक को केस चलाकर दोषी करार दिया गया है। ट्रंप ने ट्वीट किया,  2.8 करोड़ डॉलर के बदले 14 दिन यानी 20 लाख डॉलर प्रतिदिन।

कोई साठगांठ नहीं है। अमेरिका के लिए एक बड़ा दिन। सीनेटर मार्क वार्नर ने मूलर के काम की सराहना की है। वार्नर सीनेट की खुफिया समिति में डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ सदस्य हैं। इसने भी रूस के साथ साठगांठ की जांच की थी। वार्नर ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति की ओर से लगातर हमलों के बावजूद मूलर और उनकी टीम ने 2016 में ट्रंप के प्रचार अभियान की रूस के साथ संपर्क की गंभीर और पेशेवर जांच की है।

पापाडोपौलोस (31) लंदन के एक अनुभवहीन तेल विशेषज्ञ हैं। वे मार्च 2016 में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार ट्रंप के प्रचार अभियान में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड में शामिल हुए थे। पापाडोपौलोस ने वाशिंगटन की अदालत में कहा कि जनवरी 2017 में मैंने एक गलती की थी जिसकी कीमत मैंने चुकाई है।

मैं शर्मिदा हूं। उनके वकील टॉम ब्रीन ने कहा कि इस जांच को अमेरिका के राष्ट्रपति ने जॉर्ज पापाडोपौलोस से कहीं ज्यादा अवरूद्ध किया है। संघीय न्यायाधीश मॉस ने उनके पछतावे पर विचार करते हुए पापाडोपौलोस को हल्की सजा दी, जिसमें 9500 अमेरिकी डॉलर का जुर्माना, एक वर्ष पेरोल और सामुदायिक सेवा शामिल है।

चीन नेपाल को देगा 4 बंदरगाहों के यूज की इजाजत

China to allow 4 ports to use

काठमांडू। नेपाल ने कहा है कि चीन उसे अपने 4 बंदरगाहों का उपयोग करने की इजाजत देगा। नेपाल के वाणिज्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल चीन के साथ अपना व्यापारिक संपर्क बढ़ाना चाहता है।

मंत्रालय ने बताया कि नेपाल और चीन के अधिकारियों के बीच गुरुवार को यहां हुई बैठक के दौरान चीन के तियांजिन, शेंझन, लियायुंगांग और झांजियांग बंदरगाह का उपयोग नेपाल के करने को लेकर मसविदे को अंतिम रूप दिया गया।

इसके अलावा चीन ने लांझओउ, ल्हासा तथा जिगेटसे माल गोदामों (ड्राई पोट्र्स) का नेपाल के इस्तेमाल के करने पर भी सहमति जताई। एक अधिकारी ने बाताया कि दोनों देशों के बीच मसविदा पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद यह व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी।

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी रवि शंकर ने कहा कि ये एक मील का पत्थर है क्योंकि भारत के 2 बंदरगाहों के अलावा हमें चीन के चार बंदरगाहों का इस्तेमाल करने करने की इजाजत मिलने जा रहा है। उन्होंने बताया कि जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया तथा उत्तरी एशियाई देशों से माल लदे जहाज चीन के रास्ते नेपाल आ सकते हैं । 

जिससे समय और लागत की बचत होगी। अभी तक इन देशों से सामान भारत के पू्र्वी तट कोलकाता के रास्ते नेपाल पहिचता है। भारत ने नेपाल के व्यापार के लिए दक्षिणी तट पर विशाखापटनम को खोल दिया है।

उल्लेखनीय है कि नेपाल अभी तक तेल और अन्य जरूरी सामानों के आयात पर चीन से अधिक भारत पर निर्भर करता है लेकिन नेपाल अब चीन के बंदरगाहों का उपयोग करके भारत पर निर्भरता को कम करना चाहता है। 

क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में खेलना चाहते है रविन्द्र जडेजा

Ravindra Jadeja said just playing Test will be difficult, I want to play in all three formats

लंदन। स्पिनर रविंद्र जडेजा सभी तीनों प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को अच्छी फार्म में रखने के लिए केवल टेस्ट खेलना ही काफी नहीं है। जडेजा ने पांचवें और अंतिम टेस्ट के पहले दिन 57 रन देकर एक विकेट चटकाया और यह उनका सीरीज में पहला मैच था। दिन का खेल खत्म होने के बाद जडेजा ने कहा कि मेरे लिए सबसे बड़ी चीज यही है कि मैं भारत के लिए खेल रहा हूं और अगर किसी दिन मैं अच्छा करता हूं, तो मैं जल्द ही खेल के सभी तीनों प्रारूपों में खेल सकूंगा। लेकिन मेरा लक्ष्य, सिर्फ यही है कि मुझे मौका मिले और मैं इसका फायदा उठाकर अच्छा प्रदर्शन करूं।

उन्होंने कहा कि जब आप सिर्फ एक ही प्रारूप में खेल रहे होते हो तो यह काफी मुश्किल होता है क्योंकि मैचों के बीच में काफी अंतर होता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए आपका अनुभव और लय कम हो जाती है। इसलिए आपको खुद को प्रेरित करते रहना होता है। जब भी आपको मौका मिलता है जैसे मुझे इस मैच में मिला है, तो अपनी काबिलियत के हिसाब से मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। वह भारत के लिए ऑल राउंडर का स्थान सुनिश्चित करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि जब भी मुझे भारत के लिए खेलने का मौका मिलता है तो मुझे बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों पहलूओं में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। मैं टीम का विश्वस्त सदस्य बनना और ऑल राउंडर स्थान को भरना चाहता हूं क्योंकि मैंने बीते समय में भी ऐसा किया है। यह मेरे लिए नया नहीं है।

यह सिर्फ समय की बात है। जडेजा ने कहा कि जब आप खराब दौर से गुजर रहे होते हो तो आपको ज्यादा से ज्यादा खेलने की जरूरत होती है और अपनी फॉर्म हासिल करने की कोशिश करनी पड़ती है। इसलिए यह संभव है कि मैं जितना ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलूंगा, उतना ही बेहतर प्रदर्शन करूंगा और सभी तीनों प्रारूपों में वापसी करने में सक्षम रहूंगा। 

डेल पोत्रो और जोकोविच अमेरिकी ओपन के फाइनल में, नडाल चोट के कारण हटे

Del Potro and Djokovic go to the US Open final

न्यूयार्क। दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी राफ़ेल नडाल के चोटिल हाने के कारण मैच बीच में छोड़ने से अर्जेंटीना के तीसे वरीय जुआन मार्टिन डेल पात्रो अमेरिकी ओपन के फाइनल में पहुंच गए जहां उनका समाना नोवाक जोकोविच से होगा।

नडाल जब इस मैच से हटे उस समय 2009 के चैम्पियन डेल पोत्रो 7-6, 6-2 से आगे थे। फाइनल में उन्हें 2011 और 2015 के चैम्पियन जोकोविच की चुनौती से पार पाना होगा जो आठवीं बार इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे है।

जोकोविच ने जापान के केई निशिकोरी को 6-3, 6-4, 6-2 से शिकस्त देकर अपने 23वें ग्रैंड स्लैम फाइनल में जगह पक्की की। दोनों खिलाड़ियों के बीच हुए मुकाबलों में जोकोविच का पलड़ा भारी रहा है जिन्होंने 14 मुकाबलों में जीत दर्ज की है जबकि डेल पोत्रो चार में ही जीत दर्ज कर सके है।

जोकोविच ने अमेरिकी ओपन में डेल पात्रो को 2007 और 2012 में 2 बार बिना सेट गंवाए हराया है। गत वर्ष  चोट की वजह से टूर्नामेंट से दूर रहने वाले डेल पोत्रो ने कहा कि हम एक दूसरे के खिलाफ ग्रैंड स्लैम फाइनल में कभी नही खेले।

मैं एक खिलाड़ी और व्यक्ति के तौर पर उनका काफी सम्मान करता हूं। वह महान खिलाड़ी है। वह चोटिल होता रहा है लेकिन वह बड़ा खिलाड़ी है। नडाल ने कहा कि मुझे मैच बीच में छोड़कर हटना पसंद नहीं है। जब एक खिलाड़ी खेल रहा हो और दूसरा कोर्ट के बाहर हो तो इसे टेनिस मुकाबला नहीं कहा जा सकता।

नडाल ने इससे पहले बुधवार को लगभग पांच घंटे चले क्वार्टरफाइनल मैच में डोमिनिक थिएम को हराया था। विम्बलडन चैम्पियन जोकोविच ने निशिकोरी के खिलाफ 17 मैचों में 15वीं जीत दर्ज की। अगर वह इस खिताब जीत कर पीट सम्पास की बराबरी करना चाहेंगे।

रुपए में 7 दिन से जारी गिरावट थमी, 26 पैसे बढ़कर 71.73 रुपए प्रति डालर पर पहुंचा

RBI defends rupee 72 mark vs dollar strongly

मुंबई। रुपए में गत लगातार 7 दिन से जारी गिरावट शुक्रवार को थम गई। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जोरदार हस्तक्षेप होने की वजह से शुक्रवार को इसमें 26 पैसे की तेजी आई और यह 71.73 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ। सुबह के कारोबार के दौरान व्यापार संबंधी चिताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से रुपया 72 रुपए के स्तर से भी नीचे 72.04 रुपए तक चला गया था।

हालांकि, बाद में रिजर्व बैंक के जोरदार हस्तक्षेप ने रुपए की गिरावट पर अंकुश लगा दिया और रुपया रिकॉर्ड निम्न स्तर से उबरता नजर आया। सार्वजनिक विचार विमर्श की समयसीमा बीतने के बाद अमेरिका द्बारा चीन से आयात होने वाले सामान पर शुल्क नहीं लगाने और कच्चे तेल की कीमत में स्थिरता से रुपए पर दबाव कम हुआ है।

विगत 7 कारोबारी सत्रों में रुपया 189 पैसे लुढ़का है। 7 दिनों की गिरावट विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार का सबसे बुरा दौर था। सरकारी बैंकों की डॉलर बिकवाली की वजह से  अन्तरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया शुक्रवार को 71.95 रुपए पर ऊंचा खुला जो कल रात 71.99 रुपए पर बंद हुआ था। लेकिन भारी उतार चढ़ाव के बीच रुपया 72 रुपए के स्तर से नीचे 72.04 रुपए तक नीचे चला गया।

रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप के बाद यह गिरावट से उबर गया और बाद में  71.65 रुपए की ऊंचाई छूने के बाद अंत में 26 पैसे अथवा 0.36 प्रतिशत की तेजी के साथ 71.73 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

इस बीच फाइनेंशल बेंचमार्क इंडिया प्रा लि (एफबीआईएल) ने शुक्रवार को डालर रूपये के लिये संदर्भ दर 71.9009 रुपए प्रति डॉलर और यूरो-रुपए के लिये 83.6744 रुपए प्रति यूरो निर्धारित की थी। अन्तरमुद्रा कारोबार में पौंड के मुकाबले रुपए में तेजी आई जबकि यूरो और जापानी येन के मुकाबले रुपए में गिरावट दर्ज हुई।

ओला एक अरब लोगों को दे रही है सेवा, बड़ी संख्या में पैदा कर रही है रोजगार : सीईओ

Ola is giving one billion people services, generating a large number of jobs: CEO

नई दिल्ली।  ओला के सह-संस्थापक और सीईओ भाविश अग्रवाल ने कहा कि कैब सेवा प्रदाता कंपनी सालाना एक अरब से ज्यादा लोगों को सेवाएं दे रही है और अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से रोजगार के लाखों अवसर सृजित कर रही है। अग्रवाल ने कंपनी वर्तमान में भारत, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में उपयोगकर्ताओं को मोबिलिटी समाधान दे रही है। अन्होंने करीब आठ साल पहले ओला की स्थापना की थी। 

अग्रवाल ने वैश्विक मोबिलिटी शिखर सम्मेलन ‘मूव‘ को यहां संबोधित करते हुये कहा हम एक साल में एक अरब से ज्यादा ग्राहकों को सेवा प्रदान करते हैं, ओला के बिना इस काम के लिये 30 लाख अतिरिक्त कारों की जरूरत होगी हमारे पास दस लाख ड्राइवर भागीदार है। इनमें से अधिकांश स्व-नियोजित हैं। 

अमिताभ के साथ काम करना सपना था : आमिर

Amitabh had a dream to work with: Aamir

मुंबई। बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान का का कहना है कि महानायक अमिताभ बच्चन के साथ काम करना उनका सपना और अब वह पूरा हो गया है। आमिर इन दिनों अमिताभ की फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान’ में काम कर रहे हैं। आमिर ने बताया कि उन्हें अमिताभ के साथ ऐसे काम करने के लिए गर्व होता है। उनका कहना है कि अमिताभ के साथ काम करना हमेशा उनका सपना था और इस फिल्म के साथ उनका यह सपना सच हुआ।

आमिर ने बताया कि वह अमिताभ के हमेशा फैन रहे हैं। उन्होंने कहा , रिहर्सल के पहले दिन जब हम साथ बैठ कर शूट की प्रेक्टिस कर रहे थे, वो समय मेरे लिए अछ्वुत था. मैं ठीक से बैठ भी नहीं पा रहा था. मैं ढंग से लाइनें भी नहीं याद रख पा रहा था. मैं इधर से उधर भाग रहा था. मेरे लिए उनके साथ हर एक सीन शूट करना आनंद से भरा था।

फिल्म की तुलना पाइरेस्ट्स  ऑफ द कैरेबियन से किए जाने वाली बात को आमिर ने नकार दिया। आमिर ने बताया कि फिल्म किसी भी दूसरी फिल्म से मिलती-जुलती नहीं है और ये अलग है। हमारी फिल्म का जॉनर भले ही एक्शन और एडवेंचर भरा है लेकिन फिल्म की कहानी एकदम अलग है. फिल्म के किरदार भी एक-दूसरे से काफी भिन्न हैं।

‘प्रिक’ के नाम से जाने जाएंगे प्रियंका चोपड़ा और निक जोनास

Priyanka Chopra and Nick Jonas will be known as 'Prak'

लॉस एंजिलिस। अमेरिकी गायक निक जोनास ने बॉलीवुड अदाकारा प्रियंका चोपड़ा के साथ सगाई पर बातचीत करते हुए अपने सेलिब्रिटी निकनेम ‘प्रिक’ का खुलासा किया। ‘प्रिक’ प्रियंका के नाम के ‘प्रि’ और निक के नाम के ‘क’ से बना है। शुक्रवार को ‘द टुनाइट शो स्टारिंग जिमी फैलन‘ में नजर आए निक जोनस (25) ने बताया कि उन्होंने प्रियंका से अपने प्यार का इजहार करने में जरा भी देरी नहीं की क्योंकि उन्हें पता था कि वह उनके लिए एकदम सही हैं।

फैलन ने जब उनसे पूछा कि क्या उन्होंने खुद के लिये कोई निकनेम सोचा है तो स्टेज के पास खड़ी प्रियंका ने जोर से कहा प्रिक । जोनास ने कहा, ‘‘उन्हें प्रिक पसंद है। मुझे यह उतना पसंद नहीं है। जोनास ने बताया कि अमेरिका में सगाई के बाद मुंबई में भारतीय रीति रिवाज से उनका ‘रोका’ हुआ। 



 
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