Gurdeep Singh : सिगापुर की अदालत ने भारतीय मूल के व्यक्ति की फांसी की सजा पर लगाई रोक

Samachar Jagat | Friday, 29 Apr 2022 10:23:48 AM
Gurdeep Singh : Singapore court stayed the death sentence of a person of Indian origin

सिगापुर |  सिगापुर की एक अदालत ने मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में दोषी ठहराए गए भारतीय मूल के एक व्यक्ति की फांसी की सजा पर रोक लगा दी है। अदालत ने बृहस्पतिवार को यह आदेश सुनाया। इससे एक दिन पहले ही भारतीय मूल के एक मलेशियाई व्यक्ति को मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में फांसी की सजा दी गई थी। 'द स्ट्रेट्स टाइम्स’ की खबर के अनुसार, दाचिनामूर्ति कतैया (36) को शुक्रवार को फांसी की सजा दी जानी थी।

कतैया और 12 अन्य मौत की सजा के दोषियों ने अटॉर्नी जनरल के चैंबर्स (एजीसी) के खिलाफ एक दीवानी आवेदन दायर किया था और अपने निजी पत्रों के प्रकटीकरण के खिलाफ हर्ज़ाने की मांग की थी। दचिनामूर्ति ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष खुद रखा।खबर के अनुसार, मामले पर सुनवाई 20 मई को की जाएगी। न्यायमूर्ति एंड्रयू फांग, न्यायमूर्ति जूडिथ प्रकाश और न्यायमूर्ति बेलिडा एंग अगली तारीख पर विस्तृत आदेश जारी करेंगे। दाचिनामूर्ति कतैया को अप्रैल 2015 में दोषी ठहराया गया था और मौत की सजा सुनाई गई थी। फैसले के खिलाफ दायर उसकी याचिका को फरवरी 2016 में रद्द कर दिया गया था।

जनवरी 2020 में, दाचिनामूर्ति और उसके साथी कैदी गोबी एवेडियन ने न्यायिक प्रक्रिया में ''गैरकानूनी’’ तरीकों का इस्तेमाल करने के आरोपों की जांच पूरी होने तक उनकी फांसी की सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। दाचिनामूर्ति ने अप्रैल 2020 में अदालत से कहा था कि उसके और गोबी के कुछ निजी पत्रों की ''अवैध रूप से प्रति बनाई गई और जेल द्बारा उसे एजीसी को दिया गया।’’ 'कोर्ट ऑफ अपील’ ने अगस्त 2020 में दोनों की अपील खारिज कर दी थी। जून 2021 में कतैया और 12 कैदियों ने एजीसी के खिलाफ एक दीवानी मामला दायर किया।

'द स्ट्रेट्स टाइम्स’ की खबर के अनुसार, वे चाहते थे कि अदालत यह घोषित करे कि एजीसी और सिगापुर जेल सेवा ने गैरकानूनी तरीके से काम किया।  तीन महीने बाद इस आवेदन को वापस ले लिया गया था और कैदियों के तत्कालीन वकील एम रवि को इसकी सुनवाई के दौरान आए कानूनी खर्च के रूप में  10,000 सिगापुरी डॉलर देने का निर्देश दिया गया था। फरवरी 2022 में 13 कैदियों ने नई अपील दाखिल की, जिस पर अभी तक फैसला नहीं किया गया है। 



 

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