भाजपा आरक्षण के नए कानूनों से साधेगी सामाजिक समीकरण

Samachar Jagat | Wednesday, 08 Aug 2018 03:07:52 PM
Simple social equations with new laws of BJP reservation

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनावों से पहले सामाजिक समीकरण साधने के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने पिछड़ा, दलित व मुसलमान कार्ड की काट के लिए नए कानून लेकर आ रही है, ताकि इन वर्गों को सीधा संदेश दिया जा सके। केंद्र सरकार ने लोकसभा में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग को संवैधानिक दर्जा देने वाले विधेयक को लोकसभा में पेश किया था, जिसे पिछले सप्ताह सर्व सम्मति से पारित कर दिया विधेयक के सर्व सम्मति से पारित होने से इसके प्रति सुनिश्चित हुआ जा सकता है कि उसे राज्यसभा में भी विपक्ष का समर्थन मिलेगा।

 राज्यसभा में भी उसे पारित कर इस विधेयक को दिया। संसद में दूसरी बार इसलिए लाना पड़ा क्योंकि पिछली बार राज्यसभाओं में कुछ विपक्षी दलों ने उसके मूल स्वरूप में बदलाव कर दिया था। उम्मीद है कि इस बार ऐसा नहीं होगा और पिछड़ा वर्ग आयोग जल्द ही संवैधानिक दर्जे से लैस हो गया। ठीक वैसे ही जैसे अनुसूचित जाति जनजाति आयोग है। यहां यह बता दें कि अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू हुए 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, तब उससे संबंधित आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का रास्ता साफ हो रहा है। नि:संदेह संवैधानिक दर्जा हासिल करने के बाद पिछड़ा वर्ग आयोग कहीं अधिक सक्षम होगा। इसके अलावा केंद्र सरकार ने एससी-एसटी कानून को फिर से पुराने रूप में लागू करने की तैयारी कर ली है। 

इसके लिए सरकार ने एससी-एसटी एक्ट में बिना जांच एफआईआर दर्ज करने और बिना मंजूरी गिरफ्तारी के प्रावधान को जोड़ने वाला संशोधित विधेयक पिछले सप्ताह लोकसभा में पेश कर दिया। एक्ट में सख्त प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्ते निष्प्रभावी करने के लिए सरकार को संशोधन विधेयक पेश करना पड़ा है। यहां यह बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी वर्ष 20 मार्च को इस कानून के प्रावधानों में कई बदलाव करते हुए ऐसे मामले में आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। उसने गिरफ्तारी से पहले आरोपों की जांच डीएसपी स्तर के पुलिस अधिकारी से कराए जाने की बात कही थी। इसका देश भर में जबर्दस्त विरोध हुआ था। अब सरकार ने दलित उत्पीड़न मामले में एफआईआर दर्ज होने पर आरोपी को सीधे जेल भेजने के बजाए जांच करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने वाला विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया है। सरकार मानसून सत्र में ही इस पर संसद की मुहर लगवा लेने की तैयारी कर ली है।

 विपक्ष के इस मुद्दे पर एनडीए की ओर से केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कमान संभाली थी और जाहिर है कि संसद से कानून का जस का तस रखने का श्रेय भी एनडीए खुद लेने की कोशिश करेगा। अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति को देश भर में यह संदेश देने के लिए कि भाजपा उनकी सच्ची हितैषी है। सामाजिक समीकरण साधने के लिए मोदी सरकार ने लोकसभा चुनावों में इन मुद्दों को भुनाने के लिए जमीन तैयार कर दी है। इसी तरह मुस्लिम समाज में महिलाओं की सहानुभूति और समर्थन हासिल करने के लिए सरकार तीन तलाक विधेयक को भी मानसून सत्र में ही पारित कराने की तैयारी में है। भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के मुद्दे पर भी सक्रिय हो गई है।

 विदेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर विपक्ष के शोर-शराबे को भाजपा राजनीतिक रूप से भुनाएगी, अभी यह मुद्दा असम तक सीमित है, लेकिन संसदीय समिति की रिपोर्ट आने के बाद संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार इस बारे में विधेयक भी लेकर आ सकती है। विपक्ष से विरोध होने पर धु्रवीकरण होने का लाभ राष्ट्रवाद के नाम पर भाजपा ले सकती है। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि विपक्ष जितना शोर करेगा भाजपा उतनी ही मजबूत होगी। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को बिना छुए केंद्र सरकार आर्थिक आधार पर भी आरक्षण दिए जाने पर विचार कर रही है। इसके लिए सरकार सभी जातियों में आर्थिक रूप से कमजोर तबको के आरक्षण पर भी विचार कर रही है। केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री नीतिन गडकरी ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की तरफ इशारा करते हुए कहा है कि एक सोच है जो चाहती है कि नीति निर्माता हर समुदाय के गरीबों पर विचार करे। उन्होंने कहा कि एक सोच कहती है कि गरीब-गरीब होता है। उसकी कोई जाति, पंथ या भाषा नहीं होती। उसका कोई भी धर्म हो, मुस्लिम, हिन्दू या मराठा (जाति) सभी समुदायों में एक घड़ा है।

 जिसके पास पहनने के लिए कपड़ा नहीं है और खाने के लिए भोजन नहीं है। नितिन गडकरी की इस बात में दम है, वे केंद्र वरिष्ठ मंत्री है और संघ के भी नजदीकी है। सूत्रों के मुताबिक यह विचार अभी प्रारंभिक स्तर पर है, लेकिन बातचीत में प्रमुख मुद्दा यह है कि कैसे वर्तमान आरक्षित जातियों को बिना छुए आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाए। इसका मतलब है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के अलावा पिछड़े तबके को संविधान में मिले आरक्षण को बिना छेड़े आर्थिक आधार पर सभी जातियों के लिए आरक्षण देने पर केंद्र सरकार विचार कर रही है। 

आजादी के 70 सालों में जाति के आधार पर आरक्षण का लाभ लेने वाले लगातार फायदा उठाते गए, जबकि सवर्ण जातियों के लोग प्रतिभा सम्पन्न होने पर भी किसी तरह के लाभ से वंचित रहे। लोकसभा में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने वाला विधेयक पारित हो गया है लेकिन यह कह पाना मुश्किल होगा कि उम्र तरीके से आंदोलन कर रहा मराठा समूह पात्रता की श्रेणी में नहीं आता। ऐसी ही स्थिति अन्य जातियों की भी है। संसद में आरक्षण की सीमा बढ़ाने की मांग की गई। आरक्षण का विरोध करने वाली जातियां अब आरक्षण की मांग करने लगी है। ऐसे में लगता है कि आर्थिक दृष्टि से कमजोर तबके को आरक्षण देने के लिए सरकार आरक्षण की सीमा बढ़ाने का भी विधेयक संसद में आ सकता है।

केंद्र सरकार एससी-एसटी समुदाया के लोगों को प्रमोशन में भी आरक्षण की हिमायत करते हुए समाज में बराबरी के लिए जरूरी बताते हुए जबर्दस्त वकालत की। अटार्नी जनरल ने कहा कि एससी-एसटी समुदाय के लोग हजारों साल से संघर्ष कर रहे हैं और उन पर आज भी अत्याचार जारी है। कुल मिलाकर भाजपा लोकसभा चुनाव में इन नए कानूनों से सामाजिक समीकरण साधेगी।
 



 

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