खून का प्रवाह रोक रहा प्लास्टिक

Samachar Jagat | Saturday, 13 Jul 2019 04:18:39 PM
plastic stopping Blood

नैनो प्लास्टिक इंसानी शरीर पर किस तरह बुरा असर डालते हैं, इस पर काफी शोध हुआ है। भारत सहित दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिकों ने इस मामले पर गहन अध्ययन किया है। इसमें यह पाया गया है कि प्लास्टिक के दूसरे किस्म के अत्यंत सुक्ष्म कण मानव शरीर के लिए जानलेवा बनते जा रहे हैं। यह शरीर में जमकर खून के प्रवाह को रोक देते हैं। इस बात का खुलासा तो पहले ही हो चुका है कि खुली आंखों से नजर न आने वाले ऐसे प्लास्टिक के कण भोजन के माध्यम से इंसानी शरीर में प्रवेश करते हैं। वहीं लिपस्टिक, मसकारा, शैम्पू और पानी की बोतलों की वजह से भी यह नैनो प्लास्टिक शरीर के अंदर पहुंच जाता है। इंसान को इस खतरे का पता न होने की वजह से इनका खूब इस्तेमाल होता है। यहां यह बता दें कि हर साल विश्व स्तर पर 400 मिलियन टन से अधिक प्लास्टिक का उत्पादन होता है। यह सौंदर्य प्रसाधन, खाद्य पैकेजिंग, बर्तन आदि उद्योगों में मौजूद रहता है। भारत के वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों ने इसके खतरों का गहन विश्लेषण किया है। 

अध्ययन में यह देखा है कि शरीर के अंदर प्रवेश करने के बाद ऐसे छोटे-छोटे प्लास्टिक के कण क्या कुछ प्रभाव डालते हैं। इसमें पाया गया है कि ऐसे नैनो प्लास्टिक शरीर के अंदर मौजूद खून के प्रोचीन के साथ चिपकते जाते हैं, जिससे शरीर में खून का प्रवाह रूकने लगता है। इसके चलते खून में मौजूद प्रोटीन काम करना बंद कर देते हैं, जैसे-जैसे यह काम धीमा होता जाता है, शरीर के अंदर अन्य बीमारियां पनपने लगती है, क्योंकि आंतरिक अंगों को पर्याप्त मात्रा में साफ खून और उसमें मौजूद प्रोटीन नहीं मिल पाते।

 वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोग में यह भी पाया कि लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं के संपर्क मेें आने के बाद ऐसे नैनो प्लास्टिक एक खासतौर की रासायनिक प्रतिक्रिया पैदा करते हैं। इससे सफेद और लाल दोनों प्रकार की रक्त कोशिकाएं मर जाती है। इनके मर जाने के बाद यह जहर शरीर में आगे बढ़ते हुए अन्य कोशिकाओं को मारता जाता है। शोधकर्ता इस शोध का परिणाम सामने आने के बाद अब नए सिरे से इसके आगे के परीक्षणों की तैयारी में है। जिसमें वे इस किस्म के नैनो प्लास्टिकों की जटिल प्रक्रियाओं के दौरान हरकतों को देखना और उससे शरीर के आंतरिक अंगों में गहराई तक पड़ने वाले प्रभावों को जांचना चाहते हैं।



 

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