SMS Hospital की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

Samachar Jagat | Friday, 11 Nov 2022 05:30:42 PM
Questions raised regarding the security system of SMS Hospital

जयपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल में मरीजों की बढती समस्या को लेकर वहां के प्रशासन ने वहां सुरक्षा गार्डो की व्यवस्था की थी। मगर अब समस्या करेला नीम चढा साबित हो रही है।यहां होने वाले दुर्व्यवहार के वाकियोें को लेकर हर बात वहां के रोगियों और उनके अटेनेेंटोंं को दोषी ठहराया जा रहा है। जब कि वहां की सिक्योरिटी सेवा को हर बार बिना कोई जांच के बेकसूर ढहरा जाना अब लोगोंे को अखरने लगा है, गौर तलब रहे कि इस तरह क ी समस्या को लेकर वहां के प्रशासन ने समय- समय पर प्रयास तो किए हैं, मगर इसके सुखद परिणाम मृगतृष्णा साबित होते आए हैं। इस मर्ज की तह में जाने के लिए पीड़ित वर्ग से हाल में संपर्क का अभियान समाचार जगत पोर्टल की ओर से प्रयास किए गए थ्ो। काफी मंथन के बाद जो स्थिति सामने आई है, वह वाकई शौचनीय है। समय रहते इसका समाधान खोजा जाना आवश्यक है। अन्यथा यह मसला बड़े कांड का रूप लेने की संभावना है। 

अस्पताल में सुरक्षागार्डो की तैनाती को लेकर प्रशासन पर इस बात क ा आरोप लगता है कि दुर्व्यवहार के केसेज में एसएमएस का अधिकारी और चिकित्सक वर्ग एक तरफा कार्रवाही करता है। जब भी ऐसी कोई घटना सामने आती है, वहां नियुक्त सुरक्षा गार्ड सीटी बजा कर बीस से तीस साथियों को बुलाकर दुखी रोगियोें के साथ धक्कामुक्की करते है। मारपीट की स्थिति बन जाती है।अफसोस इस बात का है कि ऐसे शर्मनाक मामलोंे में महिलाओें को भी नहीं बख्सा जा रहा है। बात यहीं तक सीमित नहीं है। वाकि ए को लेकर सुरक्षा गार्ड व्यवस्था पर आरोप यह भी है कि ऐसे मामलोें को वे अपने स्तर पर ही दबा देते हैं। एसएमएस के सुपरीडेंट या प्रिंसीपल को अवगत नहीं करवाया जाता है और तो और अपनी स्तर पर ही वे अस्पताल के प्रागंण में स्थित पुलिस को बुला लेते हैं। जहां उनपर पुलिस केस थोप दिया जाता है। यहां परेशानी यह भी है कि लोग अपने मरीज को संभाले या फिर पुलिस के केस को। अफसोस यह भी है कि सवाई मानसिंह अस्पताल में ऐसे मामले जो कि शोचनीय और शर्मनाक है, इनकी रोकथाम के लिए कोई स्थाई व्यवस्था नहीं की गई है। 

गाजियाबाद यूपी से उपचार के लिए आए अभिष्ोक बताते हैं कि उनका मरीज सीरियस चल रहा है। देखरेख के लिए वह अकेला की यहां आया हुआ है। ऐसे में वह रोगी को संभालने के साथ- साथ उसके लिए ब्लड की व्यवस्था, तरह- तरह की जांचों की रिर्पोटोंे को कलेक्ट करने आदि बातों में बड़े प्रयास करने पड़ते हैं। मगर जब भी इन समस्याओं की पीड़ा गूंजती है, सिवाए ठहाकोंे के कोई राहत देने की प्रभावशाली व्यवस्थाएं ना जाने क्यों नहीं की जा रही है। इन मामलों को प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री तक को अंध्ोरे में रख्ो के आरोप प्रशासन पर लगते रहे र्हैं। एक अन्य युवक पवन कुमार का आरोप यह भी है कि सुरक्षा गार्ड अपशब्द और असंसदीय भाषा का उपयोग करते हैं। अटेनेंट हालांकि अपना पास दिखाता है, इसके बाद भी उसे जलील कि या जाता है। 

केकड़ी से आई कृष्णा देवी के अटेनेंट बताते हैं कि उसकी पेसंेंट को सीरियस हालत में यहां एसएमएस लाया गया था, मगर यहां की कुव्यवस्था ने उनकी परेशानी बढा दी है। हालत यह है कि वह जब भी रोगी के लिए चाय-दूध और ब्रेड-बिस्कुट के लिए अस्पताल के बाहर जाना पड़ता है तो सुरक्षागार्ड ना केवल टोका- टोकी करते हैं बल्की उसके साथ धक्का-मुक्की करते हैं। मामले की शिकायत जब उनके सुपरवाईजर से संपर्क किया तो वह इस मामले क ी सत्यता क ो लेकर सवाल उठाने लगा। उनका कहता था कि उनके सुरक्षा गार्ड इस तरह का व्यवहार कर ही नहीं सकते। समस्या को लेकर आम राय है कि सुरक्षा गार्ड से संबंधित समस्या के समाधान के लिए अस्पताल में विश्ोष कमेटी का गठन किया जाना चाहिए। कमेटी में अस्पताल प्रशासनऔर सुरक्षागार्ड सेवा के संचालक को शामिल किया जा सकता है। एक बात और इस समस्या में बाहरी एजेंसी का प्रवेश उचित नहीं होगा। सारा मामला पुलिस पर आकर टिक जाता है।

एसएमएस परिसर में स्थित पुलिस थाने का स्टाफ कहने को गश्त करता है। संदिग्ध लोगोंे की पकड़ धकड़ करता है, मगर इस दावे मंे सच्चाई कितनी है, इसकी भी पड़ताल है। पुूलिस की व्यवस्था यदि सुचारू होती तो वहां सुरक्षा गार्ड और मरीज के अटेनेंट के बीच आए दिन होने वाले विवाद की समस्या पैदा ही नहीं होती। यदि कभी इस आशय की दिक्कत भी आ जाती तो उसका समय पर समाधान कमेट के स्तर पर ही हो जाता। टांेंक से आए अब्दुल रसीद का कहना है कि सुरक्षा गार्ड से उनकी कोई शिकायत नहीं है। सारा दारमदार व्यवस्था को लेकर है, जिसे सुधारना एसएमएस प्रशासन का दायित्व है । जिससे बच कर गली निकालने के प्रयासोंे से सरकार की छवि अनावश्यक ही खराबग होती है। कादिर भाई कहते हैं कि अस्पताल मेंं पुलिस और सुरक्षागार्ड दोनों की सेवाएं होने के बावदूज चोरों का उत्पात यदि होता है तो शर्मनाक है।

समस्या यह है कि वारदातों पर वारदातें हो रही है, मगर  एक भी केस को नहीं खोलना शर्मनाक है। केस को लेकर वहां वह बार-बार थाने में गया तो उसे कहा गया कि चौरी करने वाले का हुलिया या नाम- पता कुछ तो बताओ। इसके अभाव में पुèलिस कुछ भी करने की स्थिति में नहीं है। जे.के.लॉन में तो और भी शर्मनाक घटना देखने को मिली जहां पांच साल के बच्चा इशू अपनी बीमार मां के लिए चाय लेने के लिए अस्पताल के प्रांगण मंे स्थित इंदिरा रसोई में गया था। गर्म चाय की थ्ौली से घबराकर उसकेे हाथ मेंे रखा पांच रूपए का सिक्ता वहां फर्श पर गिर गया। उसे उठाते समय वहीं बैठा कोई लावारिस कुत्ता उसके हाथ को चबा गया। इस मामले में रिपोर्ट वहां के प्रशासन को की थी, इस पर उसके हाथ के घाव की ड्रेसिंग करवाई गई। एंटी रेबीज का टीका लगवाया। मगर इस बात की पड़ताल जाने क्योंे नहीं की गई कि अस्पताल में कुत्ता आया कहा से। यदि आ भी गया तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है। इसकी जांच अपेक्षनीय है। 

घटना मेंं एक बात बड़ी चिंताजनक रही है कि सुरक्षा गार्ड के सुपरवाईजर से जब संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि उनकी डñूट ी अस्पताल के भवन के भीतर तक सीमित है। इसके अलावा वहां की इमरजैंेसी और जांच रिर्पोट की विंडो तक की व्यवस्था से उनका कोई लेना देना नहीं है। आगरा के केडेर गांव से आए बच्चू सिंह कहता है कि वह रात के समय अस्पताल के पोर्च में ही सो गया था, सुबह उठा तो उसका महंगा मोबाईल गायब हो गया। यह शिकायत भी गार्डो को रास नहीं आई। भला- बुरा सुना कर उसे वहां से भगा दिया। फुलेरा से आए जुबेर खां कहता है कि बांगड इकाई में उसका छोटा भाई भर्ती है।

हार्ट की कोई समस्या है। भाई की महंगी जांच होनी थी। जिसके लिए वह घर से पैतालिस हजार रूपए लेकर यहां आया था, मगर सोते समय किसी समाज कंटक ने यह राशि गायब करली गई। वह परेशान है। गरीब परिवार से होने पर किसी से उधारी में यह राशि लाया था। मगर अब पुलिस और अस्पताल के सुरक्षा गार्डो के बीच चक्कर काट रहा है। चाकसू के गोदून गांव से आए विकास मीना की शिकायत है कि जे.के.लॉन क ी आपात चिकित्सा इकाई के बाहर गैलरी में रोगियोें के परिजनों के ठहरे के लिए गैलरी में व्यवस्था की गई है, वहां साफ - सफाई नहीं होती। प्रशासन कहता है कि संबंधित सफाई कर्मचारी जो कि एक महिला है, परिवार मंें विवाह आयोजन में शरीक होने के लिए छुटटी पर गई हुई है। वैकल्पिक व्यवस्था इस मारे नहीं हो पाई, क्यों कि उनके यहां स्टाफ की कमी चल रही है। ताज्जुब की बात यह है कि अस्पताल केे प्रशासनिक अधिकारियोंे के कक्ष में साफ - सफाई की व्यवस्था में कोई समस्या नहीं है। सुबह और सायं के समय झाडू -पौछा होता है। कचरा विश्ोष पात्र में डाला जा रहा है। निगम की गाड़ी इसे उठाकर ले जाती है।



 

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