एनीमिया मुक्त भारत नाम से राष्ट्रीय अभियान

Samachar Jagat | Monday, 03 Sep 2018 11:09:15 AM
National Campaign by Anemia Free India

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देश की महिलाओं और बच्चों में खतरनाक हद तक बढ़ चुकी रक्ताल्पता (एनीमिया) की स्थिति में सुधार के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय मिशन मोड पर एक कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। एनीमिया मुक्त भारत नाम के इस अभियान को 15 सितंबर से लांच किया जाएगा। इस अभियान के तहत गांव-गांव जाकर 5 वर्ष तक के बच्चों और 15 से 49 आयु वर्ग की महिलाओं की रक्त जांच की जाएगी और एनीमिया पाए जाने पर उन्हें जरूरी उपचार दिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार एनीमिया जैसे मामलों में सबसे बड़ी समस्या ये है कि लोगों को यह मालुम ही नहीं होता कि वह एनीमिक है। 

एनीमिया मुक्त भारत में बच्चों और महिलाओं की स्क्रीनिंग करने का फैसला किया गया है। यहां यह बता दें कि बच्चों के रक्त में प्रति डेसीलीटर 11 ग्राम से कम हेमोग्लोबिन और महिलाओं के रक्त में प्रति डेसीलीटर 12 ग्राम से कम हेमोग्लोबिन होने को एनीमिया कहते हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि रक्त में ऑक्सीजन की कम आपूर्ति से अंदरूनी अंग जैसे किडनी, लीवर आदि को क्षति पहुंच सकती है। लाल रक्त कोशिकाओं की कमी पूरी करने को हृदय ज्यादा काम करता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस अभियान के तहत सभी सात एम्स, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आने वाले राज्यों के स्वास्थ्य विभागों और यूनिसेफ के राज्य ऑफिस के सहयोग से गांव-गांव में शिविर लगाकर महिलाओं और बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। एक रिपोर्ट के अनुसार देश में आयुवर्ग 15 से 49 उम्र की महिलाओं के 53 फीसदी एनीमिक होने और 6 माह से छह साल तक के 58.4 फीसदी बच्चे एनीमिक पाए गए हैं। 

ग्लोबल न्यूट्रीशन रिपोर्ट पर गौर करे तो भारत अफ्रीकी महाद्वीप के इथोपिया जैसे कई देशों से इस मामले में पीछे है। देश की 51 फीसदी 18 से 49 वर्ष उम्र की महिलाओं में खून की कमी पाई गई है। इनके होने वाले बच्चों के भी कमजोर होने का खतरा है। रिपोर्ट के अनुसार प्रसव के दौरान 20 फीसदी जच्चा की मौत की वजह खून की कमी है। इसके अलावा 50 फीसदी अन्य मौतें भी एनीमिया के कारण होने वाली बीमारियों से होती है।

 यानी नहीं कम वजन के बच्चों के जन्म की वजह भी मां का एनीमिया ग्रस्त होना है। खून की कमी की वजह आहार में पौष्टिक तत्वों खासकर आयरन की कमी के कारा होती है। इसके अलावा स्वच्छता की कमी भी एनीमिया की एक बड़ी वजह है। सही समय पर न खाना और सोना भी एक कारण है। यहां यह बता दें कि 1970 में भी एनीमिया से मुक्ति के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल एनीमिया प्रोफ लेक्सिस प्रोग्राम चलाया था।

इसके बाद 1991 में सरकार ने योजना का नाम बदलकर नेशनल न्यूट्रिशनल एनीमिया कंट्रोल प्रोग्राम रखा। गर्भवती और बच्चों की सेहत के लिए पोषाहार की व्यवस्था की गई। उम्मीद है कि अब एनीमिया मुक्त भारत अभियान से बच्चों और महिलाओं में एनीमिया नियंत्रण हो सकेगा।

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