कर्नाटक: BJP बनी सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से 8 सीट दूर, सबकी नजरें राजभवन पर

Samachar Jagat | Wednesday, 16 May 2018 10:36:27 AM
Karnataka: BJP is biggest party, but 8 seats away with majority

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नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने और बीजेपी और चुनाव के बाद एकजुट हुए कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के सरकार बनाने के दावे पेश करने के बाद अब सबकी नजरें राज्यपाल वजूभाई वाला पर हैं कि वे किसे सरकार बनाने के लिए बुलाते हैं।

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विधानसभा की 224 में से 222 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी 104 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रुप में उभरी है जबकि कांग्रेस को 78 सीटें, जनता दल (एस) को 37 और उसकी सहयोगी बहुजन समाज पार्टी(बसपा)को एक सीट मिली है। एक सीट केपीजेपी को तथा एक सीट निर्दलीय के खाते में गई है। कांग्रेस और भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय बने इस चुनाव में प्रचार के दौरान दोनों के बीच जमकर घमासान हुआ जिसमें कटुता भी दिखायी पड़ी।

अब दोनों के बीच एक दूसरे को सत्ता से दूर रखने के लिए घमासान शुरु हो गया है जिसकी झलक दोपहर से नजर आने लगा जब चुनावी होड़ में पिछड़ी कांग्रेस ने बीजेपी को सरकार बनाने से रोकने के लिए अचानक जनता दल (एस) को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का एलान कर दिया। उस समय तक विधानसभा की आधी सीटों के भी परिणाम नहीं आये थे लेकिन रुझानों के आधार पर इन दोनों दलों को स्पष्ट बहुमत से ज्यादा सीटें मिलती दिख रहीं थी।

बीजेपी ने सबसे बड़े दल के रुप में उभरने के आधार पर सरकार बनाने का दावा किया है। भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी एस येद्यियुरप्पा ने पार्टी के नेताओं के साथ राज्यपाल से मिलकर उन्हें सरकार बनाने का मौका देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पार्टी विधानसभा में बहुमत सिद्ध कर देगी।

इसी के कुछ देर बाद जनता दल (एस) के नेता एच डी कुमारस्वामी, निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारामैया और कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ राज्यपाल से मुलाकात करके सरकार बनाने का दावा पेश किया। कांग्रेस का दावा है कि दोनों दलों के विधायकों के अलावा 2 अन्य विधायक भी उनके साथ हैं। सरकार बनाने के दावे और प्रतिदावे के बाद अब राज्यपाल के फैसले का इंतजार है। इस स्थिति को देखते हुये इस बात पर बहस शुरु हो गई है कि राज्यपाल को ऐसे में क्या करना चाहिए।

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इसे लेकर बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया जा रहा है जिसमें कहा गया था कि बहुमत का फैसला विधानसभा के अंदर होना चाहिए। इस संबंध में गोवा और मणिपुर के घटनाक्रम का भी उल्लेख किया जा रहा है जहां कांग्रेस के सबसे बड़े दल के रुप में उभरने के बावजूद बीजेपी ने छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी।

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