उत्तर भारत में इस बार भी देर तक रहेगा मानसून

Samachar Jagat | Monday, 10 Sep 2018 01:39:58 PM
This time in north India the monsoon will also remain late

जलवायु परिवर्तन से मानसून की चाल-ढ़ाल पूरी तरह से बिगड़ रही है। उत्तर-पश्चिम राज्यों में मानसून की सक्रियता में बदलाव आ रहा है। इस बार भी उत्तर भारत में मानसून के देरी तक रहने का अनुमान है। इससे आने वाले समय में मानसून के चक्र में बड़े बदलाव दिख सकते हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक से उत्तर भारत में मानसून के छंटने में देरी हो रही है। यह सितंबर के अंत में जा रहा है। जबकि 2009 में यह अक्टूबर के पहले सप्ताह तक टिक गया था। मानसून की इस सक्रियता से सीधे अभी कोई बड़ा नुकसान सामने नहीं है। 

लेकिन यह मानसून स्थापित पैटर्न में बदलाव से उत्तर-पश्चिम भारत की कृषि, जलवायु एवं पारिस्थितिकी पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। फसल चक्र में भी बदलाव आ सकता है। केरल में मानसून सबसे पहले आता है और आखिरी में जाता है। वहां मानसून करीब चार महीने सक्रिय रहता है। लेकिन उत्तर-पश्चिमी राज्यों जिनमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पहाड़ी राज्य है, वहां मानसून जून के मध्य में दस्तक देता है और जुलाई-अगस्त में पूर्ण रूप से सक्रिय रहता है। इसके बाद पहली सितंबर से राजस्थान से यह छंटना शुरू हो जाता है।

मध्य सितंबर तक पूरे उत्तर भारत मानसून विदा ले लेता है। इस प्रकार उत्तर भारत में मानसून सिर्फ तीन महीने सक्रिय रहता है। उत्तर भारत में मानसून के देर तक टिकने को लेकर इधर कुछ शोध पत्र की आए हैं। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आर पटनायक, सीएस तोमर एवं एससी मान के एक शोध पत्र के अनुसार 2010 में मानसून के देरी से छंटने की वजह प्रशांत महासागर में लॉ नीना बनना था। इसके चलते उत्तर भारत में असामान्य चक्रवती घटनाएं तथा हवाओं के पैटर्न में बदलाव दिखे हैं। मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. केजे रमेश के अनुसार इस बार भी मानसून के देर तक ही सक्रिय रहने की संभावना है। लेकिन इसका कोई ठोस कारण अभी बता पाना मुश्किल है। 

उन्होंने कहा कि उत्तर-पश्चिमी राज्यों में अपेक्षाकृत कम बारिश होती है, इसलिए यदि कुछ सप्ताह देरी तक मानसून सक्रिय रहेगा तो यह कृषि कार्यों, भूजल और जलाशयों के लए फायदेमंद रहेगा। मौसम विभाग ने मौजूदा स्थिति के मद्देनजर सितंबर में 15 दिन तक मानसून के सक्रिय रहने और इस दौरान सामान्य से तेज बारिश का दौर चलने का अनुमान जताया है। चार महीने के मानसून के दौर ने तीन महीने का सफर पूरा कर लिया है।
 
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक मानसून का अभी तक का प्रदर्शन (1 जून से 1 सितंबर) देश के 8 राज्यों को छोडक़र अन्य राज्यों में सामान्य रहा है और पूरे देश मेें सामान्य से मात्र 6 फीसदी कम बारिश हुई है। 

केरल के मामले में मौसम विभाग ने कहा है कि उसने सभी जरूरी मौसम चेतावनी तिरूवनंतपुरम के कार्यालय के माध्यम से जारी की थी। विभाग के मुताबिक बारिश की कमी वाले राज्यों में हरियाणा, पश्चिम बंगाल और झारखंड के अलावा पूर्वोत्तर के चार राज्य शामिल है, जबकि सिर्फ एक राज्य केरल में सामान्य से अधिक बारिश हुई हैं। वहीं एक जून से एक सितंबर तक पूरे देश में सामान्य से महज 6 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। विभाग ने इस अवधि के दौरान देश में बारिश का सामान्य स्तर 721.1 मिलीमीटर रहने का अनुमान व्यस्त किया था, जबकि वास्तव में अभी तक 676.6 मिमी बारिश हुई है। 

विभाग के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा, झारखंड, लक्षदीप और पश्चिम बंगाल के अलावा पूर्वोत्तर राज्य मेघालय, असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में सामन्य से काफी कम बारिश हुई। दक्षिण पश्चिम मानसून की मासिक रिपोर्ट के अनुसार एक जून से एक सितंबर तक तीन महीने की अवधि में केरल में सर्वाधिक 2431 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य स्तर 1804.06 मिमी से 35 फीसदी अधिक रही। वहीं 27 राज्यों में इस अवधि में सामान्य बारिश दर्ज की गई। इनमें ओडीशा में सामान्य से 12 फीसदी, सिक्किम में 11, तेलंगाना में 10, जम्मू-कश्मीर में 8, मिजोरम में 7, महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ में 3 और कर्नाटक में 2 फीसदी अधिक बारिश हुई। उत्तरी एवं मैदानी राज्यों में हरियाणा को छोडक़र उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब सहित अन्य सभी राज्यों में बारिश का स्तर सामान्य श्रेणी में दर्ज किया गया। अधिक बारिश के लिए मेघालय जिसे बादलों का घर कहा जाता है और चेरापूंजी जहां विश्व में सर्वाधिक बारिश 500 इंच से भी अधिक का रिकार्ड रहा है और मणिपुर में इस साल आश्चर्यजनक रूप से अब तक सबसे कम बारिश दर्ज हुई है।

 मणिपुर में सामान्य से 53 फीसदी और मेघालय में 42 फीसदी कम बारिश हुई। जबकि लक्षदीप में सामान्य से 43 फीसदी, अरुणाचल में 35 फीसदी, हरियाणा में 25 फीसदी, झारखंड और असम में 23 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 20 फीसदी कम बारिश हुई।  मौसम विभाग के एक विश्लेषण में मानसून की एक चिंताजनक प्रवृति सामने आई है कि पिछले तीन दशकों का औसत देखें तो पूरे मानसून में ज्यादातर बारिश (95 फीसदी) कुछ दिनों या कुछ हफ्तों के दौरान हुई, जिससे भारी जल जमाव, बाढ़ और मुंबई व केरल जैसी तबाही का सामना करना पड़ा। 

आंकड़ों के मुताबिक देश के 22 घनी आबादी वाले शहरों में 95 फीसदी बारिश तीन दिनों से लेकर औसतन 27 दिनों के बीच हुई है। यही हाल अहमदाबाद , जयपुर, बंगलुरु, लखनऊ जैसे शहरों का रहा है। इसी तरह अहमदाबाद की 66.3 मिमी औसत मानसून बरसात की आधाी 46 घंटे में और 95 फीसदी 143 घंटे में हो जाती है। मौटे तौर पर औसतन छह दिन में। देश के पश्चिमी शहरों जयपुर और अजमेर मेें मानसून की 95 फीसदी बारिश 90 घंटे में हो जाती है।

बंगलुरु और लखनऊ में मानसून की कुल बारिश का 95 फीसदी सिर्फ 5 दिन में बरस जाता है। आंकड़ों से साफ है कि 22 में से 12 शहरों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के कुल घंटों में गिरावट आई है। ये आंकड़े 1969 से वर्ष 2000 के बीच के हैं। मौसम विभाग की तरफ से शोध करने वाले एक मौसम विज्ञानी का कहना है कि ये विश्लेषण अहम है। यह शहरों और उनके योजनाकारों के लिए खास अहमियत रखता है।
 



 

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