ईरान से व्यापार पर ट्रंप की दुनिया भर के देशों को धमकी

Samachar Jagat | Monday, 13 Aug 2018 02:44:49 PM
Trump on trade from Iran threatens countries around the world

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद दुनिया भर के देशों को धमकी दी है। ट्रंप ने अपने साझेदार देशों से कहा है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार जारी रखेगा वह अमेरिका के साथ व्यापार नहीं कर पाएगा। ट्रंप ने इन प्रतिबंधों का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत ईरान से काफी मात्रा में तेल आयात करता है। चीन के बाद भारत ईरान का दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। साथ ही उसकी तेल परियोजनाओं में भी सहयोग दे रहा है। दोनों देशों के इन्हीं नजदीकी रिश्तों की वजह से ईरान ने भारत को चाबहार बंदरगाह में साझेदारी का मौका दिया है। चाबहार से होकर भारत की योजना अफगानिस्तान के लिए माल आपूर्ति की है, ताकि पाकिस्तान वाले रास्ते को दरकिनार किया जा सके।

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर कहा है कि ईरान पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह अब तक का सबसे बड़ा प्रतिबंध है। नवंबर महीने में यह पाबंदी और बढ़ेगी। जो ईरान के साथ संबंध जारी रखना चाहते हैं वा अमेरिका के साथ अपने संबंधों को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे। टं्रप ने कहा है मैं दुनिया में शांति के लिए ऐसा कह रहा हूं। इससे कम कुछ भी नहीं। यहां यह उल्लेखनीय है कि ईरान से यह प्रतिबंध 2015 के परमाणु करार के बाद हटाए गए थे। यहां यह बता दें कि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध दो चरणों में है। पहला चरण 7 अगस्त को शुरू हो गया, अब न तो डॉलर से रियाल खरीदा जा सकेगा और नहीं रियाल से डॉलर। वहीं दूसरे चरण में 5 नवंबर से कच्चे तेल को लाने-ले जाने वाले अमेरिकी टैंकरों का इस्तेमाल पूरी तरह से बदं हो जाएगा। 


ईरान पर अमेरिका का यह अब तक का सबसे कड़ा प्रतिबंध है। प्रतिबंधों के चलते भारत के चावल और चाय के निर्यात पर भी खतरा मंडरा रहा है। भारत के चावल और चाय के निर्यात का भाग्य अब ईरान के साथ तेल आयात समझौते पर निर्भर होगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि इस बारे में पिछले सप्ताह सोमवार को जारी कार्यकारी आदेश में ड्रंप ने कहा है कि मिसाइलों के विकास और खाड़ी क्षेत्र में घातक गतिविधियों के व्यापक और स्थायी समाधान की खातिर ईरान पर वित्तीय दबाव डाला गया है। जैसा कि ऊपर कहा गया है अमेरिकी प्रतिबंधों के पहले चरण में ईरान की अमेरिकी मुद्रा तक पहुंच घटाने के लिए कार और कालीन समेत उसके अन्य प्रमुख उद्योगों को निशाना बनाया गया है। हालांकि प्रतिबंध का प्रभाव ईरान पर पहले ही दिखने लगा है। ट्रंप द्वारा समझौते से बाहर निकलने की घोषणा के बाद से ही ईरानी मुद्रा रियाल का मूल्य गिरते हुए आधे पर आ गया है। प्रतिबंध लगाए जाने पर ईरान जैसे इस्लामिक देश के खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध छोड़ने का आरोप लगाया। पिछले हफ्ते ही ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान से बातचीत के लिए तैयार है। इस पर ईरान में तीखी प्रतिक्रिया हुई। 

ईरान के रिवाल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख ने ट्रंप के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा था कि ‘‘ईरान, उत्तर कोरिया नहीं है, जो आपके बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार कर ले’’ जाहिर है ऐसे बयानों ने ट्रंप को बौखला दिया। उन्होंने ईरान पर फारस की खाड़ी में नौसेना अभ्यास करने का आरोप लगाया। अमेरिकी और ईरान की यह तनातनी दुनिया के शक्ति समीकरण पर गहरा असर डाल सकती है। दरअसल अमेरिका 2015  में सीरिया में लगे झटके को अब तक पचा नहीं पाया है। शायद वह ईरान को भी इराक बना देना चाहता हो लेकिन यह आसान नहीं है। ईरान के प्रति टं्रप के इस रवैए को इजरायल और सउदी अरब जैसे अमेरिकी खेमें के मुल्कों को छोडक़र किसी ने पसंद नहीं किया है। परमाणु समझौता तोड़ने को लेकर यूरोपीय संघ अपनी आपत्ति जता चुका है। जर्मनी का कहना है कि ईरान के मुद्दे पर अमेरिका का व्यवहार हम यूरोपीय लोगों को रूस और चीन के अमेरिका विरोधी रुख के करीब ले जाएगा।

 ट्रंप के कदम ने ईरान में कट्टरपंथियों और रुहानी जैसे उदारवादियों को एक कर दिया है। वहां अमेरिका के खिलाफ तमाम शक्तियां एकजुट है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की इस जिद ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की क्षमता कमजोर की है। उत्तर कोरिया जैसा देश भी अब शायद ही उनकी बात मानेगा और कोई समझौता करेगा। जैसा कि ऊपर कहा गया है। अमेरिकी प्रतिबंधों का दूसरा चरण 5 नवंबर से प्रभावी होगा और तब ईरान के कच्चे तेल की बिक्री पर रोक लगेगी। इससे तेल के दाम तो बढ़ेंगे ही ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत के निर्माण कार्य पर भी बुरा असप पड़ेगा। जल्द ही हमें बहुत समझदारी से कुछ जरूरी फैसले लेने पड़ेंगे। यहां यह उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने कभी इजरायल या दक्षिण अफ्रीका के परमाणु कार्यक्रम पर शोर नहीं मचाया। पाकिस्तान और उत्तर कोरिया भी परमाणु ताकत बन चुके हैं, लेकिन शत्रुता के कारण उत्तर कोरिया प्रतिबंध और गरीबी झेल रहा है, जबकि आतंकवाद को पनपाने वाले पाकिस्तान को अमेरिकी मदद पर अभी भी आंच नहीं आई। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए है, जबकि अमेरिका और इजरायल का मानना है कि वह परमाणु बम बना रहा है।

 यहां यह बता दें कि अमेरिका के प्रतिबंध लगाने के फैसले पर यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और कुछ अन्य देशों का रुख इसके विपरीत है। अमेरिका अपने लक्ष्य में कितना सफल होता है, यह तो आने वाले वक्त में ही सामने आएगा। ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों के असर से भारत कैसे निपटता है? भारत अमेरिका के संग खड़ा होता है या ईरान के साथ। ईराक और सऊदी अरब के बाद भारत को तेल देने वालों में ईरान का नंबर आता है। ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत के ईरान बहुत अहम है। वह तेल आयात के लिए भारत को कुछ रियायतें भी देता है। अमेरिका की बात मानकर भारत ईरान से तेल आयात रोकता है तो भारत को काफी परेशानी होगी।

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