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भाषायी दासता से देश को यथाशीघ्र मुक्त कराना है! ‘‘एक संस्कृति अपहारक के रूप में अंग्रेजी को भी हमें उसी तरह निकाल फेंकना चाहिए जिस तरह हमने अंग्रेजों के शासन को सफलतापूर्वक उखाड़ फेंका।’’
जब एक छोटा सा परिन्दा आसमान की ऊंचाई की परवाह नहीं करता, बर्फीली आंधियों की परवाह नहीं करता, तपते सूरज की परवाह नहीं करता, न वह आंधी को मानता और न वह तूफान को मानता है।
पेट्रोल और डीजल के बढ़ते मूल्यों को लेकर आम जनता परेशान है, उसका दम-खम सांसें भरने लगा है, जीवन दुवार हो गया है और इन स्थितियों को लेकर राजनीतिक दलों यानी विपक्षी दलों का सक्रिय होना स्वाभाविक ही है।
राहुल और उसके पिता राजू की जिंदगी की कहानी कोई कम उतार-चढ़ाव वाली नहीं है। राजू अपना पुश्तैनी काम नहीं करना चाहते थे अर्थात् उनको बढ़ई का काम पसंद नहीं था।
केंद्र सरकार कच्चे तेल में उछाल से पेट्रोल-डीजल में लगी आग पर काबू करने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति को अमल में लाने में जुट गई है। इसी कड़ी में ईरान और भारत ने तेल आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों की तलाश तेज कर दी है ताकि चार नवंबर से लागू होने वाले अमेरिकी प्रतिबंधों से बचा जा सके।
आज से लगभग 95 साल पहले एक पत्रकार ने पर्वतारोही जॉर्ज मैलोरी से एक प्रश्न पूछा कि आप माउंट एवरेस्ट पर क्यों चढ़ना चाहते है? जॉर्ज मैलोरी इस प्रश्न से भडक़ गए और बोले- ‘क्योंकि वह एवरेस्ट है’ लेकिन जॉर्ज मैलोरी का सपना पूरा नहीं हो सका था क्योंकि वे एवरेस्ट चढ़ाई के अपने तीसरे अभियान में लापता हो गए थे
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने चुनावों में पारदर्शिता के पक्ष में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
डालर के मुकाबले गिरती भारतीय मुद्रा का असर देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक रूप से होने की आशंका है। सरकारी बैंक एसबीआई के विश्लेषकों और वित्त विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में आशंका जताई है कि गिरते रुपए का सबसे ज्यादा असर उद्योग क्षेत्र, तेल आयात बिल, महंगाई, विदेशी निवेश और उपभोक्ताओं की मांग पर पड़ेगा।
भारत का लोकतंत्र खतरे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सर्वोच्च न्यायालय के चार जजों द्वारा कहना क्या दर्शाता है? पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें हों, कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों द्वारा राफेल में घोटाले की जांच के लिए जे पी सी गठित करने  की मांग हो या फिर अमित शाह के बेटे द्वारा 50 हजार रुपए से 80 करोड़ बनाने की  बात हो व देश को अरबों रुपये का पलीता लगा चौकसी, माल्या, मोदी की चौकड़ी हो।
कहते  हैं विचार ही जीवन का सार होते हैं क्योंकि व्यक्ति के जैसे विचार होते हैं वैसी ही उसकी क्रियाएं होती हैं और उसकी क्रियाएं ही उसकी आदते बन जाती हैं और उसकी आदतें ही उसका चरित्र बनता है और व्यक्तियों के चरित्र से मिलकर राष्ट्र का चरित्र बनता है।

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