राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री घंटा बजाकर देश में जीएसटी लागू होने का ऐलान करेंगे

Samachar Jagat | Thursday, 29 Jun 2017 04:23:39 PM
Pranab Mukherjee and Narendra Modi bell announcement of GST from 1st july midnight

नई दिल्ली। आजादी के बाद देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधार ‘एक राष्ट्र-एक कर’ की अवधारणा पर आधारित ऐतिहासिक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) आखिरकार 1 जुलाई 2017 से लागू हो रहा है। संसद के केन्द्रीय कक्ष में शुक्रवार की आधी रात आयोजित हो रहे एक समारोह में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी घंटा बजाकर देश में जीएसटी लागू होने का ऐलान करेंगे जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सहित कई दलों ने समारोह में भाग नहीं लेने का ऐलान किया है। 

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केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, विक्रय कर, चुंगी कर, वैट जैसे कई अप्रत्यक्ष करों को मिलाकर जीएसटी बनाया गया है और इसके लागू होने पर लगभग अधिकांश अप्रत्यक्ष कर समाप्त हो जाएंगे और वस्तुओं का एक राज्य से दूसरे राज्य में निर्बाध प्रवेश शुरू हो जायेगा। हालांकि, सरकार कह रही है कि इससे लागू होने के बाद महंगाई नहीं बढ़ेगी और इसका अनुपालना सरल होगा लेकिन कुछ विपक्षी राजनीतिक दलों का कहना है कि इसके लिए अभी तैयारियां पूरी नहीं हैं और कारोबारी भी इसके लिए तैयार नहीं हैं। 

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जीएसटी का प्रारंभ में तत्कालीन विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ही कड़ा विरोध किया था, लेकिन अब उसका कहना है कि इसके लिए राज्यों के बीच आम सहमति बनाई गई है और लगभग सभी राज्य तैयार हैं। मोदी सरकार द्वारा जीएसटी के लिए प्रयास किए जाने पर कांग्रेस ने भी इसका विरोध किया था। हालांकि, अंतत: जीएसटी से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया गया जिससे इसके लागू होने का मार्ग प्रशस्त हो सका। 

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केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड जीएसटी को लेकर कारोबारियों में जागरूकता पैदा करने और उन्हें इसके लिए प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से पूरे देश में कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। सरकार के सभी मंत्री अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजित हो रहे कार्यक्रमों में जीएसटी के फायदे बता रहे हैं जबकि कपड़ा और फर्नीचर व्यापारियों के साथ ही कई कारोबारी संगठनों ने इसके विरोध में कारोबार बंद रखा है।

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उद्योग संगठन एसोचैम ने जीएसटी के लिए कारोबारियों के पूरी तरह से तैयार नहीं होने का हवाला देते हुए सरकार से इसको लागू करने की तिथि एक महीने आगे बढ़ाने की अपील की थी। उद्योग संगठन फिक्की के महासचिव रहते हुए आर्थिक सुधारों के पैरोकार रहे पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने जीएसटी को वर्तमान स्वरूप में अस्वीकार्य बताते हुए इसका विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि जीएसटी के लागू होने पर इंस्पेक्टर राज फिर से लौट आएगा।

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जम्मू कश्मीर को छोडक़र देश के सभी 30 राज्यों/विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों ने इससे जुड़े एसजीएसटी कानून को पारित किया है। पश्चिम बंगाल और केरल ने इसके लिए अध्यादेश का सहारा लिया है जबकि शेष राज्यों की विधानसभाओं ने एसजीएसटी कानून को पारित किया है।

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी के लागू होने पर महंगाई नहीं बढऩे का दावा करते हुए कहा है कि इससे कर में आने वाली कमी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने उद्योग जगत से उत्पादों की कीमतों में कमी करने की भी अपील की है। लक्जरी कार कंपनियों और दुपहिया वाहन निर्माता अपने वाहनों की कीमतों में कमी का ऐलान कर चुके हैं। हालांकि, रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुएं बनाने वाली कंपनियों ने जीएसटी के लागू होने के बाद मूल्यों की समीक्षा करने की बात कही है।

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जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट का प्रावधान होने के कारण इससे घरेलू कपड़ा कारोबार के प्रभावित होने की भी आशंका नहीं है। जीएसटी के विरोध में कपड़ा व्यापारी 27 से 29 जून तक तीन दिन की हड़ताल पर हैं। उनका तर्क है कि आजादी के बाद से पहली बार कपड़ों पर कर लगा जा रहा है। इससे इस उद्योग पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

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सरकार ने जीएसटी में एक हजार रुपए तक के कपड़ों पर कर की दर पांच प्रतिशत तथा इससे महंगे कपड़ों पर 12 प्रतिशत तय की है। हालांकि, सरकार का कहना है कि घरेलू कपड़ा उद्योग को जीएसटी से नुकसान नहीं होगा। इससे सिर्फ विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को नुकसान होगा क्योंकि अब उन्हें भी कर चुकाना होगा। भले ही पहले कपड़ों पर कर नहीं लगाया जा रहा था, लेकिन धागों पर 12.5 प्रतिशत की दर से कर लगाया जा रहा था जो कपड़ों की कीमत में शामिल था। इस प्रकार जीएसटी लागू होने पर वास्तव में कपड़ों पर कर कम होगा।

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देश के अधिकांश उद्योगपतियों और उद्योग संगठनों ने इसका समर्थन किया है। उद्योगपति अनिल अंबानी ने जीएसटी को आर्थिक आजादी बताते हुए कहा है कि नई कर व्यवस्था से देश बड़ा मुक्त और लोकतांत्रिक बाजार बनेगा। जीएसटी के फायदे का आंकलन करने के कई रास्ते हैं। जीएसटी आर्थिक सुधारों अथवा बदलाव की दिशा का एक हिस्सा नहीं है, यह बहुत महत्वपूर्ण कदम है और हमारी आर्थिक स्वतंत्रता का परिचायक है।

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उन्होंने कहा 70 वर्ष पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने मध्य रात्रि को संसद के केन्द्रीय कक्ष से देश की आजादी की घोषणा की थी और अब 30 जून की मध्य रात्रि को प्रधानमंत्री इसी हॉल से आर्थिक आजादी की घोषणा करेंगे। जीएसटी के लागू होने पर अधिकांश खाद्य पदार्थ, लग्जरी कारें, मोटरसाइकिल, साइकिल आदि जहां सस्ते हो जाएंगे, वहीं स्कीम्ड मिल्क, कस्टर्ड पाउडर, चॉकलेट, इंस्टेंट कॉफी और मेकअप के समान जैसे उत्पाद महंगे हो जाएंगे। जीएसटी परिषद ने सभी उत्पादों और सेवाओं के लिए दरें तय कर दी हैं जो 1 जुलाई से प्रभावी होंगी।

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राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री 30 जून की मध्य रात्रि संसद के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित एक कार्यक्रम में घंटा बजाकर देश में जीएसटी लागू किए जाने का ऐलान करेंगे। परिषद ने हालांकि, कुछ वस्तुओं पर जीएसटी दरें संशोधित की हैं और 30 जून को होने वाली परिषद की बैठक में भी कुछ वस्तुओं और सेवाओं की दरों में संशोधन की संभावना है। परिषद ने जीएसटी के लिए चार दरें - पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत - तय की हैं। उच्चतम दर में शामिल अधिकांश वस्तुओं पर अधिभार लगाया गया है जबकि खाने की अधिकांश खुली वस्तुओं पर शून्य जीएसटी है। परिषद ने सेवाओं के लिए भी दरें तय कर दी हैं। कुछ सेवाओं के महंगे होने का असर भी वस्तुओं पर पड़ेगा।

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जिन वस्तुओं को शून्य जीएसटी में रखा गया है उनमें खुला आटा, चावल, मैदा, बेसन, गेहूं, दूध, दही, लस्सी, पनीर, अंडा, मीट, मछली, शहद, ताजे फल एवं सब्जियां, प्रसाद, नमक, पान के पत्ते, मिट्टी के बर्तन, खेती के उपकरण, गैर-ब्रांडेड ऑर्गेनिक खाद आदि शामिल हैं। जिन उत्पादों को पांच प्रतिशत जीएसटी के दायरे में रखा गया है उनमें अधिकांश ब्रांडेड खाद्य पदार्थ शामिल हैं।

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जो खाद्य पदार्थ किसी ब्रांड नाम से और डिब्बा बंद बेचा जाएगा उस पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगेगा। इनके साथ मिठाइयों, खाद्य तेल, स्किम्ड मिल्क पाउडर, बच्चों के मिल्क फूड, रस्क, पिज्जा ब्रेड, पेस्ट्री मिक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजेन फल, सब्जियां, पैक्ड पनीर, रसोई गैस, केम, मसाले, लौंग, दालनीची, जायफल, काजू, किसमिस, अधिकांश जीवन रक्षक दवाएं, स्टेंट, हेपेटाइटिस डायग्नोसिस किट, व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, लाइफबोट, हैंडपंप एवं उसके उपकरण, सोलर वाटर हीटर, नवीनीकरणीय ऊर्जा के उपकरण, मिट्टी के टाइल्स, कोयला, लिग्नाइट आदि पांच प्रतिशत के स्लैब में शामिल है।

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इसी तरह से 12 प्रतिशत जीएसटी में नमकीन, भुजिया, बटर ऑयल, घी, मोबाइल फोन, अधिकांश ड्राई फ्रुट, वेजिटेवल जूस, सोया मिल्क, दूध युक्त ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड/ फ्रोजेन मछली-मांस, एलईडी लाइट, किचन और टॉयलेट सिरेमिक आइटम, स्टील, तांबे और एल्युमिनियम के बर्तन, इलेक्ट्रिक वाहन, साइकिल और उसके पार्ट्स, खेल के समान, खिलौने वाली साइकिल- कार- स्कूटर आदि शामिल हैं। 

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अठारह फीसदी जीएसटी के दायरे में हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉर्न फ्लेक्स, पेस्ट्री, जैम जेली, आईसक्रीम, इंस्टैंट फूड, शुगर, कंफेक्शनरी, शीतलपेय कंसेंट्रेट, मिनरल वॉटर आदि है। विलासिता की अधिकांश वस्तुएं 28 फीसदी जीएसटी के दायरे में है। इसमें शामिल उत्पादों में चॉकलेट, परफ्यूम, मेकअप के समान, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, डिशवॉश, इलेक्ट्रिक हीटर, फोटो कॉपी मशीन, प्रिंटर, फैक्स मशीन, लेदर के उत्पाद आदि शामिल है।



 

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