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टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी मानी जाती है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम पैंक्रियाज की उन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है जो इंसुलिन बनाने का काम करती हैं। जब शरीर में इंसुलिन का उत्पादन कम या बंद हो जाता है, तो ब्लड शुगर का स्तर असंतुलित होने लगता है। पहले यह समस्या मुख्य रूप से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन हाल के वर्षों में बच्चों और किशोरों में भी इसके मामले तेजी से बढ़े हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी की समय पर पहचान बेहद जरूरी है। शुरुआत में दिखने वाले लक्षणों को नजरअंदाज करने से आगे चलकर स्थिति गंभीर हो सकती है।
टाइप 1 डायबिटीज के शुरुआती लक्षण
इस बीमारी के कुछ आम संकेत इस प्रकार बताए जाते हैं:
योग गुरु बाबा रामदेव का कहना है कि अगर इन लक्षणों पर शुरुआती दौर में ध्यान दिया जाए और सही दिनचर्या अपनाई जाए, तो स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
बाबा रामदेव के अनुसार डायबिटीज के मुख्य कारण
बाबा रामदेव के अनुसार डायबिटीज के पीछे तीन प्रमुख कारण माने जाते हैं। पहला और सबसे अहम कारण पैंक्रियाज का कमजोर या क्षतिग्रस्त होना, जिससे इंसुलिन उत्पादन प्रभावित होता है। दूसरा कारण अत्यधिक सिंथेटिक दवाओं का सेवन बताया जाता है, जिसका असर खासतौर पर बच्चों के शरीर पर पड़ता है। तीसरा बड़ा कारण आज की अनहेल्दी लाइफस्टाइल, तनाव और बढ़ता प्रदूषण है, जो मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है।
खानपान में बदलाव पर जोर
बाबा रामदेव के अनुसार, किसी भी बीमारी को नियंत्रित करने में डाइट की भूमिका सबसे अहम होती है। टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों को अपने भोजन में कुछ जरूरी बदलाव करने की सलाह दी जाती है।
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सब्जियां और जूस: टमाटर, खीरा और करेले का जूस फायदेमंद माना जाता है। इसके साथ ही लौकी, ब्रोकली, भिंडी, टिंडा, पालक और बीन्स जैसी हरी सब्जियां डाइट में शामिल करने की बात कही जाती है।
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ग्लाइसेमिक इंडेक्स का ध्यान: अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
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संतुलित आहार: साबुत अनाज, लीन प्रोटीन, हेल्दी फैट्स और बीजों को भोजन में शामिल करना उपयोगी बताया जाता है।
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किन चीजों से बचें: प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड चीनी और ज्यादा सैचुरेटेड फैट के सेवन को सीमित करने की सलाह दी जाती है।
नीम और करेले से जुड़ी प्राकृतिक थेरेपी
बाबा रामदेव द्वारा बताई गई एक खास प्राकृतिक विधि में नीम और करेले के पेस्ट का उल्लेख किया जाता है। इस पेस्ट को एक समतल बर्तन में फैलाकर उस पर रोज कुछ समय तक नंगे पैर चलने की प्रक्रिया बताई जाती है। उनके अनुसार, यह पारंपरिक पद्धति ब्लड शुगर को संतुलित रखने में सहायक हो सकती है।
योगासन जो बताए जाते हैं लाभकारी
सिर्फ खानपान ही नहीं, बल्कि नियमित योग अभ्यास को भी बेहद जरूरी माना जाता है। बाबा रामदेव के अनुसार कुछ योगासन ऐसे हैं, जिनका नियमित अभ्यास पैंक्रियाज को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है।
इनमें प्रमुख रूप से:
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मंडूकासन
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वक्रासन
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पवनमुक्तासन
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उत्तानपादासन
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योग मुद्रासन और वज्रासन
उनका मानना है कि ये योगासन न केवल डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए, बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी लाभकारी हो सकते हैं।
भारतीय परंपरा और प्राकृतिक जीवनशैली पर जोर
भारत में प्राचीन काल से ही योग और प्राकृतिक चिकित्सा को जीवन का अहम हिस्सा माना गया है। बाबा रामदेव का कहना है कि आज जब दुनिया भर में लोग योग अपनाकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं, तब भारतीयों का अपनी पारंपरिक जीवनशैली से दूर होना चिंता का विषय है। संतुलित आहार, नियमित योग और अनुशासित दिनचर्या अपनाकर कई बीमारियों से बचाव संभव बताया जाता है।