खुदरा महंगाई सात महीने के उच्चतम स्तर पर

Samachar Jagat | Saturday, 15 Jun 2019 03:45:01 PM
Retail inflation rises to seven-month high

खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से खुदरा महंगाई मई महीने में बढक़र 3.05 फीसदी पर रही। यह सात महीने का उच्चतम स्तर है। सरकारी आंकड़ों से बुधवार को यह जानकारी हुई। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी संशोधित आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई अप्रैल में 2.99 प्रतिशत रही। पहले प्रारंभिक आंकड़ों में इसके 2.92 फीसदी पर रहने का अनुमान लगाया गया था। मई 2018 में खुदरा महंगाई 4.87 प्रतिशत पर थी। मई में महंगाई का आंकड़ा अक्टूबर 2018 के बाद सबसे ऊंचा है। गत अक्टूबर में खुदरा 3.38 प्रतिशत थी। आवास की खुदरा महंगाई दर 4.82 प्रतिशत रही। आवास के सिर्फ शहरों में आंकड़े जारी किए जाते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कपड़े और जूते-चप्पल आदि पिछले साल मई के मुकाबले 1.80 प्रतिशत तथा ईंधन एवं बिजली 2.48 प्रतिशत महंगे हुए हैं।

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अन्य की श्रेणी में मई में स्वास्थ्य सेवाएं 8.01 प्रतिशत, शिक्षा 6.69 प्रतिशत, मनोरंजन के साधन 5.61 प्रतिशत और घरेलू वस्तुएं तथा सेवाएं 4.59 प्रतिशत महंगी हुई। ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की महंगाई दर 8.52 प्रतिशत और शहरों में 5.41 प्रतिशत रही। ताजा आंकड़ों के मुताबिक खाद्य महंगाई मई में 1.83 प्रतिशत रही। यह अप्रैल के 1.1 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। शहरी क्षेत्र की खाद्य महंगाई 5.87 फीसदी रही, जबकि ग्रामीण इलाकों में खाद्य मुद्रा स्फीति शून्य से 0.22 प्रतिशत नीचे रही। मई में सब्जियों की महंगाई दर 5.46 प्रतिशत रही। शहरी इलाकों में सब्जियों की महंगाई दर 22.98 प्रतिशत रही। ग्रामीण इलाकों में पिछले साल मई की तुलना में सब्जियां 3.49 प्रतिशत सस्ती हुई। अरहर की दाल के खुदरा दाम सौ रुपए के पार पहुंच गए हैं। पिछले दो माह में थोक भाव में आई तेजी से यह उछाल दिखा है।

अगर मानसून सामान्य नहीं रहता है तो दालों खासकर अरहर के दाम फिर आसमान छू सकते हैं। अरहर दाल बाजार और मॉल में 100 से 120 रुपए प्रतिकिलो तक के दाम में बिक रही है। कमोडिटी एजेंसी एनएनएस का कहना है कि पिछले दो माह में थोक दाम में करीब एक हजार रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आई है। लेमन तुअर 5850 रुपए तक और अरहर दड़ा 7300 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। दाल पटका 7600 से 8200 रुपए प्रति क्विंटल तक है। उनका कहना है, मानसून सामान्य रहने की संभावनाओं से पिछले एक हफ्ते में थोक दाम थोड़ा गिरे भी है। लेकिन खुदरा विक्रेताओं ने दाम नहीं घटाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दालों का दाम ऊंचा है। दालों के बड़े उत्पादक देश म्यांमार में भी फसल इस बार आधी रही है। उनका कहना है कि अरहर की नई फसल तो दिसंबर जनवरी तक नहीं आनी है।

ऐसे में तेजी आगे भी कायम रहेगी। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बाजार में गलत समय पर हस्तक्षेप से नुकसान होता है। सरकार ने ऊंचे भाव के दौरान 90 रुपए में बाजार से दाल खरीदी और नेफेड के माध्यम से 30 रुपए में बेच दी। मसूर और चना भी सस्ता बेचा गया। दाम तेजी से नीचे गिरते हैं तो किसानों को नुकसान पहुंचता है। देश के कई शहरों में अरहर के फुटकर दाम 100 रुपए प्रतिकिलो के पार पहुंच गए हैं। पिछले एक माह में 18 रुपए तक दाम बढ़ चुके है। सरकार दालों का आयात 2 लाख टन बढ़ाने का फैसला ले चुकी है। सरकारी गोदामों में दाल का स्टॉक 39 लाख टन है। विशेषज्ञों का कहना है कि दाम जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उनके लिए यह आयात काफी नहीं है। 

मानसून में हो रही देरी से आने वाले दिनों में दाल के दाम और बढ़ते देखे जा सकते हैं। हालांकि सरकार ने आश्वस्त किया है दाम नहीं बढ़ेंगे। जमाखोरों के खिलाफ जल्द ही कार्रवाई शुरू की जाएगी। 2015 के बाद पहली बार दामों में इतनी तेजी देखने को मिल रही है। तब दाम 200 रुपए के पार चले गए थे। मानसून सामान्य नहीं रहा तो लगातार दूसरे साल फसल चक्र प्रभावित होगा और उत्पादन कम होगा और अरहर समेत सभी दालों में तेजी का रुख रहेगा। महाराष्ट्र और कर्नाटक के ज्यादातर इलाके पहले ही जल संकट से जूझ रहे हैं। कीड़े लगने से बड़े इलाके में अरहर की फसल चौपट हो गई। दिसंबर-जनवरी की महाराष्ट्र-कर्नाटक की पैदावार खराब रही। यूपी, बिहार, झारखंड और एमपी मेें भी उत्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।



 

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