स्त्री अस्मिता की पहली लेखिका के रूप में सामने आती हैं महादेवी वर्मा

Samachar Jagat | Saturday, 11 Sep 2021 05:53:16 PM
Mahadevi Verma appears as the first author of female identity

न्यूज़ डेस्क | बिहार के बुद्धिजीवी, साहित्यकार एवं प्राचार्यों ने हिदी साहित्य के छायावाद काल की प्रमुख स्तंभ महादेवी वर्मा को स्मृति दिवस पर याद करते हुए कहा कि वह महात्मा बुद्ध के करुणावाद का संबल लेकर स्त्री अस्मिता की पहली लेखिका के रूप में सामने आती हैं।

छायावाद की महत्वपूर्ण स्तंभ महादेवी वर्मा के स्मृति दिवस के अवसर पर शनिवार को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर हिदी विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी में अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ साहित्यकार एवं स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजेन्द्र साह ने कहा कि महादेवी वर्मा स्त्री अस्मिता की पहली लेखिका के रूप में सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण छायावाद काल में नारी मुक्ति की अनुगूंज सुनाई पड़ती है। वैयक्तिकता का उद्घाटन ही छायावाद की सबसे मुख्य विशेषता है।

डॉ. साह ने कहा कि बुद्ध का करुणावाद महादेवी की सम्पूर्ण रचनाओं में दिखाई पड़ता है। उन्होंने कहा कि जहां मिलन का भाव बहुत संकीर्ण होता है वहीं विरह में व्यापकता दिखलाई पड़ती है। इसीलिए, महादेवी की रचनाओं में विरह का स्वर प्रबल है। महादेवी का वैवाहिक जीवन सफल नहीं हो सका और वही विरह उनकी रचनाओं में दिखता है। विद्रोही चेतना और साहस का भाव उनकी सम्पूर्ण रचनाओं में दिखाई पड़ता है।'विस्तृत नभ का कोई कोना’जैसी महत्त्वपूर्ण पंक्ति पर भी उन्होंने विशेष रूप से प्रकाश डाला।



 
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