भारत-इजराइल के संबंधों का होगा सफल भविष्य

Samachar Jagat | Monday, 21 Nov 2016 03:33:50 PM
भारत-इजराइल के संबंधों का होगा सफल भविष्य

वर्तमान वैश्विक संदर्भ में भारत इजराइल संबंधों के नवीन आयाम महत्वपूर्ण हो गए हैं। भारत और इजराइल कृषि क्षेत्र, शिक्षा क्षेत्र, अन्वेषण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष, जल प्रबंधन इत्यादि क्षेत्रों में परस्पर सहयोग द्वारा न केवल आपसी संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं अपितु विश्व को भी परिवर्तित करना चाहते हैं। इजराइल ने सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी सदस्यता का भी समर्थन भी किया है।

 आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष एवं संकटकाल के सहयोगी के रूप में भी भारत-इजराइल संबंधों का महत्व है। 14 नवंबर 2016 को 8 दिवसीय भारत यात्रा पर आए इजराइली राष्ट्रपति रुवेन रिवलिन ने भारत आते ही आतंकवाद पर जोरदार चोट करते हुए कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष हमारी जिम्मेवारी है। मध्यपूर्व में स्थित इजराइल तीन ओर से अरब राज्यों से घिरा है। 29 नवंबर 1947 को राष्ट्रसंघ ने फिलस्तीन का विभाजन करके एक भाग यहूदियों को दूसरा भाग अरबों को दे दिया। 

15 मई 1948 को यहूदियों ने अपने भाग को इजराइल राज्य के नाम से घोषित किया। भारत ने इजराइल को सितंबर 1950 में मान्यता दी, लेकिन वहां कोई राजनयिक मिशन नहीं खोला। 29 जनवरी 1992 को भारत-इजराइल के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित हुए। भारत ने इजराइल के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित कर पश्चिम एशिया में एक नये युग की सूत्रपात की। दोनों ही देश अगले वर्ष राजनयिक संबंधों की 25वीं वर्षगांठ काफी उमंगों के साथ मनाने की तैयारी में हैं। 

इन 25 वर्षों में काफी कुछ बदला है, अब फिलस्तीन के समर्थन एवं इजराइल के संबंधों को विश्व समुदाय विरोधाभास के रूप में नहीं देखता। पहले की तरह अब दोनों देशों के नेता, मौजूदा नेतृत्व रिश्तों की मजबूती के बारे में बात करने में झेपते नहीं हैं। यही कारण है कि रिवलिन ने 14 नवंबर को भारत आते ही कहा भी की हमारे रिश्तों में छिपाने लायक कुछ भी नहीं।

 इजराइली राष्ट्रपति रिवलिन ने कहा कि भारत के साथ अपने संबंधों को लेकर इजराइल खुद को गौरवान्वित महसूस करता है। 15 नवंबर 2016 को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी एवं इजराइली राष्ट्रपति रुवेन रिवलिन के शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच दो समझौते हुए- प्रथम जल संसाधन प्रबंधन एवं द्वितीय कृषि क्षेत्र में सहयोग को लेकर। 

दोनों देशों ने आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक मुहिम को तीव्र गति प्रदान करने की बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश एक दूसरे के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। विज्ञान-प्रोद्योगिकी, व्यापार, निवेश, सुरक्षा समझौते भी दोनों देशों को आगे बढ़ा रहे हैं।

 इजराइल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। इजराइली राष्ट्रपति रुवेन रिबलिन ने भारत के फ्लैगशिप कार्यक्रम ‘‘मेक इन इंडिया’’ पर कहा कि इजराइल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक विथ इंडिया’ में विश्वास करता है। दरअसल इजराइल रक्षा क्षेत्र में तकनीक हस्तांतरण के द्वारा भारत में ही रक्षा उत्पादन के लिए प्रतिबद्धता प्रकट कर रहा है। इजराइल चाहता है कि इजराइली रिसर्च एवं आधुनिकतम तकनीक का भारतीय औद्योगिक क्षमता से मिश्रण कर न केवल भारत अपितु विश्व को भी बदला जा सकता है। 

मोदी के साथ शिखर वार्ता में भी उन्होंने आतंकवाद के विरुद्ध भारत को पूर्ण समर्थन एवं सहयोग प्रदान किया तथा इसके विरुद्ध संघर्ष में किसी भी भौगोलिक सीमा से इंकार किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश आतंकवाद से पीडि़त हैं, क्योंकि हम स्वतंत्रता के मूल्यों से संबद्ध हैं। हथियारों की खरीद के लिए इजराइल भारत का 5वां सबसे बड़ा स्रोत है। गत एक दशक में भारत ने इजराइल से 10 अरब डॉलर से अधिक के हथियार खरीदे हैं। इजराइल भी मानता है कि सैन्य उद्योग की दृष्टि से भारत महत्वपूर्ण है। 

1999 के कारगिल युद्ध के दौरान प्रयोग किए गए लेजर गाइडेड बम और मानवरहित हवाई वाहनों की त्वरित आपूर्ति कर इजराइल ने संकट के समय महत्वपूर्ण सहयोगी की भूमिका का निर्वहन किया। भारतीय वायुसेना के पास तीन ऑपरेशनल अवाक्स मौजूद हैं। इसके अलावा दो अन्य के जल्द ही वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है। यहां यह उल्लेखनीय है कि चीन की इच्छा के बावजूद यह तकनीक इजराइल ने चीन को नहीं दी। सितंबर 2014 में भारत ने इजराइली एयरोस्पेस उद्योग की बराक-एंटी मिसाइल डिफेंस खरीदने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता किया था जो सबसे महत्वपूर्ण सैन्य समझौतों में शामिल है। 

पिछली यूपीए सरकार इस समझौते से पीछे हट गई थी, लेकिन मौजूदा सरकार इन समझौतों को तीव्र गति से आगे बढ़ा रही है। भारत ने 8,356 इजराइली स्पाइक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल और 321 लॉचरों को 52.5 करोड़ डॉलर में खरीदने का समझौता 2014 में किया था। यह समझौता भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इजराइल उपकरणों को अमेरीकी उपकरणों पर वरीयता प्रदान की गई। अमेरिका ने अपनी ओर से जेवेलिन मिसाइलों को बेचने की बहुत कोशिश की लेकिन दोनों देशों के बीच सैन्य तकनीकों की अदला बदली के अनसुलझे मसले को देखते हुए भारत सरकार ने स्पाइक पर भरोसा किया।

भारत अभी निगरानी और टोह लेने के लिए इजराइल में निर्मित 176 ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है, जिसमें 108 आईएआई (इजराइली एयरोस्पेस इंडस्ट्री) सर्चर हैं जबकि 68 बिना शस्त्र वाले हेरान एट एयरक्राफ्ट हैं। इन परंपरागत सैन्य उपकरणों के साथ सीमा पर बाड़ लगाने से संबंधित तकनीक का भी भारत, इजराइल से आयात कर रहा है। इसका प्रयोग जम्मू कश्मीर के लाइन ऑफ कंट्रोल पर किया जा रहा है।

 प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि इजराइल भारत सरकार के कई फ्लैगशीप कार्यक्रमों मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया एवं स्मार्ट सिटिज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और इसमें तीव्रता बढ़ाने की आवश्यकता है। दरअसल ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां इजराइल को विशेषज्ञता हासिल है। भारत इजराइल संबंधों का एक महत्वपूर्ण पक्ष कृषि है, जिस पर 15 नवंबर 2016 को भी शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों में महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। 

इजराइल में पानी की कमी है और ड्रिप एरीगेशन अर्थात सूक्ष्म भसचाई पद्धति का विशेषज्ञ है। इस प्रौद्योगिकी का भारत में विदर्भ, मराठवाड़ा इत्यादि सूखे क्षेत्रों में कृषि उत्पादन बढ़ाने पर बल दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त बागवानी, बगान प्रबंधन, नर्सरी प्रबंधन, सूक्ष्म भसचाई और भसचाई बाद प्रबंधन में इजराइली प्रौद्योगिकी से भारत को काफी लाभ मिला है। हरियाणा एवं महाराष्ट्र में ऐसे प्रयोग सफल रहे हैं। 

वर्ष 2010 से दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते के लिए प्रयत्नशील हैं एवं जल्द ही इस पर भी समझौता होने की उम्मीद है। मुक्त व्यापार समझौता पर रिवलिन ने कहा कि यह हमारी साझेदारी को और आगे ले जाने में बहुत कारगर साबित होगा।

 खासतौर पर व्यापार क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों के राजदूत इस पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। 2013-14 में द्विपक्षीय व्यापार 6.06 अरब डॉलर था जो 2009-10 के 57 प्रतिशत से अधिक था। 2013-14 में यह भारत के पक्ष में 1.44 अरब डॉलर झुका हुआ था। भारत इजराइल को मुख्यत: खनिज ईंधन, तेल, मोती और रत्न का निर्यात करता है, जबकि इजराइल से भारत परंपरागत तौर पर मुख्यत: प्राकृतिक एवं कृत्रिम मोती और रत्न का आयात करता है। इसके अतिरिक्त जल प्रबंधन में इजराइल को विशेषज्ञता प्राप्त है। 

15 नवंबर 2016 को हुए दो समझौतों में से एक जल प्रबंधन पर आधारित है। इजराइल खारे पानी को मीठा बनाने की पद्धति में भी विशेषज्ञ है। इजराइल की कंपनी आईडीई ने भारत में खारे जल को मीठा बनाने के अनेक संयंत्र स्थापित किए हैं। जल प्रबंधन आज के भारत के अनिवार्य आवश्यकता है, जिसमें इजराइली सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है। इजराल के लोगों में भारत के प्रति एक विशेष निष्ठा देखी जा सकती है। वहां की कई सडक़ों और गलियों के नाम रवीन्द्र नाथ टैगोर और नेहरु जी के नाम पर हैं। 

भारत ने यहूदियों को सदैव सम्मान देकर इजराइली लोगों के मन में यह उत्कृष्ट सम्मान प्राप्त की है। भारतीय सैन्य आधुनिकीकरण की तीव्र गति की आवश्यकता हो या कृषि में अप्रत्याशित सुधार; सभी मोर्चों पर इजराइल का साथ विशेष महत्व रखता है। 

पिछले वर्ष भारतीय राष्ट्रपति की इजराइल की यात्रा, इस वर्ष के शुरुआत में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की इजराइल यात्रा से संबंधों में जो गति आई थी, उसे इजराइली राष्ट्रपति की आठ दिवसीय यात्रा ने और भी नवीन आयाम प्रदान किया है। आतंकवाद, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता में भारत का शर्त रहित समर्थन इत्यादि भारत-इजराइल संबंधों के ऐसे चिरस्मरणीय भाग हैं जो भारतीय कूटनीति के सफलतम तत्वों को रेखांकित करते हैं।

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