दूषित पानी से हल्की हो रही है जेब

Samachar Jagat | Tuesday, 12 Feb 2019 03:19:44 PM
Pocket is getting lighter than contaminated water

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जयपुर में इन दिनों कई इलाके ऐसे है जहां लोग दूषित पानी पीने को मजबूर है। दरअसल गंदे पानी की सप्लाई से लोगों के बीमार होने की आशंका बढ़ गई है। भांकरोटा से लेकर मोती डूंगरी रोड, गुर्जर की थड़ी से लेकर ढेहर के बालाजी तक यही स्थिति है। भांकरोटा में गणतपुरा रोड स्थित जेडीए कॉलोनी में पिछले एक माह से गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। इसी तरह मोती डूंगरी स्थित आनंदपुरी नई बगीची में भी महीने भर से गंदा पानी आ रहा है। गुर्जर की थड़ी के पास शांतिनगर में कई जगह पेयजल लाइन टूटी होने के कारण गंदा पानी और मिट्टी भी पाइप लाइन से आ रही है।


दरअसल पीने के पानी की गुणवता में कमी या उसे नजरअंदाज करना आम जनता की जेब पर काफी भरी पड़ सकता है। किसी गंभीर बीमारी की वजह से साल में जितना आम लोगों का खर्च होता है, उसका करीब पांच गुना दूषित पानी पीने की वजह से होने वाली बीमारियों पर खर्च होता है। सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र पर जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का महज 1.02 फीसदी खर्च करती है। लेकिन पानी से जुड़ी बीमारियों की वजह से होने वाला नुकसान जीडीपी के छह फीसदी के बराबर है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत दूषित पानी वाले 122 देशों की सूची में 120वें स्थान पर है। भारत की करीब 6.30 करोड़ ग्रामीण आबादी को स्वच्छ पानी नहीं मिल पाता है, जो कि ब्रिटेन की कुल आबादी के बराबर है। नीति आयोग के अनुसार भारत की 40 फीसदी आबादी स्वच्छ पानी से दूर है।

जैसा कि पूर्व में लिखा गया है सरकार देश में जीडीपी का कुल 1.02 फीसदी स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करती और दूषित पानी की वजह से लोगों का कुल जीडीपी का 6 फीसदी खर्च होता है। आम लोगों कुल स्वास्थ्य खर्चों में से 70 फीसदी राशि खर्च होती है दूषित पानी से होने वाली बीमारियों पर। रिपोर्ट के अनुसार दूषित पानी से होने वाली बीमारी से दुनिया भर में 59 लाख बच्चों की मौत हर साल हो जाती है। दुनिया भर में पानी की उचित व्यवस्था पर 222.9 अरब डालर प्रतिवर्ष खर्च होता है।

 दुनिया भर में 53 फीसदी मौतें गंदे पानी की वजह से होती है, जो दुनिया भर में होने वाली मौतोंका 6.2 फीसदी के बराबर है। दूषित पानी का असर सभी पर पड़ता है, लेकिन इससे बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। भारत में करीब 3.70 करोड़ लोग दूषित पानी से प्रभावित होते हैं, जिसमें 15 लाख बच्चों की मौत केवल डायरिया से जो कि दूषित पानी के कारण होता है। इतना ही नहीं डॉक्टर और अस्पताल के चक्कर लगाने और बीमारी की वजह से आराम करने की वजह से देश को सालाना 7.3 करोड़ कार्य दिवस का नुकसान उठाना पड़ता है। 

इसकी मार से देश की अर्थव्यवस्था अछूती नहीं है। दूषित पानी की वजह से भारत को सालाना करीब 60 करोड़ डालर का नुकसान होता है। रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए कहा गया है कि गांव में रहने वाले लोगों को बढ़ते तापमान के बीच फसल उगाने और पशुओं का चारा जुटाने के लिए ज्यादा संघर्ष करना होगा। जबकि पानी लाने की जिम्मेदारी संभालने वाली महिलाओं को लंबे शुष्क मौसम के दौरान पानी के लिए अधिक दूरी तरह करनी पड़ेगी। विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था में भारत को एक बताते हुए इसमें कहा गया है कि देश के सामने मुख्य चुनौतियों में से एक है बढ़ती हुई आबादी के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना। 

आज दुनिया भर में डेढ़ अरब लोग पानी से वंचित है और तीन अरब के पास उचित साफ-सफाई और शौचालय नहीं है। लगभग 40 लोग, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं, दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से मर जाते हैं। रोजाना 20 लाख औद्योगिक तथा कृषि कचरा जल स्त्रोतो डाल दिया जाता है। इसके साथ ही प्रतिवर्ष 1500 घन किमी पानी वेस्ट वाटर के रूप में निकलता है। हमारे पास पीने के पानी के नाम पर केवल 0.08 प्रतिशत ही है। यूनिसेफ के अनुसार भारत की पानी की कमी से 7 करोड़ लोग परेशान है।

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