कर्मठता बुलंदियों की ओर ले जाती है

Samachar Jagat | Friday, 07 Sep 2018 12:51:43 PM
Strength leads to bulwarks

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कर्मठता को गले लगाएं
मन को भी बलवान बनाएं
चट्टानों को काट विश्वास से
शंकाओं के महल गिराएं

 यदि किसी व्यक्ति ने धनवान होने का रहस्य जान लिया और उसकी समझ में आ गया कि मैं सब कुछ कर सकता हूं, मेरे लिए कुछ भी असंभव नहीं है क्योंकि मैं कर्मवीर हूं और अपने कर्म के प्रति कर्मठ हूं, मैं सब कुछ छोड़ सकता हूं लेकिन कर्म करना नहीं छोड़ सकता, कर्म के प्रति निष्ठा ही मेरा जीवन है। ऐसा व्यक्ति कैसे रूक सकता है आगे बढ़ने से ऐसे व्यक्ति को कौन रोकेगा आगे बढ़ने से। जब व्यक्ति ऐसा सोचता है तो उसकी सारी आंतरिक शक्तियां जाग्रत हो जाती है, कुछ विशेष करने के लिए मचलने लगती है, हूंकार भरने लगती है, आसमां को छूने लगती है, मुश्किलें दुम दबाकर भागने लगती है सारी सृष्टि आपके साथ हो जाती है और कठिनाइयों की जगह खुशियों की बहार आने लगती है। और जब कर्म के प्रति निष्ठा से इतनी खुशियां आने लगती है तो जीवन को सार्थक बनाने का इससे बढक़र कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

 जिसने भी कर्म के प्रति अपनी जबरदस्त निष्ठा रखी वही इंसान हुआ, महान हुआ या यौं कहे कि वह सम्पूर्ण जहान हुआ। देखिए कुछ महान हस्तियां- अलेक्जेंडर ग्रह्म बैल हजार बार मुश्किलों को परास्त किया। आर्यभट्ट ने पाई का अनुमानित मान 62832/20000-3.14161 देकर ‘साइन की सूची’ प्रस्तुत करने वाले पहले गणितज्ञ बने केवल और केवल अपने कर्म के प्रति निष्ठा की पराकाष्ठा के कारण। ओपरा बिनफे्र अपने माता-पिता के अलगाव व रिश्तेदारों द्वारा मुश्किलें खड़ी करने के बावजूद आज टीवी प्रस्तोत नंबर बन है और धनवान लोगों की सूची में हर वर्ष अपने नाम को स्वर्णाक्षरों में लिखवाती है। एंड्रयू कारनेगी एक जुलाहे के पुत्र थे, प्रारंभ में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा, छोटी-मोटी नौकरी की, व्यवसाय किया लेकिन उनकी निष्ठा ने स्टील का शहंशाह बना दिया। 

कल्पना चावला ने अपन कर्म के प्रति जुनून, जोश और समर्पण की भावना से सोलह दिवसीय अंतरिक्ष अभियान में 80 सफल परीक्षण व प्रयोग किए और वे कर्म करते-करते अंतरिक्ष में ही लीन हो गई, लेकिन वे हमेशा युवाओं को प्रेरित करती रहेंगी। चन्द्रशेखर वेंकट रमन भारत के महान वैज्ञानिकों में से एक हैं, उन्होंने अनेक मुश्किल हालातों को परास्त कर ‘रमन प्रभाव’ के लिए जाने गए तथा 1930 में भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए गए, लेकिन उन्होंने कभी भी कर्मठता से समझौता नहीं किया। टाइगर बुड्स एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने 1991, 1992, 1993 में जुनियर एमच्योर तथा 1994 1995 व 1996 में एमच्योर खिताब जीतकर लोगों के दिलों को भी जीत लिया केवल कर्म के प्रति निष्ठा की पराकाष्ठा के कारण।

प्रेरणा बिन्दु:- 
कर्म के प्रति निष्ठा जब जुनून का रूप ले लेती है तो हर पल नए आयाम स्थापित होते चले जाते हैं।
 

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