ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2020 की शुरुआत साहित्य की विविध आवाजों को एक मंच प्रदान करने से हुई

Samachar Jagat | Friday, 24 Jan 2020 03:45:58 PM
Zee Jaipur Literature Festival 2020 begins with providing a platform to the diverse voices of literature

जयपुर, 24 जनवरी।जनवरी की एक सर्द सुबह, ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 13वें संस्करण की शुरुआत पूरे उल्लास और उमंग के साथ हुई| श्रोताओं ने जल्दी सुबह पहुंचकर ही डिग्गी पैलेस होटल के नेक्सा फ्रंट लॉन की सीटें घेर ली थीं| ढाक और नागाड़ें की थाप से सजा फ्रंट लॉन पूरी तरह से अपने मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार था| मेहमानों का स्वागत विशालकाय कठपुतलियों ने अपने ख़ास अंदाज में किया| जाने-माने कठपुतलीकार, दादीपुदुमजी ने ‘इमेजेस ऑफ़ ट्रुथ’ के माध्यम से गांधी के सन्देश को प्रसारित किया| मुंबई की शास्त्रीय गायिका, निराली कार्तिक ने राग गुर्जरी तोड़ी के जरिये मंच पर आग लगा दी| आपने दो बंदिशों ‘मेरी अंखिया लागे’ और ‘भोर भयी’ के बाद राग भैरव में, पंडित जसराज जी का मास्टरपीस ‘मेरो अल्लाह मेहरबां’ से समां बाँध दिया|

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संगीत ने फेस्टिवल के 13वें संस्करण के उद्घाटन सत्र की ज़मीन तैयार की और फिर माननीय मुख्यमंत्री, उद्घाटन संभाषण वक्ता मार्कस दू सौतोय और शुभा मुद्गल और फेस्टिवल डायरेक्टर नमिता गोखले और विलियम डेलरिम्पल ने फेस्टिवल के सन्देश को श्रोताओं तक पहुँचाया|

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मुहूर्त के समय, राजस्थान के मुख्यमंत्री, श्री अशोक गहलोत जी ने कहा, “जब फेस्टिवल की शुरुआत हुई तो मैं ही मुख्यमंत्री था, तो मैंने इसे शुरुआत से देखा है| नमिता गोखले, संजॉय के. रॉय और विलियम डेलरिम्पल ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के माध्यम से विश्व में जयपुर की जगह बनाई|”

अपने स्वागत संभाषण में, फेस्टिवल के प्रोडूसर और टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर, संजॉय के.रॉय ने साहित्य की ताकत पर बल दिया, जो किसी भी विषमता से लड़ सकती है| और ऐसा करना हम सबकी जिम्मेदारी है, उन्होंने आगे कहा, “हम सब को एक-दूसरे के लिए प्यार और सम्मान की भाषा में ही बात करनी चाहिए| हालाँकि पूरे देश और दुनिया में अलग-अलग पहचान की ऊंची दीवारें उठ रही हैं, लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि अंत में हम सब मनुष्य हैं, इस धरती पर मनुष्यता के स्रोत| कला, साहित्य, संगीत, थियेटर और नृत्य के माध्यम से हम ‘परायेपन’ का भेद मिटाकर एक सही समझ पैदा कर सकते हैं|”

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श्रोताओं का स्वागत करते हुए, फेस्टिवल के सह-निदेशक विलियम डेल रिम्पल ने कहा, “इसदेशमें इतने भव्य तरीके सेसाहित्य का जश्न क्यों मनाया जा रहा है? इसके लिए मेरा मानना हैकि इस देश में मौखिकसाहित्यकेउत्सव की प्राचीन परम्परा है, और ये उत्साह भी उसी के देन है| लेखनकेआविष्कारसेपहले, वेदोंकेसमयसे, कविताऔरधार्मिकग्रंथ‘गुरुसेचेला’को दिए गए थे, लोगोंनेमौखिकरूपसेसीखा। इसीलिए साहित्य उत्सव को एक विदेशी विचार नहीं माना जा सकता| यहाँ पर इसकी जड़ें ज्यादा गहरी हैं| भारत में साहित्य से प्यार किया जाता है|”

फेस्टिवल की सह-निदेशक नमिता गोखले ने कहा, “हम उथल-पुथल भरे समाज में जी रहे हैं| राजनीति के ध्रुवीकरण की वजह से हमारा ध्यान क्लाइमेट इमरजेंसी जैसे जरूरी मुद्दों से हटा है| ऐसे समय में जब हर कोई अपने अहंकार के महल में रह रहा है, तब हम विचारों के माध्यम से इस बदलती दुनिया की थाह ले सकते हैं| अपने सह-निदेशक विलियम डेलरिम्पल के साथ मिलकर मैंने ऐसा प्रोग्राम तैयार किया है, जो विविध विषयों को इस फेस्टिवल के दौरान उठाएगा|”

 उद्घाटन संभाषण देते हुए, प्रसिद्ध लेखक मार्कस दू सौतोय ने कहा, “जेएलएफ के 13वें संस्करण का स्वागत करते हुए, मैं श्रीनिवास रामानुजन की अंकों के बारे में कही बात याद करता हूं: गणित की कहानी में प्रत्येक अंक का अपना महत्व है| मेरे लिए वो तेरह है; तेरह एक प्राइम नम्बर है, एक अविभाज्य अंक, और जेएलएफ यकीनन एक प्राइम फेस्टिवल है|”

अपने वक्तव्य में लोकप्रिय हिंदुस्तानी गायिका शुभा मुद्गल ने कहा, “कला में पदानुक्रम की कोई जगह नहीं होनी चाहिए| जब तक कला अपनी पूरी समृद्धता और विविधता के साथ मौजूद है, तब तक हम बेहतर भविष्य के सपने देख सकते हैं|” 

 

उद्घाटनकेबादकासत्रहमें 1940 केदशककेन्यूयॉर्कशहरमेंरंगमंचकीदुनियामेंलेगया, जोशो-गर्ल, प्लेबॉय, अभिनेत्रियोंऔरनर्तकियोंकीकहानीथी। एलिजाबेथ गिल्बर्ट का नया उपन्यास, सिटी ऑफ़ गर्ल्स, महत्वाकांक्षी युवा महिलाओं पर आधारित है, जो अपनी सेक्सुअल लापरवाही के चलते गहन परिणाम का सामना करती हैं| अनेकों प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और अख़बारों ने इस उपन्यास को सराहा| एलिज़ाबेथ ने अपनी किताबों के साथ, अपनी निजी जिन्दगी के भी कुछ दिलचस्प किस्से श्रोताओं से साझा किये|

 

फेस्टिवल के पहले दिन का फोकस महिलाओं के अधिकार, सामाजिक स्टीरियोटाइप से आज़ादी वाले सत्रों के नाम रहा| फ्रेंको-मोरक्को उपन्यासकार, लीला स्लीमानी ने कहा कि कुछ महिलाएं केवल वस्तु बनना चाहती हैं! उनके उपन्यास की नायिका ‘एडेल बस एक गुड़िया बनना चाहती है| एडेल को सेक्स की लत है और उसके डॉक्टर पति को लगता है कि उसकी बीमारी का इलाज किया जा सकता है|

 

अंग्रेजी के सबसे ज्यादा बिकने वाले लेखक, अश्विन सांघी की किताब वॉल्ट ऑफ़ विष्णु का लोकार्पण ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2020 में सोनाली बेंद्रे ने किया| मिथक और इतिहास से जूझती ये किताब अश्विन की भारत श्रृंखला की छठी किताब है|

 

ब्रेक्सिट सही या नहीं? इसमहत्वपूर्णसवाल ने,जोयूरोपकेइतिहासकोबदलसकताहै, वर्तमानमेंब्रिटेनकीअर्थव्यवस्थाकोजकड़ रखाहै। ब्रेक्सिट के बारे में राजनीतिक चुप्पी से भिन्न, पुरस्कृत आयरिश पत्रकार, फिंटन ओ’टूल ने इस पर रोचक अंदाज में खुलकर अपनी बात रखी| जानी-मानी पत्रकार सुहासिनी हैदर के साथ की गई खुलकर बातचीत में फिंटन ने ब्रेक्सिट का ऐतिहासिक नजरिये से अवलोकन किया| सुहासिनी के सवाल “यूके ने क्या सोचकर खुद को अलग कर लिया?” के जवाब में फिंटन ने उन हालातों के बारे में बताते हुए कहा, “ब्रेक्सिट एक काल्पनिक शोषण के खिलाफ किया गया विद्रोह है, और जिससे काल्पनिक आज़ादी भी मिल गई|”

 

जयपुर बुकमार्क के सत्र “फ़ूड फॉर थॉट: गैसट्रोनोमी एंड लिटरेचर” में जानी-मानी फ़ूड व ट्रेवल लेखिका मधुर जाफरी ने कहा, “करी जैसी कुछ चीज ही नहीं – अगर आप इस शब्द का इस्तेमाल करेंगे, तो किसी भारतीय को नहीं पता चलेगा कि आप किस चीज के बारे में बात कर रहे हैं|” इस शब्द ने हमारे खाने की विविध पहचान को ख़त्म कर दिया है| उन्होंने बताया कि तीस सालों तक वो इससे लड़ती रहीं, लेकिन प्रकाशक करी के बारे में किताब चाहते थे, तो अंत में उन्होंने हार मान ली|

 

जयपुर बुकमार्क के अन्य सत्र में, पब्लिक लाइब्रेरियन ऐस्पन वॉकर बोल्डर कोलोराडो लाइब्रेरी के अपने काम का संदर्भ देते हुए बताया कि एकलाइब्रेरी को क्या करना चाहिए| बोल्डर कोलोराडो लाइब्रेरी सिर्फ किताबों का संग्रह ही नहीं करती, बल्कि प्रदर्शनी, सांस्कृतिक गतिविधियां और सामाजिक संवाद भी करती हैं| उन्होंने लाइब्रेरी साइंस के एक्सपर्ट एस.आर. रंगनाथन का उद्धरण दिया, “लाइब्रेरी विकसित होते संगठन हैं”|

 

प्रतिष्ठित “महाकवि कन्हैयालाल सेठिया अवार्ड” के पांचवें संस्करण में जाने-माने कवि, अनुवादक और लेखक अरविन्द कृष्ण मेहरोत्रा को सम्मानित किया गया| आदरणीय उपमुख्यमंत्री, श्री सचिन पायलट ने मेहरोत्रा को पुरस्कार से सम्मानित किया| यह सेठजी का जन्मशताब्दी वर्ष है|

 

सत्र “दार्जलिंग एक्सप्रेस: ऑफ़ फ़ूड एंड फ्रेंडशिप” में विख्यात शेफ ने कहा, “कूकिंग को पारंपरिक रूप से काम आँका गया, और महिलाओं ने भी इसे छोटा काम माना|”

 

श्रोताओं के सामने कुछ दिल को छू लेने वाली पंक्तियाँ भी साझा की गई| अमेरिकी कवयित्री एनी फिंच ने कहा, “मेरे लिए, कविता साक्षात् ख़ुशी है, ये जरूरी आवश्यकता है| आज के कवि जटिल ढांचे को छोड़कर, जटिल अर्थों को अपनाते हैं|” हिंदी कवि अशोक वाजपेयी ने कहा कि “कविता ख़ुशी और निर्देश दोनों होने चाहियें| कम शब्दों में ज्यादा की बयानगी होनी चाहिए|”

 

मंटो को समर्पित सत्र में नंदिता दास ने कावेरी बम्जई से बात की| मंटो एंड आई किताब में नंदिता ने मंटो पर बनी फिल्म और मंटो का अपने जीवन पर पड़े प्रभाव के बारे में लिखा है|

 

आगा खान द्वारा प्रस्तुत सत्र “द न्यू सिल्क रोड: द प्रेजेंट एंड फ्यूचर ऑफ़ द वर्ल्ड” में, लेखक पीटर फ्रैंकोपण ने सिल्क रोड पर यूरोपियन मानसिकता के बारे में बताया| चीनी नजरिये से सिल्क रोड आधुनिकता ही नहीं उस पुराने ज़माने के भी बात करता है, जब टैंग और सुंग साम्राज्य थे, और चीन अपने पश्चिमी पड़ोसियों से अधिक जुड़ा था|

फेस्टिवल के पहले दिन की समाप्ति पर रोमां रोलां बुक प्राइज की घोषणा हुई, ये पुरस्कार फ्रेंच भाषा के भारतीय अनुवाद, जिसमें अंग्रेजी भी शामिल है, को दिया जाता है| श्री इम्मानुएल लेनन ने कहा, ‘रोमां रोलां प्राइज क्व पिछले तीन सालों में हमें बहुत से प्रतिभाशाली अनुवादकों का काम देखने का मौका मिला| इस साल, हमें 7 प्रविष्टियाँ मिलीं, जिनमें फिक्शन के साथ एक कॉमिक श्रृंखला भी थी| इंडो-फ्रेंच ज्यूरी द्वारा शोर्टलिस्ट किये गए 4 अनुवादों में से हम दीपा चौधरी और पुनीत गुप्ता द्वारा किये गए एस्ट्रिक्स के अनुवाद को ये सम्मान देते हैं| एस्ट्रिक्स को अनुवाद करना आसान नहीं है| अनुवादक ने वास्तव में श्रेष्ठ कार्य किया है|’



 

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