राजीव गांधी के समय से 'अटका' हुआ था ये अहम समझौता, अब चीन को झटका देकर PM मोदी ने किया पूरा

Samachar Jagat | Wednesday, 05 Jan 2022 01:44:38 PM
PM Modi completes crucial deal that was 'stuck' in Rajiv Gandhi's time, now shocks China

नई दिल्ली: चीन के कर्ज तले गरीबी के कगार पर पहुंच चुके श्रीलंका के साथ भारत ने सामरिक दृष्टि से बेहद अहम समझौता किया है. इसके तहत भारत और श्रीलंका आपसी सहयोग से त्रिंकोमाली तेल टैंक फार्म विकसित करेंगे। इस समझौते को भारत के दुश्मन चीन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. उम्मीद है कि इससे श्रीलंका की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

समझौते के तहत दोनों देश आपसी सहयोग से इस तेल टैंक फॉर्म को पुनर्जीवित करेंगे। श्रीलंकाई सरकार ने मंगलवार (4 जनवरी, 2022) को कहा कि भारत के साथ तीन समझौतों की समीक्षा के बाद दोनों पक्ष संयुक्त रूप से इस परियोजना को विकसित करने पर सहमत हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका कैबिनेट ने सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के स्थानीय ऑपरेटरों को क्रमश: 24 और 14 तेल टैंक आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. 61 तेल टैंक ट्रिंको पेट्रोलियम टर्मिनल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए जाएंगे। इसमें 51 प्रतिशत हिस्सेदारी सीलोन और 49 प्रतिशत इंडियन ऑयल के पास होगी। श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री उदय गमनपिला के मुताबिक दोनों देशों के बीच यह करार अगले 50 साल के लिए है.


 
इस मामले में अगला कदम दोनों देशों के बीच तीन औपचारिक अनुबंध करना होगा। इसमें से सीलोन पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल के बीच दो समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे। तीसरे समझौते पर श्रीलंका सरकार और इंडियन ऑयल के बीच हस्ताक्षर होंगे। उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी ने 2015 में श्रीलंका का दौरा किया था, जब परियोजना के पुनर्विकास पर आम सहमति बनी थी।

1987 से लंबित था समझौता:-

श्रीलंका की गोतबाया राजपक्षे सरकार द्वारा सहमत त्रिंकोमाली समझौते का उल्लेख लगभग 35 साल पहले 29 अक्टूबर 1987 को तत्कालीन पीएम राजीव गांधी के तहत किया गया था। परियोजना के विकास के लिए दोनों देशों के बीच पत्रों का आदान-प्रदान भी हुआ था, लेकिन बाद में इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। इन 35 सालों में कितनी सरकारें आईं और कितने पीएम बने, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। अब मोदी सरकार इस प्रोजेक्ट पर काम करने जा रही है. त्रिकोणमाली द्वीप तमिलनाडु के बहुत करीब है। इसलिए यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।



 
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