सस्ते आवास की खरीद पर रियायती ऋण योजना में महाराष्ट्र और गुजरात बेहतर

Samachar Jagat | Monday, 12 Mar 2018 12:19:22 PM
Maharashtra and Gujarat better in concessional loan scheme on cheap housing purchase

नई दिल्ली। साल 2022 तक सबको आवास मुहैया कराने के लिए सस्ती आवास योजना में महाराष्ट्र और गुजरात को छोड़कर बाकी राज्यों के लोग रुचि नहीं ले रहे हैं। इस योजना के तहत घरों के खरीददारों को रियायती दरों पर आवास ऋण मुहैया कराने की योजना क्रेडिट लिक सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) बनाई गई है । आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के सीएलएसएस से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र और गुजरात को छोड़ कर लगभग सभी राज्यों में सस्ती आवास योजना के तहत घर के खरीददारों द्बारा ऋण में रियायत के लिये आवेदन करने वालों की संख्या काफी कम रही। दर्जन भर राज्य सौ का आंकड़ा भी नहीं छू पाए। 

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आवास एवं शहरी विकास राज्यमंत्री हरदीप सिह पुरी ने संसद में गत सप्ताह सीएलएसएस के राज्यवार आंकड़े पेश किए। इसके अनुसार पिछले एक साल में सीएलएसएस के तहत आवेदन करने वालों का सबसे कम रुझान पूर्वोत्तर राज्यों में रहा। वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों का रिपोर्ट कार्ड भी संतोषजनक नहीं है। इसके मुताबिक देश भर में सीएलएसएस के तहत 88723 घरों के खरीददारों में सर्वाधिक गुजरात के 30325 और महाराष्ट्र के 25046 खरीददारों ने रियायती ऋण का लाभ लिया।

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हालांकि महाराष्ट्र में 25046 घरों के लिए 3622 करोड़ रुपए के ऋण पर 544 करोड़ रुपए की ब्याज सब्सिडी दी गयी वहीं गुजरात में 30325 घरों के लिए 2936 करोड़ रुपए के ऋण पर ब्याज में 642 करोड़ रुपए की रियायत दी गयी। इसके अलावा मध्य प्रदेश में महज 5523 घरों के लिए 421 करोड़ रुपए के ऋण पर ब्याज में 104 करोड़ रुपए की सब्सिडी, उत्तर प्रदेश में 4079 घरों के रियायती ऋण आवेदनों पर 479 रुपए का ऋण और 79 करोड़ रुपए की ब्याज सब्सिडी जारी की गयी।

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जबकि बिहार में यह आंकड़ा मात्र 318 घरों के लिए रियायती ऋण तक पहुंच पाया। इसके लिए मात्र 26 करोड़ रुपए के ऋण पर पांच करोड़ रूपए ब्याज सब्सिडी दी गयी। सर्वाधिक निराशाजनक प्रदर्शन पूर्वोत्तर के राज्यों का रहा। इनमें सिक्किम में महज दो और नगालैंड में छह घरों के लिए सीएलएसएस के तहत आवेदन किये गये। इसमें सिक्किम में ऋण और ब्याज सब्सिडी की मात्रा शून्य रही, जबकि नगालैंड में एक करोड़ रुपए के ऋण पर ब्याज सब्सिडी नगण्य रही।

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मंत्रालय की शहरी क्षेत्रों के लिए चल रही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सीएलएसएस के शुरुआती एक साल में 19 फरवरी तक देश भर में 88723 घरों के लिए आवंटित 10 हजार 41 करोड़ रुपए के ऋण पर ब्याज में 1797 करोड़ रुपए का रियायती लाभ खरीददारों को मिला। उल्लेखनीय है कि मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को सस्ते आवास मुहैया कराने के लिए आवास योजना के तहत अब तक लगभग 39 लाख आवासों के निर्माण को मंज़ूरी मिल चुकी है। 

योजना के पहले साल के इन आंकड़ों पर मंत्रालय समीक्षा कर इसमें सुधार के उपायों पर विचार कर रहा है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सीएलएसएस योजना के प्रचार प्रसार में इजाफा करते हुए इसे योजना के मानकों पर खरा उतरने वाले घर ख़रीददारों तक ले जाया जाएगा । साथ ही इस बात की भी संभावना तलाशी जा रही है कि योजना के नियमों, शर्तों और आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने की कितनी ज़रूरत है।-एजेंसी      



 

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