पिता के सपने को पूरा किया बेटे ने

Samachar Jagat | Wednesday, 12 Sep 2018 01:08:52 PM
Father fulfilled the father's dream

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राहुल और उसके पिता राजू की जिंदगी की कहानी कोई कम उतार-चढ़ाव वाली नहीं है। राजू अपना पुश्तैनी काम नहीं करना चाहते थे अर्थात् उनको बढ़ई का काम पसंद नहीं था। उनका मन हमेशा पढ़ने को करता था। लेकिन पांच बहनों और चार भाइयों के परिवार में पढ़ने का ख्वाब उस समय टूट गया, जब शादी कर दी गई। दो संतान सहित उनको बिहार के गया शहर में आना पड़ा। उन्होंने वहां टाइपराइटर का काम सीखा। इसी से उन्होंने अपना घर चलाया। लेकिन वे अपने बेटे राहुल को पढ़ाना चाहते थे। 

उसे खूब आगे बढ़ाने के लिए मौहल्ले के एक स्कूल में भर्ती करवा दिया और राहुल को मन लगाकर पढ़ने के लिए प्रेरित करते। वे कहते कि शिक्षा से ही सुखद भविष्य और सार्थक जीवन बनता है। उन्हीं दिनों कम्प्यूटर आ गया और टाइपराइटर का वक्त चला गया। इसमें घर में खाने के लाले पड़ गए। लेकिन राजू ने हिम्मत नहीं हारी और किसी से पैसे उधार लेकर एक कम्प्यूटर खरीद लाए। लेकिन यह राजू का दुर्भाग्य ही समझा जाएगा कि कुछ असामाजिक तत्वों ने कम्प्यूटर की वजह से राजू को धनवान समझ लिया और उनसे रंगदारी मांगने लगे। इसके लिए राजू ने मिन्नते मांगी, अपनी हकीकत स्थिति बतलाई। लेकिन गुंडे नहीं माने और राजू को एक दिन का वक्त दिया। अब राजू पुलिस में गया शिकायत करने, लेकिन पुलिस कहां कम थी, उसने कुछ ले देकर मामला निपटाने की बात कही।

राजू ने अपने बेटे से कहा कि तुम किसी भी हालात में अपनी पढ़ाई मत छोड़ना, बेशक मैं रहूं या नहीं रहूं और राजू ने सुबह 4 बजे गया शहर छोड़ दिया। वे पटना पहुंचे, न रोजगार न घर और राहुल की पढ़ाई अधर में। राजू की पत्नी ने अपने गहने बेचे। बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलवाया, छोटे-मोटे काम किए मगर बात नहीं बनी, हारकर अपना पुश्तैनी काम बढईगिरी का ही शुरू किया। इस बुरे दौर में भी राहुल मन लगाकर पढ़ता रहा और अच्छे अंकों के साथ आठवीं उत्तीर्ण कर ली। अपने पिता की तंगहाली से राहुल ने कोई काम करने की बात अपने पिता से कही तो उसके पिता ने राहुल से रूंधे गले से कहा- बेटे! तुम बढ़ो-पढ़ो, फिर से ऐसा मत कहना।

एक सुरेश कांत उनके नेकदिल पडौ़सी थे। जब उन्होंने राहुल को हमेशा पढ़ते ही देखा तो वे उसके पिता राजू से मिले, लेकिन जब उनके घर के बदहाल देखे तो वे भावुक हो गए और राजू को अपनी प्रिंटिंग प्रेस में नौकरी दी, इससे राहुल को सपोर्ट मिला और वह दसवीं उत्तीर्ण कर सका। सुरेश ने उनको सुपर 30 का रास्ता बतलाया। हालात की मार से राजू की विनम्रता ने आंनद कुमार के भीतर तक उतर गई और सुपर पटना से संस्थापक आनंद कुमार ने राहुल को होनहार बेटे के रूप में अपनाया और हर तरह से मदद की। 2009 के रिजल्ट में राहुल अच्छी रैंक के साथ कामयाब हो गया। निश्चित रूप से मैं व्यक्तिश:  आनंद कुमार जी सुपर 30 पटना के संस्थापक राजू जी को, सुरेश कांत जी व राहुल को दिल से बधाई देता हूं क्योंकि आप संवेदनाओं से भरे इंसान है और दूसरों की बेदनाओं को दूर कर अपना महान इंसानी धर्म बखूबी निभाते हो। मेरी तरफ से आप सभी के लिए मेरी हार्दिक भावनाएं:-

प्रेरणा बिन्दु:- 
धन्य आप परिवार आपका, आप रहें सदा खुशहाल स्वस्थ रहें अपने जीवन में, आप जिएं हजारों साल।
 

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