यस बैंक में भगवान का खाता, खाते में 545 करोड़ रुपए पर संकट

Samachar Jagat | Monday, 16 Mar 2020 10:02:35 PM
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यस बैंक के ग्राहकों की परेशानी कम हो सकती है. माना जा रहा है कि जल्द ही बैंक का संचालन पटरी पर लौट आएगा, लेकिन इस बीच ग्राहकों की जान सांसत में फंसी हुई है. बैड लोन की वजह से यस बैंक डूबने की कगार पर है. बैंक के संस्थापक राणा कपूर जालसाजी के आरोप में पुलिस की गिरफ्त में हैं. प्रवर्तन निदेशालय उनसे पूछताछ कर रहा है. स्टेट बैंक और सरकार यस बैंक को संकट से निकालने की जुगत में हैं. भारतीय रिजर्व बैंक यस बैंक पर कई तरह की पाबंदी लगा चुका है. इस बैंक के जमाकर्ताओं के लिए एक महीने तक निकासी की सीमा पचास हजार तय की गई थी. बैंक नई पूंजी जुटाने में विफल रहा, वहीं बैंक से नियमित तौर पर पूंजी निकल रही थी. इस वजह से बैंक के लिए संकट गहरा गया. 

हालांकि कहा जा रहा है कि एक-दो दिन में फिर से ग्राहक अपने पैसे अपने तरीके से निकाल सकेंगे. लेकिन ग्राहक डरे हुए तो हैं. दिलचस्प यह है कि यस बैंक में पुरी के जगन्नाथ मंदिर का खाता भी है और यह खाता भगवान जगन्नाथ के नाम से है और करोड़ों की रकम अटक गई है. निजी क्षेत्र के यस बैंक के संकट में पड़ने से सदियों पुराने भगवान जगन्नाथ मंदिर के पुजारी और श्रद्धालु चिंतित हैं. बैंक में भगवान जगन्नाथ मंदिर के 545 करोड़ रुपए जमा हैं.

पुरी के इस मंदिर के दैतापति (सेवक) विनायक दासमहापात्रा ने बताया कि रिजर्व बैंक के इस फैसले से सेवक और भक्त आशंकित हैं. उन्होंने कहा कि हम उन लोगों के खिलाफ जांच की मांग करते हैं, जिन्होंने थोड़े ज्यादा ब्याज के लालच में निजी क्षेत्र के बैंक में इतनी बड़ी राशि जमा कराई है. जगन्नाथ सेना के संयोजक प्रियदर्शी पटनायक ने कहा कि भगवान के धन को निजी क्षेत्र के बैंक में जमा कराना न केवल गैरकानूनी है बल्कि यह अनैतिक भी है. श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) और मंदिर की प्रबंधन समिति इसके लिए जिम्मेदार है. 

उन्होंने बताया कि निजी बैंक में पैसा जमा कराने के मामले में पुरी के पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की गई थी लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इन आशंकाओं को खारिज करते हुए विधि मंत्री प्रताप जेना ने कहा कि यह पैसा बैंक में मियादी जमा (एफडी) के रूप में रखा गया है बचत खातों में नहीं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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