बिना सैलरी स्लिप मिलेगा ₹10,000 तक का लोन: नई सरकारी योजना से गिग वर्कर्स को बड़ी राहत

epaper | Monday, 19 Jan 2026 05:47:20 PM
Get a loan of up to ₹10,000 without a salary slip: New government scheme offers significant relief to gig workers.

केंद्र सरकार लगातार ऐसी योजनाएं लाने पर काम कर रही है, जिनका सीधा लाभ आम लोगों और खासतौर पर असंगठित क्षेत्र से जुड़े कामगारों को मिल सके। इसी दिशा में एक नई माइक्रो-क्रेडिट योजना पर काम किया जा रहा है, जिसके तहत गिग वर्कर्स और शहरी असंगठित मजदूरों को बिना सैलरी स्लिप और बिना किसी गारंटी के ₹10,000 तक का लोन मिल सकेगा। यह योजना उन लाखों लोगों के लिए राहत लेकर आएगी, जो अब तक औपचारिक आय प्रमाण या बैंकिंग इतिहास न होने की वजह से कर्ज से वंचित रह जाते थे।

अप्रैल 2026 से लागू हो सकती है नई योजना

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्तावित योजना की रूपरेखा तैयार कर ली गई है और इसे अप्रैल 2026 से लागू किया जा सकता है। इसका उद्देश्य उन कामगारों को वित्तीय सहारा देना है, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए रोज़गार कर रहे हैं। इसमें डिलीवरी पार्टनर्स, घरेलू सहायक, दिहाड़ी मजदूर और शहरी असंगठित क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल होंगे।

इस लोन राशि का इस्तेमाल कामगार अपने रोज़मर्रा के काम से जुड़े जरूरी संसाधन खरीदने में कर सकेंगे। उदाहरण के तौर पर, डिलीवरी पार्टनर्स बाइक, साइकिल या स्मार्टफोन खरीद सकते हैं, जिससे उनकी आय क्षमता और काम की स्थिरता दोनों बेहतर हो सकेगी।

पीएम स्वनिधि मॉडल पर आधारित हो सकती है स्कीम

बताया जा रहा है कि यह नई योजना काफी हद तक पीएम स्वनिधि (PM-SVANidhi) योजना के मॉडल पर आधारित होगी। पीएम स्वनिधि के तहत पहले चरण में रेहड़ी-पटरी वालों को ₹10,000 का लोन दिया जाता है। समय पर भुगतान करने पर लोन सीमा बढ़ाकर ₹20,000 और फिर ₹50,000 तक की जा सकती है। इसके साथ ही डिजिटल लेनदेन पर प्रोत्साहन और ब्याज सब्सिडी जैसे लाभ भी मिलते हैं।

गिग वर्कर्स और असंगठित मजदूरों के लिए प्रस्तावित इस नई योजना में भी इसी तरह का चरणबद्ध मॉडल अपनाया जा सकता है, जिससे समय पर भुगतान करने वाले लाभार्थियों को आगे चलकर अधिक वित्तीय सहायता मिल सके।

कौन ले सकता है इस योजना का लाभ?

इस योजना का लाभ मुख्य रूप से उन गिग वर्कर्स और असंगठित श्रमिकों को मिलेगा, जो सरकारी पोर्टल पर पंजीकृत हैं।

  • ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत डिलीवरी पार्टनर्स

  • घरेलू कामगार

  • शहरी असंगठित मजदूर

जिन कामगारों के पास आधार कार्ड, यूएएन (UAN) और अन्य वैध दस्तावेज हैं तथा जिनका रिकॉर्ड सत्यापित है, उन्हें प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है।

बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने की बड़ी पहल

सरकार का मानना है कि आय प्रमाण और क्रेडिट हिस्ट्री की कमी के कारण असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगार बैंकिंग सुविधाओं से बाहर रह जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 तक ई-श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से अधिक श्रमिक पंजीकृत हो चुके हैं।

यह प्रस्तावित योजना न केवल इन कामगारों को तत्काल आर्थिक सहायता देगी, बल्कि उन्हें धीरे-धीरे औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगी। इससे भविष्य में इन्हें बड़े लोन और अन्य वित्तीय सेवाएं हासिल करना आसान होगा।

बिना सैलरी स्लिप और गारंटी के ₹10,000 तक का लोन देने की यह योजना गिग वर्कर्स और असंगठित मजदूरों के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। यदि इसे पीएम स्वनिधि की तर्ज पर लागू किया गया, तो यह न सिर्फ आर्थिक मदद देगी, बल्कि आत्मनिर्भरता और वित्तीय समावेशन को भी मजबूती देगी।




 


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